विधानसभा: पंचायत व्यवस्था में बड़ा बदलाव - जिला परिषद-पंचायत समिति संशोधन विधेयक पास, खत्म हुआ मुंबई में कोड़े मारने का कानून, सेल्फ फाइनेंस स्कूल बिल पर गरमाई बहस

पंचायत व्यवस्था में बड़ा बदलाव - जिला परिषद-पंचायत समिति संशोधन विधेयक पास, खत्म हुआ मुंबई में कोड़े मारने का कानून, सेल्फ फाइनेंस स्कूल बिल पर गरमाई बहस
  • खत्म हुआ मुंबई में कोड़े मारने का कानून, 80 पुराने अधिनियम व कानून निरस्त
  • सेल्फ फाइनेंस स्कूल बिल पर विधानसभा में गरमाई बहस- सरकार बोली, सुविधाएं बढ़ेंगी, विपक्ष ने उठाया आरक्षण का मुद्दा
  • मुंबई में फर्जी नेवी अफसर बनकर ठगी का मामला विधानसभा में उठा

Mumbai News. राज्य सरकार ने ग्रामीण प्रशासन को मजबूत करने के लिए पंचायत व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की दिशा में कदम उठाया है। राज्य सरकार ने जिला परिषद एवं पंचायत समिति संशोधन विधेयक मंगलवार को विधानसभा में पेश किया। जिसे ध्वनिमत से पास कर दिया गया। अब यह विधेयक कानून बनने से पहले विधान परिषद में पेश किया जाएगा। इस संशोधन के तहत, जिला परिषद और पंचायत समिति में अब विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी मौका मिल सकेगा। कुल निर्वाचित सदस्यों के आधार पर नामांकित सदस्यों की नियुक्ति का प्रावधान होगा। पंचायत समिति में 20 फीसदी तक या कम से कम 1 सदस्य नामांकित किया जा सकेगा। नामांकित सदस्यों के अधिकार सीमित होंगे। नामांकित सदस्य बैठकों में वोट नहीं कर सकेंगे। वे अध्यक्ष या उपाध्यक्ष नहीं बन पाएंगे। नामांकन प्रक्रिया कलेक्टर की देखरेख में होगी। राजनीतिक दलों की ताकत के अनुपात में सदस्य चुने जाएंगे। विधेयक पेश करते समय ग्रामीण विकास मंत्री जयकुमार गोरे ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रशासन में विशेषज्ञों की भागीदारी बढ़ाना है। इसके साथ ही ग्रामीण विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाना है। इस संशोधन से पंचायत व्यवस्था में अनुभवी लोगों की भागीदारी बढ़ेगी, हालांकि सीमित अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो सकती है।

खत्म हुआ मुंबई में कोड़े मारने का कानून, 80 पुराने अधिनियम व कानून निरस्त

महाराष्ट्र में अप्रचलित हो चुके 80 अधिनियमों और कानूनों को निरस्त करने वाला विधेयक मंगलवार को विधानसभा में पारित कर दिया गया। सुशासन और प्रशासनिक कामकाज को अधिक सरल बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। विधानसभा में “महाराष्ट्र राज्य में विवक्षित अधिनियमों के निरसन हेतु विधेयक” सामान्य प्रशासन विभाग के मंत्री आशिष शेलार ने पेश किया। चर्चा के बाद इसे सदन ने मंजूरी दे दी गई। मंत्री शेलार ने कहा कि संवैधानिक बदलाव, राज्य पुनर्गठन और नए कानून बनने के कारण कई पुराने अधिनियम अब अप्रासंगिक हो चुके हैं। इनका संदर्भ बने रहने से भ्रम की स्थिति पैदा होती है। इसलिए राज्य में लागू सभी कानूनों की समीक्षा की जा रही है और जो उपयोग में नहीं हैं, उन्हें समाप्त किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत मुंबई अधिनियम, मुंबई विनियम, बंगाल विनियम, मध्य प्रांत एवं वर्हाड़ अधिनियम, हैदराबाद अधिनियम और मध्य प्रदेश अधिनियम जैसे विभिन्न कानूनों को निरस्त करने का निर्णय लिया गया है। कुल 80 अधिनियमों में 24 मुंबई अधिनियम, 8 मध्य प्रांत वर्हाड़ अधिनियम, 18 हैदराबाद अधिनियम, 3 मध्य प्रदेश अधिनियम और 24 विनियोग अधिनियम शामिल हैं। मुंबई में कोड़े की सजा जैसे अप्रासंगिक कानून को भी समाप्त कर दिया गया है। अंग्रेजों ने भारत में दमनकारी कानून बनाए थे, जिसमें कोड़े मारना, यातना देना और शारीरिक दंड शामिल था, जो मुख्य रूप से विद्रोहियों को दबाने के लिए इस्तेमाल होता था। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान चंद्रशेखर आज़ाद जैसे क्रांतिकारियों को भी ऐसी कठोर शारीरिक सजाएं दी गई थीं।

