आयुर्वेद उपचार, अनुसंधान को नई गति: 10 रुपए में 15 दिन की दवा, अब 50 बेड का आधुनिक आयुर्वेद अस्पताल बनेगा जरूरतमंदों का सहारा, वर्चुअल भूमिपूजन

10 रुपए में 15 दिन की दवा, अब 50 बेड का आधुनिक आयुर्वेद अस्पताल बनेगा जरूरतमंदों का सहारा, वर्चुअल भूमिपूजन
  • वर्चुअल भूमिपूजन केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री ने किया, 18 महीने में तैयार होगा आधुनिक अस्पताल
  • आयुर्वेद उपचार, अनुसंधान और प्रशिक्षण को मिलेगी नई गति
  • बढ़ेगी भर्ती मरीजों के इलाज की क्षमता
  • रोज 200 से 250 मरीजों को स्वास्थ्यकर्मी पूरी निष्ठा से दे रहे सेवाएं

Nagpur News. गुरुवार को मरीजों और क्षेत्र के लोगों के लिए एक और अच्छी खबर आई। 50 बिस्तरों वाले केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) के नए भवन का वर्चुअल भूमिपूजन केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने किया।

जब कई जगह इलाज कराने के बाद भी मरीजों को राहत नहीं मिलती, तब वे आयुर्वेद की ओर रुख करते हैं। उपराजधानी स्थित क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (आरएआरआई) में ऐसे मरीजों को कम खर्च में इलाज के साथ भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। यहां मात्र 10 रुपये में 15 दिन की दवा उपलब्ध कराई जाती है, जिससे प्रतिदिन 200 से 250 जरूरतमंद मरीज लाभान्वित हो रहे हैं।


आरएआरआई की सहायक निदेशक डॉ. सविता शर्मा ने बताया कि नए भवन के बनने के बाद नागपुर और आसपास के जिलों के लोगों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवाएं मिल सकेंगी। इससे मरीजों को बेहतर उपचार, अनुसंधान आधारित चिकित्सा और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा।


केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता राजेश कुमार ने बताया कि आधुनिक सुविधाओं से लैस इस भवन का निर्माण 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके शुरू होने से क्षेत्र में आयुर्वेद आधारित चिकित्सा, अनुसंधान और चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा मिलेगी।


संस्थान में वर्तमान में कार्यरत डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्ट और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी सीमित संसाधनों के बावजूद पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ मरीजों की सेवा कर रहे हैं। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि बड़ी संख्या में मरीज आयुर्वेदिक उपचार पर भरोसा जता रहे हैं।


प्रस्तावित अस्पताल में अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ मरीजों के इलाज की व्यवस्था होगी। भर्ती मरीजों की संख्या बढ़ाने के साथ कई नई विशेष चिकित्सा सेवाएं भी शुरू की जाएंगी। इसके अलावा क्लीनिकल रिसर्च, स्वास्थ्य नवाचार, चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण गतिविधियों को भी गति मिलेगी। भूमिपूजन के बाद जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है।

फिलहाल 16 बेड का अस्पताल संचालित

वर्तमान में क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, नागपुर में एनएबीएच मान्यता प्राप्त 16 बिस्तरों का आयुर्वेद अस्पताल संचालित है। यहां बाह्य और भर्ती दोनों प्रकार के मरीजों का उपचार किया जाता है। संस्थान सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों, अनुसंधान परियोजनाओं और शैक्षणिक सहयोग के माध्यम से नागपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है।


क्या है सीसीआरएएस?

केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) आयुष मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है। यह देश में आयुर्वेद और सोवा-रिग्पा चिकित्सा पद्धति पर वैज्ञानिक अनुसंधान, औषधीय पौधों के अध्ययन, दवाओं के मानकीकरण, क्लीनिकल रिसर्च और चिकित्सा साहित्य के विकास का प्रमुख संस्थान है। परिषद देशभर में लगभग 30 अनुसंधान संस्थानों, केंद्रों और इकाइयों के माध्यम से कार्य कर रही है तथा विश्वविद्यालयों, अस्पतालों और शोध संस्थानों के सहयोग से विभिन्न अनुसंधान परियोजनाएं संचालित करती है।


डॉ. सविता शर्मा ने बताया कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति केवल दवा पर आधारित नहीं है, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण स्वास्थ्य और जीवनशैली पर केंद्रित होती है। इसकी प्रमुख आधारशिलाएं हैं

  • त्रिदोष सिद्धांत – शरीर में वात, पित्त और कफ का संतुलन बनाए रखना। आयुर्वेद के अनुसार इन तीनों दोषों का असंतुलन ही अधिकांश रोगों का कारण बनता है।
  • प्राकृतिक उपचार – जड़ी-बूटियों, औषधीय पौधों, खनिजों और प्राकृतिक दवाओं के माध्यम से उपचार किया जाता है।
  • आहार और जीवनशैली – रोगों की रोकथाम और उपचार में संतुलित भोजन, नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद और व्यायाम को विशेष महत्व दिया जाता है।
  • पंचकर्म चिकित्सा – शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालकर शुद्धिकरण करने की विशेष उपचार पद्धति।
  • योग और ध्यान – शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए योग, प्राणायाम और ध्यान को उपचार का हिस्सा माना जाता है।
  • रोग की जड़ पर उपचार – आयुर्वेद केवल लक्षणों को दबाने के बजाय बीमारी के मूल कारण को दूर करने का प्रयास करता है।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना – शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा शक्ति (इम्यूनिटी) मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वस्थ रहे और बीमारियां दोबारा न हों।

Created On :   6 Aug 2026 9:02 PM IST

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