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संकल्प: उपराजधानी नागपुर को साइबर कैपिटल बनाने की सिफारिश, 100 एकड़ जमीन और आईटी टास्क फोर्स पर जोर

Nagpur News. विभागीय आयुक्त विजयालक्ष्मी बिदरी ने महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमएडीसी) की धीमी कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा कि मिहान सेज में भूमि आवंटन और अन्य मंजूरी प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी अनुमतियां अधिकतम 45 दिनों के भीतर देना अनिवार्य किया जाए। बिदरी ने दो टूक कहा कि लंबित फाइलों और जटिल प्रक्रियाओं के कारण निवेशक हतोत्साहित हो रहे हैं, जिससे नागपुर के औद्योगिक विकास पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
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8 महीने से मंजूरी के लिए भटक रही कंपनी
वरिष्ठ आईटी मेंटर शशिकांत चौधरी ने एक स्थानीय कंपनी का उदाहरण देते हुए बताया कि वह कंपनी पिछले 8 महीनों से एमएडीसी कार्यालय के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन अब तक उसे मंजूरी नहीं मिल पाई है। अलग-अलग प्रक्रियाओं, लेआउट अप्रूवल और तकनीकी कारणों के नाम पर फाइल को बार-बार रोका जा रहा है। यूनिट शुरू करने में महीनों की देरी से नए निवेशक निराश हो रहे हैं और रोजगार पर असर पड़ रहा है।
सिंगल विंडो के बावजूद देरी अस्वीकार्य : बिदरी
इस पर विजयालक्ष्मी बिदरी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि मिहान में पर्याप्त भूमि उपलब्ध है और सिंगल विंडो प्रणाली लागू होने के बावजूद मंजूरी में हो रही देरी पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि एक साधारण मंजूरी में 8-8 महीने लगना समय और संसाधनों की बर्बादी है। बिदरी ने स्पष्ट किया कि यदि किसी कंपनी के सभी दस्तावेज तकनीकी रूप से सही हैं, तो उसे मंजूरी के लिए महीनों तक इंतजार कराना गलत है। उन्होंने सुझाव दिया कि विभिन्न विभागों की मंजूरी प्रक्रिया एक साथ शुरू की जाए, ताकि 45 दिनों के भीतर सभी औपचारिकताएं पूरी हो सकें। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को एमएडीसी का दौरा कर वहां की कार्यप्रणाली का गहन अध्ययन करने के निर्देश भी दिए।
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औद्योगिक विकास को फाइलों में लटकाने वालों पर गिरेगी गाज
विभागीय आयुक्त विजयालक्ष्मी बिदरी ने महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमएडीसी) की धीमी कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा कि मिहान सेज में भूमि आवंटन और अन्य मंजूरी प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी अनुमतियां अधिकतम 45 दिनों के भीतर देना अनिवार्य किया जाए। बिदरी ने दो टूक कहा कि लंबित फाइलों और जटिल प्रक्रियाओं के कारण निवेशक हतोत्साहित हो रहे हैं, जिससे नागपुर के औद्योगिक विकास पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
8 महीने से मंजूरी के लिए भटक रही कंपनी
वरिष्ठ आईटी मेंटर शशिकांत चौधरी ने एक स्थानीय कंपनी का उदाहरण देते हुए बताया कि वह कंपनी पिछले 8 महीनों से एमएडीसी कार्यालय के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन अब तक उसे मंजूरी नहीं मिल पाई है। अलग-अलग प्रक्रियाओं, लेआउट अप्रूवल और तकनीकी कारणों के नाम पर फाइल को बार-बार रोका जा रहा है। यूनिट शुरू करने में महीनों की देरी से नए निवेशक निराश हो रहे हैं और रोजगार पर असर पड़ रहा है।
सिंगल विंडो के बावजूद देरी अस्वीकार्य : बिदरी
इस पर विजयालक्ष्मी बिदरी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि मिहान में पर्याप्त भूमि उपलब्ध है और सिंगल विंडो प्रणाली लागू होने के बावजूद मंजूरी में हो रही देरी पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि एक साधारण मंजूरी में 8-8 महीने लगना समय और संसाधनों की बर्बादी है। बिदरी ने स्पष्ट किया कि यदि किसी कंपनी के सभी दस्तावेज तकनीकी रूप से सही हैं, तो उसे मंजूरी के लिए महीनों तक इंतजार कराना गलत है। उन्होंने सुझाव दिया कि विभिन्न विभागों की मंजूरी प्रक्रिया एक साथ शुरू की जाए, ताकि 45 दिनों के भीतर सभी औपचारिकताएं पूरी हो सकें। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को एमएडीसी का दौरा कर वहां की कार्यप्रणाली का गहन अध्ययन करने के निर्देश भी दिए।
Created On :   28 April 2026 7:43 PM IST













