संदेश: हृदयगति रुकने पर तत्काल जीवन बचाने नागरिकों को प्रशिक्षण, मेयो अस्पताल में अभियान के माध्यम से जागरुकता

हृदयगति रुकने पर तत्काल जीवन बचाने नागरिकों को प्रशिक्षण, मेयो अस्पताल में अभियान के माध्यम से जागरुकता
  • छाती पर दबाव देने की तकनीक से बच सकती है जान
  • पांच जीवनरक्षक सुरक्षा उपाय की दी जानकारी

डिजिटल डेस्क, नागपुर. अचानक हृदयगति रुकने की स्थिति में समय पर की गई मदद किसी की जान बचा सकती है। इसके लिए हर बार चिकित्सा विशेषज्ञ की प्रतीक्षा करना जरूरी नहीं, बल्कि सही जानकारी और प्राथमिक जीवनरक्षक तकनीक का ज्ञान भी महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से इंदिरा गांधी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (मेयो)नागपुर के एनेस्थिसियोलॉजी विभाग और इंडियन सोसायटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स (आईएसए) की ओर से विश्व एनेस्थीसिया सप्ताह मनाया गया। इस अवसर पर जनजागरूकता अभियान व विविध कार्यक्रम आयोजित किये गए। मेयो अस्पताल के हीरक जयंती समारोह के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में आम नागरिकों को सीओएलएस (कंप्रेशन ओनली लाइफ सपोर्ट) यानी केवल छाती पर दबाव देकर जीवन बचाने की तकनीक के बारे में जानकारी और प्रशिक्षण दिया गया।

छाती पर दबाव देने की तकनीक से बच सकती है जान

मेयो के कैजुअल्टी विभाग परिसर में आयोजित कार्यक्रम में डॉक्टरों ने बैनर और पोस्टरों के माध्यम से लोगों को हृदयगति रुकने जैसी आपातकालीन स्थिति को पहचानने तथा तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के बारे में जागरूक किया। इस दौरान हृदयगति रुकते ही छाती दबाव शुरू करना बेहद महत्वपूर्ण बताया गया। सीओएलएस तकनीक का उद्देश्य हृदयगति रुकने की स्थिति में रक्त संचार बनाए रखने में मदद करना है। इससे मरीज को आगे की चिकित्सा सहायता मिलने तक जीवन बचने की संभावना बढ़ जाती है। डॉक्टरों ने बताया कि आपातकालीन स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत सीओएलएस तकनीक का प्रयोग करना चाहिए।

पांच जीवनरक्षक सुरक्षा उपाय की दी जानकारी

एनेस्थिसियोलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर व आईएसए की मानद सचिव डॉ. लीना गेडाम के नेतृत्व में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का समन्वय सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रियल रामटेके ने किया। विभाग प्रमुख एवं प्रोफेसर डॉ. वैशाली शेलगांवकर तथा मेयो के अधिष्ठाता डॉ. रवि चव्हाण के मार्गदर्शन में यह हफ्तेभर अभियान चलाया गया। कार्यक्रम एनेस्थिसियोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टरों, इंटर्न और अन्य कर्मचारियों ने सक्रिय भागीदारी की। एनेस्थिसियोलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शीतल दलाल के मार्गदर्शन में ‘पंचरक्षक-पांच जीवनरक्षक सुरक्षा उपाय’ की जानकारी दी गई।

Created On :   13 Oct 2026 7:32 PM IST

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