सियासी हलचल: राकांपा अजित गुट के वरिष्ठ मंत्री का दावा - प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे से नाराज हैं सुनेत्रा पवार

राकांपा अजित गुट के वरिष्ठ मंत्री का दावा - प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे से नाराज हैं सुनेत्रा पवार
  • दोनों नेताओं को लेकर फैल रही खबरें पूरी तरह निराधार- पार्थ पवार
  • अजित पवार के निधन के बाद राकांपा (अजित) में सियासी हलचल तेज
  • खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है

Mumbai News. दिवंगत पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद राकांपा (अजित) में सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी के भीतर नेतृत्व और अधिकारों को लेकर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। राकांपा (अजित) के एक वरिष्ठ मंत्री ने 'दैनिक भास्कर' से बातचीत में कहा कि राकांपा (अजित) की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार अपने कार्याध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे से नाराज हैं। हालांकि इस बीच अजित गुट के नेता और सांसद पार्थ पवार ने अपने वरिष्ठ नेताओं प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे का बचाव करते हुए इन खबरों को बेबुनियाद बताया है।

अंदरखाने नाराजगी की चर्चा

राकांपा (अजित) के एक वरिष्ठ मंत्री ने दावा किया है कि सुनेत्रा पवार की तटकरे और प्रफुल्ल पटेल से नाराजगी की खबरें जो मीडिया में सुर्खियां बन रही हैं, वह सच है। हालांकि इस मंत्री ने यह भी कहा कि पार्टी से ऊपर कोई नहीं होता और सभी को पार्टी अध्यक्ष को भरोसे में रहकर काम करना चाहिए। इस मुद्दे पर सुनेत्रा पवार ही कुछ कह सकती हैं।

बेबुनियाद हैं आरोप - पार्थ पवार

पार्थ पवार ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे को लेकर फैल रही खबरें पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने कहा कि बेबुनियाद अटकलों पर आधारित कहानियों के जरिए वरिष्ठ नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। उनका दशकों का समर्पण और नेतृत्व आज भी हम सभी का मार्गदर्शन कर रहा है। ऐसे नेताओं को विवादों में घसीटना दुर्भाग्यपूर्ण है।

क्या है मामला?

दरअसल इस पूरे विवाद की जड़ चुनाव आयोग को लिखा गया पत्र है। 16 फरवरी को प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा था। पत्र में मांग की गई थी कि पार्टी के कार्याध्यक्ष को भी राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसे अधिकार दिए जाएं। इस पत्र के सामने आने के बाद पार्टी के भीतर सत्ता संतुलन को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। इस बीच सुनेत्रा ने पटेल और तटकरे से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा। जब दोनों नेता सुनेत्रा को अपने जवाब से संतुष्ट नहीं कर पाए तो फिर सुनेत्रा ने इसके बाद 10 मार्च को चुनाव आयोग को अलग पत्र भेजकर 16 फरवरी के पत्र को नजरअंदाज करने को कहा। इस पत्र में दोनों ही नेताओं के पद का भी जिक्र नहीं किया गया था। यहीं से सवाल उठने लगे कि क्या प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे को साइडलाइन किया जा रहा है?

Created On :   2 April 2026 9:08 PM IST

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