- Home
- /
- राज्य
- /
- महाराष्ट्र
- /
- नागपुर
- /
- उपराजधानी को एक और तमगा - यात्री...
नई पहचान: उपराजधानी को एक और तमगा - यात्री विमान बनाए जाएंगे मालवाहक, बनेगी ग्लोबल पहचान

Nagpur News. एयर इंडिया इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड (एआईईएसएल) ने नागपुर स्थित अपनी अत्याधुनिक मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (एमआरओ) सुविधा को अब नए वैश्विक स्तर पर ले जाने की रणनीति तैयार कर ली है। कंपनी अब केवल विमान रख-रखाव तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यहां यात्री विमानों को पूरी तरह कार्गो फ्रेटर में बदलने की क्षमता विकसित की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, एआईईएसएल का फोकस विशेष रूप से बोइंग 777 जैसे वाइड-बॉडी विमानों के पैसेंजर-टू-फ्रेटर (पीटूएफ) कन्वर्ज़न पर है। इस प्रक्रिया में विमान के भीतर मौजूद सीटें, विंडो सिस्टम और इंफोटेनमेंट जैसे सभी यात्री सुविधाओं को हटाकर उसे पूरी तरह माल ढुलाई के लिए तैयार किया जाएगा।
100 टन कार्गो क्षमता वाला ‘हाई-कैपेसिटी फ्रेटर’ बनेगा 777
प्रस्तावित योजना के तहत बोइंग 777 यात्री विमान को हाई-कैपेसिटी कार्गो मशीन में बदला जाएगा। एक सामान्य बोइंग 777 में जहां लगभग 350-400 यात्री बैठते हैं, वहीं पीटूएफ कन्वर्ज़न के बाद यह विमान करीब 100 टन (लगभग 2,20,000 पाउंड) तक माल ढोने में सक्षम होगा। इसकी रेंज 5000+ नॉटिकल माइल्स तक होगी, जो अंतरराष्ट्रीय कार्गो संचालन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
एयर कार्गो डिमांड से बढ़ रहा महत्व
जानकारों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर एयर कार्गो सेक्टर तेज़ी से विस्तार कर रहा है। ई-कॉमर्स, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-वैल्यू गुड्स की बढ़ती मांग के चलते इस क्षेत्र में हर साल 4-5% की वृद्धि दर्ज की जा रही है। वर्ष 2025 में पीटूएफ कन्वर्ज़न मार्केट का आकार लगभग 3.43 बिलियन अमेरिकी डॉलर आंका गया है। इसके अलावा, बोइंग 777 फ्रेटर का प्रोडक्शन 2027 में बंद होने की संभावना के चलते इस सीरीज के यात्री विमानों को मालवाहक विमानों में बदलने की मांग और तेज़ हो जाएगी। भविष्य की इसी संभावना को देखते हुए एआईईएसएल अपनी नागपुर एमआरओ फैसिलिटी को एयरक्राफ्ट कन्वर्ज़न के रूप में विकसित करने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है।
ईएएसए मंजूरी का इंतजार
एआईईएसएल अब अपनी नागपुर एमआरओ फैसिलिटी को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर विकसित करने के लिए यूरोपीय विमानन सुरक्षा एजेंसी (ईएएसए) से मंजूरी की प्रक्रिया भी आगे बढ़ा रहा है। इसका उद्देश्य एयरबस विमानों के लिए बेस मेंटेनेंस के साथ-साथ विदेशी एयरलाइंस को भी आकर्षित करना है।
यह भी पढ़े -उपराजधानी में इन दिनों ये हैं 10 बेहद गर्म स्थान, राजस्थान में ऊपरी हवा में बन रहा चक्रवात
वैश्विक एविएशन कन्वर्ज़न हब बनाने का लक्ष्य
नागपुर एमआरओ पहले ही भारत की प्रमुख एविएशन फैसिलिटी में शामिल हो चुका है। मौजूदा सेंटर दो वाइड-बॉडी हैंगर, इंजन टेस्ट सेल और एडवांस टेक्नोलॉजी से लैस है। अब पीटूएफ कन्वर्ज़न क्षमता जुड़ने के बाद यह सुविधा ग्लोबल एमआरओ और एयर कार्गो मार्केट में नागपुर की स्थिति को और मजबूत करेगी। हाल ही में इसी सुविधा ने 6 वर्षों से ग्राउंडेड बोइंग 777-300 ईआर को दोबारा उड़ान योग्य बनाकर अपनी तकनीकी क्षमता भी साबित की है। अब एआईईएसएल का फोकस नागपुर को सिर्फ मेंटेनेंस सेंटर के साथ वैश्विक एविएशन कन्वर्ज़न हब के रूप में विकसित करना है।
Created On :   28 April 2026 7:13 PM IST













