बॉम्बे हाई कोर्ट: 48 साल चली मुंबई में एक फ्लैट की खरीद - बिक्री की लंबी कानूनी लड़ाई को सुलझाया

48 साल चली मुंबई में एक फ्लैट की खरीद - बिक्री की लंबी कानूनी लड़ाई को सुलझाया
  • अदालत ने फ्लैट मालिक को फ्लैट खरीदने वाले को सौंपने फ्लैट का दिया आदेश
  • अदालत ने ट्रायल कोर्ट के 2007 के फ्लैट मालिक के पक्ष में दिए फैसले को किया रद्द

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट ने 48 साल चली मुंबई में एक फ्लैट की खरीद-बिक्री की लंबी कानूनी लड़ाई को सुलझाई है। अदालत ने फ्लैट मालिक को फ्लैट खरीदने वाले व्यक्ति को फ्लैट सौंपने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि फ्लैट खरीदने वाले व्यक्ति ने साबित किया कि वह समझौता पूरा करने के लिए तैयार था। फ्लैट मालिक गलत तरीके से पीछे हटा। इसलिए कोर्ट ने समझौते को लागू किया, लेकिन न्यायसंगत संतुलन के लिए अतिरिक्त राशि जोड़ी गई है।

न्यायमूर्ति फिरदोष पी. पूनीवाला की एकल पीठ ने स्वर्गीय एम.के. माधवन की जगह उनकी विधवा नलिनी की याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि फ्लैट खरीदने वाला व्यक्ति समझौता पूरा करने के लिए तैयार और इच्छुक थे, लेकिन फ्लैट मालिक उन्हें फ्लैट देने के लिए तैयार नहीं थे। पीठ ने कहा कि दोनों में समझौता होने की साबित हुई। फ्लैट मालिक ने खुद स्वीकार किया कि सौदा हुआ था और 30 हजार रुपए लिए थे। फ्लैट खरीदने वाले व्यक्ति की तत्परता और इच्छा साबित हुई। 1 सितंबर 1981 का पत्र दिखाता है कि फ्लैट खरीदने वाले व्यक्ति लगातार फ्लैट मांग रहा था, लेकिन फ्लैट मालिक ने उसे फ्लैट देने से इनकार कर दिया। पीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का यह कहना कि फ्लैट खरीदने वाले व्यक्ति तैयार नहीं था। यह गलत माना गया। पैसे कोर्ट में जमा न करना भी कोई जरूरी शर्त नहीं है। फ्लैट मालिक का बचाव कमजोर साबित हुआ। फ्लैट मालिक की कहानी (फ्लैट खरीदने वाले व्यक्ति पैसे नहीं दे पाया) दस्तावेजों से साबित नहीं हुई। यह बाद में बनाई गई कहानी साबित हुई।

पीठ ने माना कि ट्रायल कोर्ट ने तथ्यों और कानून को सही तरीके से नहीं समझा। इसलिए उसका निर्णय गलत पाया गया है। उसे रद्द किया जाता है। हालांकि 1978 के 50 हजार रुपए में फ्लैट खरीदने के समझौते के बाद से अब तक प्रॉपर्टी की कीमत बहुत बढ़ गई है। इसलिए केवल 20 हजार रुपए देकर फ्लैट देना फ्लैट मालिक के साथ अन्यायपूर्ण होगा। हम संतुलन बनाने के लिए अतिरिक्त राशि तय की है। फ्लैट खरीदने वाले व्यक्ति (याचिकाकर्ता) को 20 हजार रुपए के अलावा 25 लाख रुपए फ्लैट के लिए अतिरिक्त देना होगा। इसके बाद फ्लैट मालिक उसे फ्लैट सौंप देगा। माधवन की याचिका स्वीकार की गई है और ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दी गई है।

क्या है पूरा मामला

फ्लैट खरीदने वाले व्यक्ति एम.के. माधवन और फ्लैट मालिक आर. सुब्रमण्यम वडाला के ‘मंगला गुडविल को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड' पड़ोसी थे। उनका 1978 में एक मौखिक समझौता हुआ कि एम.के. माधवन 50 हजार रुपए में आर. सुब्रमण्यम का फ्लैट खरीदेगें। इसके लिए उन्होंने (माधवन) 30 हजार रुपए दे दिए और बाकी 20 हजार रुपए देकर फ्लैट पर कब्जा लेना था। फ्लैट मालिक सुब्रमण्यम ने बाद में फ्लैट देने से मना कर दिया और माधवन को 30 हजार रुपए वापस करने की कोशिश की।

माधवन ने पैसे वापस लेने से इनकार कर दिया और फ्लैट खरीदने के समझौते को लागू करवाने के लिए मुकदमा कर किया। ट्रायल कोर्ट ने 2007 में उन्हें समझौते को लागू करवाने के लिए फ्लैट देने से मना किया और केवल 30 हजार रुपए 12 फीसदी ब्याज से वापस देने का आदेश दिया। उन्होंने ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद हाई कोर्ट ने फ्लैट खरीदने वाले व्यक्ति के हक में फैसला सुना है।

Created On :   2 April 2026 8:07 PM IST

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