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विधानसभा: 470 करोड़ का क्रेडिट नोट मिलने के बाद भी बिल्डर ने नहीं शुरू किया काम, गड़बड़ी की होगी जांच

Mumbai News. मालाड पूर्व स्थित पीएपी (प्रोजेक्ट अफेक्टेड पर्सन) पुनर्वसन प्रोजेक्ट में कथित अनियमितताओं को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं। गृह निर्माण राज्यमंत्री माधुरी मिसाल ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान विधानसभा में स्पष्ट किया कि अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में इस मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी और रिपोर्ट आने के बाद ही परियोजना पर आगे काम शुरू किया जाएगा। यह मामला कांग्रेस विधायक असलम शेख ने उठाया। मंत्री माधुरी मिसाल ने बताया कि मालाड (पूर्व) में प्रोजेक्ट प्रभावित लोगों के पुनर्वसन के लिए महानगरपालिका द्वारा 470 करोड़ रुपये का क्रेडिट नोट और 100 प्रतिशत टीडीआर (ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स) दिए जाने के बावजूद संबंधित बिल्डर ने अब तक कोई निर्माण योजना प्रस्तुत नहीं की है। इस पूरे मामले की गहन जांच की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जमीन की कीमत को लेकर भी आपत्तियां सामने आई हैं, क्योंकि नोंदणी एवं मुद्रांक शुल्क विभाग द्वारा तय दर से अधिक मूल्य लगाया गया है। साथ ही यह भी जांच होगी कि संबंधित भूखंड ‘इको-सेंसिटिव जोन’ में आता है या नहीं और इसके लिए वन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) आवश्यक है या नहीं। इस विषय पर हुई चर्चा में विधायक योगेश सागर और मुरजी पटेल ने भी हिस्सा लिया और परियोजना में पारदर्शिता की मांग की।
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जोगेश्वरी में एसआरए के 25 साल से बंद पड़े प्रोजेक्ट की जांच 15 दिन में होगी- शंभूराज देसाई
जोगेश्वरी (पूर्व) स्थित मयूर नगर एसआरए प्रोजेक्ट को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। पर्यटन मंत्री शंभूराज देसाई ने विधानसभा में कहा कि इस प्रोजेक्ट की दोबारा जांच कर 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाएगी। यह मामला उद्धव गुट के विधायक अनंत नर ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान उठाया। उन्होंने बताया कि जोगेश्वरी (पूर्व) स्थित यह एसआरए प्रोजेक्ट पिछले 25 वर्षों से अधूरा है और 751 पात्र लाभार्थियों को अब तक बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। मंत्री देसाई ने कहा कि वर्ष 1996 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट में 2003 से लोग रह रहे हैं, लेकिन इमारतें अब जर्जर हो चुकी हैं और कई तरह की असुविधाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में पात्रता, लंबित ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट और अवैध निर्माण जैसे सभी मुद्दों की संयुक्त जांच के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में डेवलपर की ओर से अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो एसआरए नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर डेवलपर को हटाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
Created On :   18 March 2026 10:08 PM IST









