Mumbai News: कैग रिपोर्ट में खुली आदिवासी व पिछड़ा वर्ग शिक्षा योजनाओं की पोल, हजारों विद्यार्थी लाभ से वंचित

कैग रिपोर्ट में खुली आदिवासी व पिछड़ा वर्ग शिक्षा योजनाओं की पोल, हजारों विद्यार्थी लाभ से वंचित
  • निजी स्कूलों में प्रवेश से लेकर छात्रावासों तक मिलीं गंभीर अनियमितताएं
  • करोड़ों रुपये के खर्च पर भी उठे सवाल

Mumbai News महाराष्ट्र में आदिवासी और पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों के लिए संचालित शिक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हाल ही में विधानसभा और विधान परिषद में पेश रिपोर्ट के अनुसार, आदिवासी विकास विभाग तथा सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग की कई योजनाओं में व्यापक अनियमितताएं और लापरवाही सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद योजनाओं का लाभ बड़ी संख्या में पात्र विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच सका।

हजारों आदिवासी विद्यार्थी प्रवेश से वंचित

कैग के अनुसार, आदिवासी विद्यार्थियों को अंग्रेजी माध्यम के निजी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2010-11 में योजना शुरू की गई थी। इसका लक्ष्य हर वर्ष 25 हजार नए विद्यार्थियों को प्रवेश दिलाना था, लेकिन 2018-19 से 2022-23 के बीच केवल 2,910 से 5,675 सीटों पर ही प्रवेश की मंजूरी दी गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2022-23 में 4,883 पात्र विद्यार्थियों ने आवेदन किया, जबकि केवल 2,910 सीटें उपलब्ध कराई गईं। इससे बड़ी संख्या में पात्र विद्यार्थी योजना का लाभ नहीं ले सके।

बीच में बदली नीति

कैग ने यह भी बताया कि पहली कक्षा के बाद दूसरी कक्षा में भी विद्यार्थियों को प्रवेश देने का प्रावधान था। हालांकि, 1,902 विद्यार्थियों के आवेदन आने के बाद सरकार ने नीति बदलते हुए दूसरी कक्षा में प्रवेश बंद कर दिया। रिपोर्ट में इसे सरकार की अपनी नीति के विपरीत निर्णय बताया गया है।

मानक पूरे नहीं करने वाले स्कूलों को मिली मंजूरी

रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि वर्ष 2018 से 2023 के बीच 81 से 134 निजी स्कूल ऐसे थे, जो निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरते थे, फिर भी उन्हें योजना में शामिल किया गया। 60 से कम ग्रेडिंग वाले स्कूलों को भी मंजूरी दी गई।

कैग की रिपोर्ट में सामने आईं प्रमुख अनियमितताएं

योजना से जुड़े 90% स्कूलों में शिक्षक अंग्रेजी माध्यम से शिक्षित नहीं थे।

कई स्कूलों में विज्ञान प्रयोगशाला जैसी अनिवार्य सुविधाएं नहीं थीं।

26 स्कूलों की ग्रेडिंग बिना किसी स्पष्ट नीति के बढ़ाई गई।

ग्रेडिंग बढ़ाने के कारण 9.53 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया।

समय पर स्कूलों का चयन नहीं होने से विद्यार्थियों का शैक्षणिक नुकसान हुआ।

नियमों के विपरीत 9 डे-बोर्डिंग स्कूलों को शामिल कर करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया।

योजना पर 1,398.62 करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन यह रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कि राशि वास्तव में आदिवासी विद्यार्थियों पर ही खर्च हुई।

पिछड़ा वर्ग छात्रावासों की स्थिति भी चिंताजनक

कैग रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 117 तालुकों में अब भी पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए सरकारी छात्रावास नहीं हैं। इसके कारण 8,930 शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी छात्रावास सुविधा से वंचित हैं।

सरकार ने वर्ष 2020 तक 500 सरकारी छात्रावास बनाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन मार्च 2024 तक केवल 443 छात्रावास ही तैयार हो सके। इनमें भी 155 छात्रावास किराये की इमारतों में संचालित हो रहे हैं।

बजट खर्च करने में भी विफलता

रिपोर्ट के अनुसार, छात्रावासों के लिए स्वीकृत 487.15 करोड़ रुपये में से 56.65 करोड़ रुपये खर्च ही नहीं किए जा सके। कई छात्रावासों में सीसीटीवी, अग्निशमन व्यवस्था, पुस्तकालय, कंप्यूटर लैब और भोजन कक्ष जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं थीं। कैग ने कुछ छात्रावासों के केवल कागजों पर संचालित होने की भी बात कही है।

कैग की रिपोर्ट ने राज्य में आदिवासी और पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए चलाई जा रही शिक्षा योजनाओं की प्रभावशीलता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



Created On :   11 July 2026 8:19 PM IST

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