नागपुर खंडपीठ: जलभराव पर कोर्ट सख्त, अदालत ने कहा - एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहेंगे या समस्या भी सुलझाएंगे

जलभराव पर कोर्ट सख्त, अदालत ने कहा - एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहेंगे या समस्या भी सुलझाएंगे
  • मनपा और पीडब्ल्यूडी की गैर जिम्मेदारी पर नाराजगी
  • शुक्रवार तक ठोस कार्य योजना पेश करने के आदेश
  • ठोस कदम नहीं उठाए तो आदेश देंगे

Nagpur News. शहर में बारिश के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या को लेकर नागपुर महानगरपालिका और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने से बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए सवाल किया कि क्या सभी सरकारी विभागों ने केवल एक-दूसरे पर आरोप लगाने का फैसला कर लिया है? न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जनता को परेशानी हो रही है तो जिम्मेदारी तय करने से ज्यादा जरूरी तत्काल समस्या का समाधान करना है।

जनहित याचिका पर आदेश

जनमंच संस्था की ओर से सीमेंट सड़कों के मुद्दे पर दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फालके और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हुई। पिछली सुनवाई में मनपा ने सोमलवार स्कूल के सामने जलभराव के लिए विश्व बैंक परियोजना के तहत चल रहे बारिश के पानी की निकासी संबंधी नाले के काम को जिम्मेदार बताया था। वहीं, नरेंद्रनगर रेलवे अंडरब्रिज में पानी जमा होने की समस्या दूर करने की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी की होने का दावा किया था। इसके विपरीत पीडब्ल्यूडी ने अपने शपथपत्र में कहा कि पड़ोले चौक से सोमलवार स्कूल तक की सड़क मनपा के अधिकार क्षेत्र में है। इस तरह दोनों विभागों के अलग-अलग दावों पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और शुक्रवार 14 अगस्त तक ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से एड. परवेज मिर्झा और एड. मृणाल चक्रवर्ती, मनपा की ओर से एड. जेमिनी कासट तथा पीडब्ल्यूडी की ओर से एड. शिशिर उइके ने पक्ष रखा।

मनपा, पीडब्ल्यूडी, बीएसएनएल की बैठक

मनपा ने कोर्ट को बताया कि दोनों विभागों की प्राथमिक बैठक हो चुकी है। मंगलवार शाम मनपा, पीडब्ल्यूडी और बीएसएनएल के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक भी प्रस्तावित है। इसमें जलभराव की समस्या का ठोस समाधान तलाशने का प्रयास किया जाएगा। कोर्ट ने बैठक में लिए गए निर्णय और प्रस्तावित उपायों की विस्तृत जानकारी 14 अगस्त तक पेश करने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ताओं को मनपा की ओर से मंगलवार को दाखिल शपथपत्र पर जवाब देने के लिए शुक्रवार तक का समय दिया गया है।

ठोस कदम नहीं उठाए तो आदेश देंगे

समस्या के समाधान के लिए अब तक ठोस उपाय सामने नहीं आने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। न्यायालय ने मौखिक रूप से चेतावनी दी कि यदि तत्काल सकारात्मक और ठोस उपाय प्रस्तुत नहीं किए गए तो सरकारी विभागों के खिलाफ आदेश जारी करना पड़ेगा और उन्हें उसका पालन करना होगा। कोर्ट ने सरकार और मनपा के वकीलों से भी कहा कि वे केवल शपथपत्र दाखिल करने तक सीमित न रहें। जनता की समस्या के समाधान के लिए संबंधित विभागों की बैठकों में सक्रिय रूप से शामिल होकर वास्तविक रुचि के साथ काम करें।


Created On :   12 Aug 2026 7:38 PM IST

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