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बॉम्बे हाई कोर्ट: पुरानी संपत्ति पर बाद में दावा करना गलत और दुरुपयोग है, महिला पर लगाया 5 लाख का जुर्माना

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट ने गोरेगांव की एक जमीन के विवाद में अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि पुरानी संपत्ति पर बाद में दावा करना गलत और दुरुपयोग है। 13 साल की देरी बिना ठोस कारण के माफ नहीं की जा सकती। बिना कारण बताए दिया गया आदेश अवैध होता है। अदालत ने अतिरिक्त आयुक्त द्वारा 8 अप्रैल 2024 को पारित आदेश को रद्द किया जाता है और जमीन के लिए मुकदमा करने वाली महिला पर 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। उसे जुर्माने की रकम अदालत के आदेश से चार सप्ताह के अंदर उस याचिकाकर्ता कंपनी को चुकाना होगा, जिसके खिलाफ मुकदमा किया गया था।
न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ ने गोरेगांव की ‘निर्लान’ कंपनी की दायर याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि प्रतिवादी जान्हवी सीताराम देसाई ने मुकदमा किसी छिपे हुए मकसद और सट्टेबाजी की मंशा से दायर की थी। उनके पिता ने मूल्यवान प्रतिफल के बदले नक्शे में लाल रंग से दर्शायी गई समस्त भूमि बेच दी थी। घेरे हुए क्षेत्र पूरी तरह से खरीदे गए विभिन्न टुकड़ों और हिस्सों के बीच में स्थित हैं। वह क्षेत्र अब याचिकाकर्ता द्वारा दावा की जा रही भूमि से सटा हुआ नहीं है, जिससे कि उसमें कोई अधिकार प्रदान हो सके या उसका कोई संकेत भी मिल सके। इसलिए यह स्पष्ट है कि वर्तमान दावा बदनीयती से किया गया है, जिसका स्पष्ट उद्देश्य परेशान करना या पैसे ऐंठना है।
पीठ ने कहा कि इस मामले में दिया गया निर्णय देरी की माफी के आवेदनों पर विचार करते समय उदार दृष्टिकोण का समर्थन करता है। हालांकि उस निर्णय को अलग-थलग करके नहीं पढ़ा जा सकता और न ही इसे एक बिना शर्त वाले सिद्धांत के रूप में माना जा सकता है कि देरी को अनिवार्य रूप से माफ ही किया जाना चाहिए। मुकदमेबाजी तेजी से ब्लैकमेल, जबरन वसूली या लॉटरी का टिकट खरीदने जैसी सट्टेबाजी की प्रवृत्ति का एक साधन बनती जा रही है। वर्तमान मामला इस परेशान करने वाली प्रवृत्ति को दर्शाने वाला एक और उदाहरण है। ऐसी तुच्छ मुकदमेबाजी को प्रारंभिक चरण में ही रोक दिया जाना चाहिए। विशिष्ट विधायी उपायों के अभाव में खर्च लगाना ही न्यायालय के पास न्यायिक प्रक्रिया के ऐसे दुरुपयोग को हतोत्साहित करने के लिए उपलब्ध सबसे प्रभावी साधन है।
याचिकाकर्ता कंपनी निर्लान लिमिटेड ने 1962 से 1965 के बीच मुंबई के गोरेगांव में जमीन खरीदी और कई वर्षों से उसका शांतिपूर्ण कब्जा रहा और उसने उसका विकास किया। 2010 में कलेक्टर ने क्षेत्र सुधार आदेश पास किया। इसके 13 साल बाद 2023 में पूर्व मालिक की बेटी जान्हवी सीताराम देसाई ने उस आदेश के खिलाफ अतिरिक्त आयुक्त के समक्ष अपील दायर की। अतिरिक्त आयुक्त द्वारा 8 अप्रैल 2024 को याचिकाकर्ता कंपनी के खिलाफ आदेश पास किया, जिसे उसने हाई कोर्ट में चुनौती दी।
Created On :   18 March 2026 5:28 PM IST