सेल्फ फाइनेंस स्कूल बिल पर विधानसभा में गरमाई बहस- सरकार बोली, सुविधाएं बढ़ेंगी, विपक्ष ने उठाया आरक्षण का मुद्दा

विधानसभा में सेल्फ फाइनेंस स्कूल (संशोधन) विधेयक 2026 को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। मंगलवार को शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने कहा कि इस कानून में बदलाव का उद्देश्य शिक्षा का दायरा बढ़ाना, बेहतर सुविधाएं देना और व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना है। मंत्री भुसे ने सदन में कहा कि यह संशोधन पुराने प्रावधानों (2000, 2002 और 2012) को अपडेट करने के लिए जरूरी था। अब राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं को भी राज्य में सेल्फ फाइनेंस स्कूल खोलने की अनुमति दी जाएगी, जबकि पहले यह अधिकार केवल राज्य में पंजीकृत संस्थाओं तक सीमित था।

1 से 12 तक एक ही स्कूल में पढ़ाई की सुविधा

सरकार ने स्कूलों को बड़ी राहत देते हुए कहा कि जो संस्थान अभी 11वीं-12वीं चला रहे हैं, वे अब पहली से दसवीं तक की कक्षाएं भी शुरू कर सकेंगे। हालांकि, इसके लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं जैसे शौचालय, लाइब्रेरी, लैब और खेल का मैदान होना अनिवार्य होगा। मंत्री ने साफ किया कि जो स्कूल अचानक बंद हो जाते हैं, उन पर अब दोगुना जुर्माना लगाया जाएगा, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

‘पवित्र पोर्टल’ से होगी पारदर्शी भर्ती

भुसे ने बताया कि शिक्षकों की भर्ती ‘पवित्र पोर्टल’ के जरिए की जा रही है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है। खाली पदों को जल्द भरने का आश्वासन भी उन्होंने दिया। जरूरत पड़ने पर सेवानिवृत्त शिक्षकों की अस्थायी नियुक्ति की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा को व्यवसाय नहीं बनने दिया जाएगा। फीस तय करने में पैरेंट-टीचर कमेटियों की भूमिका होगी और संस्थानों को अपनी आय का हिस्सा स्कूल विकास में लगाना होगा।

आरक्षण पर टकराव

बहस के दौरान कांग्रेस विधायक नितिन राऊत ने सवाल उठाते हुए कहा कि इन स्कूलों में पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण नहीं देना संविधान की भावना के खिलाफ है। क्या सरकार शिक्षा का निजीकरण कर रही है? इस पर मंत्री भुसे ने जवाब देते हुए कहा कि सेल्फ फाइनेंस स्कूल अलग कानूनी ढांचे में आते हैं, इसलिए सीधे आरक्षण लागू नहीं होता। हालांकि आरटीई के तहत 25 फीसदी सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षित हैं। सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस के बाद यह विधेयक अंततः ध्वनिमत मत से पारित हो गया।

मुंबई में फर्जी नेवी अफसर बनकर ठगी का मामला विधानसभा में उठा

गृह राज्य मंत्री (शहर) योगेश कदम ने एक प्रश्न के जवाब में मंगलवार को विधानसभा में जानकारी दी कि घाटकोपर इलाके में खुद को नौसेना अधिकारी बताकर नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। इस मामले में करीब 2 लाख रुपये की धोखाधड़ी सामने आई है। कदम ने कहा कि पीड़ित को उनकी रकम वापस दिलाने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया है। यह मुद्दा सपा विधायक अबू आसिम आजमी ने उठाया। योगेश कदम ने कहा कि ठगी के मामलों में आरोपियों को आसानी से जमानत मिल जाती है। इसलिए ऐसे अपराधियों पर तड़ीपार जैसी कड़ी कार्रवाई भी की जा रही है, ताकि वे दोबारा अपराध न कर सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि धोखाधड़ी के लिए अलग कानून बनाने की जरूरत नहीं है। मौजूदा कानूनों के तहत ही प्रभावी कार्रवाई की जा रही है और सभी मामलों में आरोपी को गिरफ्तार किया जाता है। कदम ने नागरिकों से अपील की कि सरकारी नौकरी केवल आधिकारिक प्रक्रिया से ही मिलती है। किसी व्यक्ति को पैसे देकर नौकरी पाना संभव नहीं है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण लोग ऐसे झांसे में आ जाते हैं।

Created On :   17 March 2026 9:51 PM IST

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