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Mumbai News: आदिवासी और अनुसूचित जाति की छात्राओं को शिक्षा की ओर आकर्षित करने शुरू हुई थी स्कीम, नहीं बढ़ा छात्राओं का एक रुपया उपस्थिति भत्ता

Mumbai News. प्रदेश में कक्षा पहली से चौथी तक की आदिवासी और अनुसूचित जाति की छात्राओं के लिए लागू एक रुपया उपस्थिति भत्ता 34 वर्ष बीतने के बावजूद भी नहीं बढ़ा है। प्रदेश के स्कूली शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने एक रुपया उपस्थिति भत्ता बढ़ाने के लिए राज्य सरकार के नियोजन (योजना) विभाग से आग्रह करने का आश्वासन दिया है। बीते बुधवार को विधान परिषद में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए शिवसेना (उद्धव) विधायक जगन्नाथ अभ्यंकर और कांग्रेस विधायक अभिजीत वंजारी ने भत्ता बढ़ाने का मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में भुसे ने कहा कि राज्य के प्राथमिक स्कूलों में छात्राओं को आकर्षित करने के लिए वर्ष 1992 में उपस्थिति भत्ता योजना (स्कीम) शुरू की गई थी। जिसे राज्य के स्कूली शिक्षा विभाग संचालित कर रहा था। इसके तहत कक्षा पहली से चौथी तक अनुसूचित जाति, घुमंतु जाति व घुमंतु जनजाति की गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाली छात्राओं को प्रति दिन एक रुपया उपस्थिति भत्ता लागू है।
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छात्राओं की स्कूल में एक शैक्षणिक वर्ष में 75 प्रतिशत से अधिक उपस्थिति होने पर अधिकतम 220 रुपए भत्ता दिया जाता है। 13 मई 2022 से इस योजना को लागू करने की जिम्मेदारी जिला योजना व विकास समिति (डीपीडीसी) को दी गई है। फिलहाल इस योजना को जिलों की डीपीडीसी ही लागू करती है। भुसे ने दावा करते हुए कहा कि सरकार ने उपस्थिति भत्ता नहीं बढ़ाया है मगर छात्राओं को पढ़ने को लेकर स्कूलों में आकर्षित करने के लिए मध्यान्ह भोजन योजना, मुफ्त किताबें, साइकिल वितरण समेत अन्य योजनाओं को शुरू किया है। छात्राओं की सुरक्षा के लिए स्कूलों में सीसीटीवी कैमरा लगाने, महिला शिक्षकों की नियुक्ति की जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर अगले एक महीने में राज्य के स्कूलों में छात्राओं के लिए स्वतंत्र शौचालय की व्यवस्था की जाएगी। राज्य के प्रत्येक स्कूलों में छात्राओं के लिए स्वतंत्र सुविधा कक्ष (पिंक रूम) बनाया जाएगा। भुसे ने कहा कि डीपीडीसी की 5 प्रतिशत निधि शिक्षा पर खर्च करने का प्रावधान है। लेकिन कई जिलों में 10 से 12 प्रतिशत तक निधि खर्च की जा रही है।
Created On :   19 March 2026 9:42 PM IST










