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विभागीय कार्यशाला: राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती अभियान कार्यक्रम में डॉ. शरद गडख ने कहा - प्राकृतिक खेती है शाश्वत भविष्य की नींव

Nagpur News. डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ, अकोला के कुलगुरु डॉ. शरद गडख ने कहा कि रासायनिक खेती के दुष्प्रभाव अब इंसानी सेहत और मिट्टी की उर्वरता पर साफ दिखने लगे हैं। ऐसे में प्राकृतिक खेती अपनाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि मिट्टी की संरचना को सुरक्षित रखने और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए प्राकृतिक तकनीक ही शाश्वत विकल्प है।
महाराष्ट्र सरकार के कृषि विभाग तथा विभागीय कृषि सह संचालक कार्यालय की ओर से कविवर्य सुरेश भट सभागृह में ‘राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती अभियान 2026-27’ के तहत विभागीय कार्यशाला आयोजित की गई। उद्घाटन सत्र में डॉ. गडख अध्यक्ष के रूप में संबोधित कर रहे थे।
कार्यशाला में विस्तार शिक्षा संचालक डॉ. धनराज उंदिरवाडे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यापीठ द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए तैयार सुझावों की जानकारी दी।
पद्मश्री सुभाष शर्मा ने विशेष मार्गदर्शक के रूप में किसानों से संवाद किया और अपने अनुभवों के आधार पर प्राकृतिक खेती की आर्थिक उपयोगिता के सफल उदाहरण साझा किए।
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विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण जानकारी
- डॉ. विनोद खडसे : विभिन्न फसलों में प्राकृतिक खेती की तकनीक व उत्पादन
- डॉ. प्रीतम चिराडे : जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र जैसे इनपुट का निर्माण व उपयोग
- डॉ. राहुल वडस्कर : प्राकृतिक तरीके से कीट नियंत्रण (पेस्ट कंट्रोल)
- कार्यक्रम में प्रगतिशील किसानों ने भी अपने अनुभव साझा किए, जिससे अन्य किसानों को प्रेरणा मिली।
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कार्यशाला में उपस्थिति
- विभागीय सह संचालक (कृषि) उमेश घाटगे
- अधीक्षक कृषि अधिकारी मिलिंद शेंडे
- सभी जिलों के जिला कृषि अधिकारी
- ‘आत्मा’ नागपुर की परियोजना संचालक डॉ. अर्चना कडू
- कृषि वैज्ञानिक, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में किसान
कार्यक्रम का संचालन योगेश राउत ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. अर्चना कडू ने किया।
Created On :   27 April 2026 9:43 PM IST












