बोइंग 777-200 एलआर अब इतिहास: दिल्ली से पहुंचते ही एमआरओ सेंटर में शुरू हुई री-डिलीवरी जांच, अब अमेरिका भेजा जाएगा - 65 हजार घंटे की उड़ान पूरी

दिल्ली से पहुंचते ही एमआरओ सेंटर में शुरू हुई री-डिलीवरी जांच, अब अमेरिका भेजा जाएगा - 65 हजार घंटे की उड़ान पूरी
  • अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में अपनी खास पहचान बनाने वाला एयर इंडिया का बोइंग 777-200 एलआर
  • विमान अपनी अंतिम फेरी उड़ान पूरी करते हुए दिल्ली से नागपुर पहुंचा
  • इसे सेवा से औपचारिक रूप से बाहर कर दिया गया

Nagpur News. करीब दो दशक तक लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में अपनी खास पहचान बनाने वाला एयर इंडिया का बोइंग 777-200 एलआर अब इतिहास बन गया है। ‘वर्ल्डलाइनर’ के नाम से मशहूर यह विमान अपनी अंतिम फेरी उड़ान पूरी करते हुए दिल्ली से नागपुर पहुंचा, जहां इसे सेवा से औपचारिक रूप से बाहर कर दिया गया।

‘रीडिलीवरी चेक्स’ के बाद अमेरिका रवाना

नागपुर पहुंचने के बाद विमान को एयर इंडिया इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड के मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल सेंटर में लाया गया है। यहां इसकी ‘रीडिलीवरी चेक्स’ प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस प्रक्रिया के तहत विमान के इंजन, केबिन, स्ट्रक्चर और सभी तकनीकी सिस्टम की बारीकी से जांच की जा रही है, साथ ही जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन भी किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद विमान को अमेरिका भेजा जाएगा।

ड्रीमलाइनर ने ली जगह

साल 2007 के आसपास एयर इंडिया के बेड़े में शामिल हुए इस विमान ने करीब 65 हजार घंटे की उड़ान पूरी की। वीटी-एईआई रजिस्ट्रेशन वाला यह विमान ‘वर्ल्डलाइनर’ के नाम से जाना जाता था और एयर इंडिया के इतिहास में इसकी खास पहचान रही है। टाटा समूह के अधिग्रहण के बाद एयर इंडिया अपने बेड़े को आधुनिक और ईंधन-कुशल विमानों से अपग्रेड करने में जुटी है। इसी रणनीति के तहत पुराने विमानों को हटाकर नए और एडवांस विमान बोइंग 787 ड्रीमलाइनर शामिल किए जा रहे हैं। ऐसे में ‘वर्ल्डलाइनर’ की विदाई को एयर इंडिया के बदलते दौर की एक अहम कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

एयर इंडिया के बेड़े से ‘वर्ल्डलाइनर’ की हुई विदाई नागपुर बना आखिरी पड़ाव, 2007 से दे रहा था सेवा

बढ़ती उम्र और अधिक परिचालन खर्च बनी वजह

सूत्रों के मुताबिक, एयर इंडिया ने इस विमान को बेड़े से हटाने का फैसला इसकी बढ़ती उम्र और अधिक परिचालन खर्च के कारण लिया है। यह विमान ज्यादा ईंधन खपत करता था और इसकी मेंटेनेंस लागत भी काफी अधिक थी। इसके अलावा, बेड़े में इस मॉडल का सिर्फ एक ही विमान बचा था, जिससे स्पेयर पार्ट्स और क्रू मैनेजमेंट में भी दिक्कतें आ रही थीं।

Created On :   27 April 2026 9:10 PM IST

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