बॉम्बे हाई कोर्ट: मुस्लिम आरक्षण कोटा हटाने के खिलाफ दायर याचिका पर महाराष्ट्र सरकार से मांगा जवाब, समुदाय के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण रद्द

मुस्लिम आरक्षण कोटा हटाने के खिलाफ दायर याचिका पर महाराष्ट्र सरकार से मांगा जवाब, समुदाय के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण रद्द
  • शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मुस्लिम समुदाय के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण
  • सरकार ने मुस्लिम समुदाय के लिए आरक्षण को कर दिया है रद्द
  • 4 मई को मामले की अगली सुनवाई

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मुस्लिम आरक्षण कोटा हटाने के खिलाफ दायर याचिका पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में राज्य के सामाजिक न्याय और विशेष सहायता विभाग द्वारा 17 फरवरी 2026 को जारी सरकारी शासनादेश (जीआर) को चुनौती दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 4 मई को रखी गई है। न्यायमूर्ति आर.आई. छागला और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने वकील सैयद एजाज अब्बास नकवी की याचिका पर राज्य सरकार से तीन सप्ताह के भीतर हलफनामे के जरिए अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। पीठ ने यह संकेत दिया है कि वह इस फैसले की कानूनी और संवैधानिक वैधता की जांच करेगा। इस मामले के नतीजे का महाराष्ट्र में आरक्षण नीतियों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर महत्वपूर्ण असर पड़ने की उम्मीद है। याचिका में दावा किया गया है कि राज्य सरकार का फैसला संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करता है और मुस्लिम समुदाय के हितों के लिए हानिकारक है। यह बिना किसी वैध आधार के एक अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाता है। सरकार का कोटा वापस लेना असमान व्यवहार के बराबर है और मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन करता है। सरकार के इस फैसले के पीछे किसी स्पष्ट तर्क का अभाव गंभीर कानूनी चिंताएं पैदा करता है।

क्या है पूरा मामला

जुलाई 2014 को तत्कालीन कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने कुछ समुदायों के लिए आरक्षण के उपाय पेश किए थे। इस नीति में मराठा समुदाय के लिए 16 प्रतिशत कोटा और पिछड़े वर्ग की श्रेणी के तहत शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मुसलमानों के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण शामिल था। हालांकि इस फैसले को कानूनी जांच का सामना करना पड़ा। हाई कोर्ट ने नौकरियों में आरक्षण देने वाले प्रावधान को रद्द कर दिया था, लेकिन शैक्षणिक संस्थानों में 5 फीसदी कोटा जारी रखने की अनुमति दी थी। 17 फरवरी 2026 के सरकारी शासनादेश (जीआर) के अनुसार विशेष पिछड़ा वर्ग (ए) के तहत शामिल सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े मुस्लिम समूह के लिए सरकारी और अर्ध-सरकारी नौकरियों तथा शैक्षणिक संस्थानों में पांच प्रतिशत आरक्षण से संबंधित सभी पिछले फैसले और अध्यादेश रद्द कर दिए गए हैं।

Created On :   2 April 2026 8:19 PM IST

Tags

और पढ़ेंकम पढ़ें
Next Story