बॉम्बे हाई कोर्ट: सार्वजनिक परिसर पर अनधिकृत कब्जा रखने वाला अधिनियम के तहत सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता

सार्वजनिक परिसर पर अनधिकृत कब्जा रखने वाला अधिनियम के तहत सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता
  • सार्वजनिक परिसर पर अनधिकृत कब्जा रखने वाला व्यक्ति महाराष्ट्र किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता
  • अदालत ने एलआईसीसी के पक्ष में निर्णय देते हुए किरायेदार के महाराष्ट्र किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत दायर मुकदमे को किया खारिज

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक परिसर पर अनधिकृत कब्जा रखने वाला व्यक्ति महाराष्ट्र किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता। यह सिद्धांत उन किरायेदारों पर भी लागू होगा, जो 1971 के अधिनियम से पहले की हों। अदालत ने एलआईसीसी के पक्ष में निर्णय देते हुए किरायेदार के महाराष्ट्र किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत दायर मुकदमे को खारिज कर दिया।

न्यायमूर्ति अरुण आर. पेडनेकर की एकल पीठ ने लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनआईसी) की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि यदि कोई संपत्ति सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जेदार को बेदखल करने का) अधिनियम 1971 के अंतर्गत आती है, तो उस संपत्ति के संबंध में बेदखली या किरायेदारी के विवादों में सार्वजनिक परिसर अधिनियम को प्राथमिकता मिलेगी और किराया नियंत्रण अधिनियम का संरक्षण उपलब्ध नहीं होगा। इसी आधार पर पीठ ने एलआईसी के पक्ष में निर्णय देते हुए किरायेदार का किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत दायर मुकदमा खारिज कर दिया।

पीठ ने माना कि संबंधित सार्वजनिक एलआईसी परिसर अधिनियम की धारा 2(ई) के अंतर्गत सार्वजनिक एलआईसी परिसर है। प्रतिवादी द्वारा दायर मुकदमा कानूनन सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि सार्वजनिक परिसर अधिनियम की धारा 15 के कारण उस पर रोक लागू होती है। इसलिए स्मॉल कॉज कोर्ट द्वारा वाद खारिज करने से इनकार करने वाला आदेश रद्द कर दिया गया। एलआईसी की याचिका स्वीकार कर ली गई और प्रतिवादी का मुकदमा खारिज कर दिया गया।

क्या है पूरा मामला

प्रतिवादी अभिषेक वसंत चव्हाण ने स्मॉल कॉज कोर्ट में मुकदमा दायर कर स्वयं को किरायेदार घोषित करने और बिना विधिक प्रक्रिया के बेदखल न किए जाने की घोषणा मांगी। उसने मुकदमे में दावा किया कि वह उस कमरे का किरायेदार है, जो एलआईसी की संपत्ति का हिस्सा है। स्मॉल कॉज कोर्ट ने प्रतिवादी के आवेदन को स्वीकार कर लिया, जिसे एनआईसी ने हाई कोर्ट में चुनौती दी। एलआईसी की ओर से दलील दी गई कि संबंधित संपत्ति सार्वजनिक परिसर है, इसलिए सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जेदार को बेदखल करने का) अधिनियम 1971 लागू होगा और उसकी धारा 15 के कारण सिविल कोर्ट का अधिकार क्षेत्र प्रतिबंधित है।

Created On :   6 July 2026 8:41 PM IST

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