बॉम्बे हाई कोर्ट: लोकल ट्रेन से गिर कर एक महिला समेत दो यात्रियों की मौत मामले में 15 साल की कानूनी लड़ाई के बाद मृतकों के परिजनों को मिला न्याय

लोकल ट्रेन से गिर कर एक महिला समेत दो यात्रियों की मौत मामले में 15 साल की कानूनी लड़ाई के बाद मृतकों के परिजनों को मिला न्याय
  • अदालत ने मृतक महिला की बेटी और मृतक पुरुष की विधवा को 8-8 लाख मुआवजा देने का दिया आदेश
  • अदालत ने दोनों मृतक यात्रियों को रेलवे यात्री नहीं मानने के रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल के फैसले को किया रद्द

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट से लोकल ट्रेन से गिर कर एक महिला समेत दो यात्रियों की मौत के मामले में 15 साल से अधिक कानूनी लड़ाई के बाद मृतकों के परिजनों को न्याय मिला है। अदालत ने दो अलग-अलग फैसले में मृतक महिला की बेटी और मृतक पुरुष की विधवा को ब्याज के साथ 8-8 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने दोनों मृत यात्रियों को रेलवे यात्री नहीं मानने के रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल के फैसले को रद्द कर दिया है। लोकल ट्रेन से गिर कर पांच साल के आंकड़ों को देखें, तो वर्ष 2021 में 277, 2022 में 700, 2023 में 590, 2024 में 570 और 2025 में 525 यात्रियों की ट्रेन से गिर कर मौत हुई थी।

न्यायमूर्ति जितेंद्र जैन की एकल पीठ ने कोरिना वैलेंटिना डिसूजा की याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि यात्री के पिता ने घटना की तारीख को पुलिस स्टेशन में दिए अपने बयान में अपने बेटे की दिनचर्या का जिक्र किया है। पहली बार में उपलब्ध इस बयान को याचिकाकर्ता के पक्ष में माना जाना चाहिए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण पत्र केवल चोट की प्रकृति और मृत्यु का कारण ही दर्शाते हैं, लेकिन यह नहीं बताया कि मृतक की मृत्यु वैलेंटिना डिसूजा अनाधिकृत प्रवेश या रेलवे ट्रैक पार करने के कारण हुई। रेलवे ने ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया है, जिससे यह साबित हो सके कि डिसूजा अनाधिकृत प्रवेश करने वाला था या किसी अज्ञात ट्रेन की चपेट में आने से पहले रेलवे ट्रैक पार कर रहा था।

कोरिना डिसूजा द्वारा याचिका दायर की थी, जिसमें रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल द्वारा दिनांक 28 फरवरी 2014 को पारित आदेश को चुनौती दी थी। वैलेंटाइन डिसूजा की मृत्यु के कारण मुआवजे के लिए दायर आवेदन को ट्रिब्यूनल ने इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि यह घटना ‘अतिक्रमण' (ट्रेस्पासिंग) के कारण हुई थी। 18 मार्च 2011 को दोपहर में यात्री अपने काम के लिए घर से निकला और दादर जाने वाली लोकल ट्रेन पकड़ने के लिए नायगांव रेलवे स्टेशन पहुंचा। उसकी ट्रेन पकड़ते समय गिर कर मौत हो गई।

इसी तरह पीठ ने मृतक श्यामल सचिन साल्वी की बेटी रजनी रविंद्र पोल की भी याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि चोट की प्रकृति के आधार पर ट्रिब्यूनल का यह तर्क कि यात्री की मृत्यु अनाधिकृत प्रवेश या रेलवे लाइन पार करने के कारण हुई। यह मान्य नहीं ठहराया जा सकता। प्रतिवादी रेलवे ने किसी भी गवाह की, जिसमें कोई मेडिकल विशेषज्ञ भी शामिल है। ट्रिब्यूनल चोट की प्रकृति के आधार पर किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए कोई विशेषज्ञ निकाय नहीं है। इसलिए इस पहलू पर ट्रिब्यूनल का निष्कर्ष मान्य नहीं ठहराया जा सकता है। यात्री की मृत्यु ट्रेन से दुर्घटनाग्रस्त होकर गिरने के कारण हुई थी। इसलिए मुआवजे का दावा स्वीकार किया जाना चाहिए। मृतक की बेटी को मुआवजे की कुल राशि ब्याज सहित 8 लाख रुपए 12 सप्ताह के भीतर देनी होगी। की अधिकतम सीमा के अधीन होगी।

याचिकाकर्ता बेटी ने रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल (ट्रिब्यूनल) के 31 जनवरी 2018 के ऑर्डर को चुनौती दी थी, जिसमें उसके क्लेम सिर्फ इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि यह रेलवे एक्ट 1989 के तहत बताई गई "अनचाही घटना’ नहीं है। श्यामल सचिन साल्वी 28 दिसंबर 2010 को एक वैलिड सीजन पास के साथ नालासोपारा से सांताक्रुज जा रही थी। वह हाउसमेड के तौर पर काम कर रही थी। ट्रिब्यूनल ने यात्री के ट्रैक पार करते समय ट्रेन की चपेट में आने की बात करते हुए दावा खारिज कर दिया था।

Created On :   19 March 2026 9:14 PM IST

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