जज्बा कायम: हर रोज संघर्ष, बिखरे पड़े हैं सपने फिर भी खड़े हैं महादेव, 101 साल की उम्र में है काम की तलाश

हर रोज संघर्ष, बिखरे पड़े हैं सपने फिर भी खड़े हैं महादेव, 101 साल की उम्र में है काम की तलाश
  • शराब की भेंट चढ़ गए तीन बेटे
  • अपनों ने ही कर दिया बेगाना

Nagpur News. कमरे की जगह बहुत तंग है, पर दिल में बहुत गुंजाइश है। नागपुर की चुनाभट्‌ठी की एक इमारत के ऊपर बने एक कमरे में महादेव व उसकी पत्नी इंदू रहती हैं। कमरे में न कुर्सी है न मेज, न कूलर है न पंखा। बरसों पुरानी एक गद्दी जो सोने, बैठने के लिए है। हालत दयनीय है, लेकिन शरीर पूरी तरह स्वस्थ है। 101 साल के हो चुके महादेव से लोग पूछते हैं, इसका राज क्या है? इतना हौसला कहां से आता है? सवालों के जवाब के साथ शुरू होती है ‘महादेव’ की कहानी।

अपनों ने ही कर दिया बेगाना

जनवरी 1926 में जन्में 101 साल के महादेव चिंधूजी पोटफोडे ने बताया कि उनका असली ठिकाना नागपुर के लालगंज परिसर में था। चचेरे भाइयों ने उनके हिस्से का घर बेचा और उन्हें नाममात्र राशि देकर घर खाली करवा दिया। आठ साल तक महादेव अपनी पत्नी के साथ पारडी में किराए के कमरे में रहे। करीब छह महीने पहले वह चुनाभट्‌ठी परिसर में अपनी बेटी कुंदा के पड़ोस में एक कमरे में किराए से रहने आ गए। अब लोग उनकी उम्र को देखकर काम नहीं देते, लेकिन वह काम की तलाश में है।

शराब की भेंट चढ़ गए तीन बेटे

महादेव जब पंद्रह साल के थे, तो उनकी शादी चंद्रपुर की एक युवती से हुई थी। शादी के आठ साल बाद पत्नी बच्चों को लेकर चली गई। इस घटना के आठ साल बाद महादेव की नागपुर निवासी इंदू के साथ दूसरी शादी हुई। तीन बेटे व एक बेटी हुई। बड़ा बेटा घनश्याम 22 साल, मंझला बेटा गणपत 19 साल और छोटा बेटा दिलीप 17 साल की उम्र में चल बसे। तीनों को शराब की लत ने मौत के द्वार पहुंचा दिया। महादेव की तीसरे नंबर की संतान कुंदा हैं। इंदू ने बताया कि दामाद शराब के नशे में रहने से कुंदा का परिवार भी बिखर चुका है। कुंदा होटल में काम कर अपना पेट पालती है।

स्वस्थ रहने का राज यह

महादेव कहते हैं कि वे हर रोज सुबह 5 बजे उठकर एक घंटा टहलने निकलते हैं। इससे शरीर को भरपूर ऑक्सीजन मिलने से हर रोज नई ऊर्जा संचारित होती है। संतुलित जीवनचर्या, खानपान पर नियंत्रण के कारण 101 साल की उम्र होने के बावजूद वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। इस बात को सरकारी अस्पताल के एक डॉक्टर द्वारा प्रमाणित किया जा चुका है। समाजसेवी सुरेश बालकोटे ने महादेव व उसकी पत्नी को सरकारी मदद के लिए प्रयास शुरू किया है।

Created On :   27 April 2026 7:25 PM IST

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