जनसुनवाई में हंगामा: मुआवजे के फेर में फंसा नया नागपुर का पेंच, भारी आक्रोश - जिला प्रशासन और प्रभावित किसानों के बीच तकरार बढ़ी

मुआवजे के फेर में फंसा नया नागपुर का पेंच, भारी आक्रोश - जिला प्रशासन और प्रभावित किसानों के बीच तकरार बढ़ी
  • फडणवीस का ड्रीम प्रोजेक्ट ‘नया नागपुर’
  • जिला प्रशासन और प्रभावित किसानों के बीच तकरार बढ़ती जा रही है

Nagpur News. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का ड्रीम प्रोजेक्ट ‘नया नागपुर’ को लेकर जिला प्रशासन और प्रभावित किसानों के बीच तकरार बढ़ती जा रही है। नया विवाद लाडगांव और गोधनी के भूमि सैटेलाइट सर्वे को लेकर सामने आया है। किसानों का आरोप है कि सैटेलाइट इमेज में उनका खेत तो दिखाई दे रहा है, लेकिन खेत में बना कुआं, बोरवेल और सिंचाई की व्यवस्था गायब हो गई। कई खेतों में आंवले के बागान और अन्य फसलें होने के बावजूद उन्हें रिकॉर्ड में सही तरीके से दर्ज नहीं किया गया। इससे सिंचित जमीन को असिंचित बताकर कम वैल्यूएशन दिया जा रहा है। कुछ महीने पहले हुए संयुक्त सर्वे में अधिकारियों ने कई खेतों को सिंचित माना गया था। अब सेटेलाइट इमेज के आधार पर उन्हीं जमीनों को असिंचित बताया जा रहा है। किसानों जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए अदालत का रुख करने की भी चेतावनी दी है।

जनसुनवाई में हंगामा

ग्रामीण तहसील कार्यालय में उपविभागीय अधिकारी (एसडीओ) वंदना सवरंगपते के कक्ष में हुई जनसुनवाई के दौरान किसानों ने तीव्र नाराजगी जताई। किसानों का आरोप है कि उनकी आपत्तियों को दरकिनार कर वैल्यूएशन तय किया जा रहा है, जिससे अधिकारियों और किसानों के बीच तीखी बहस हुई।

सैटेलाइट इमेज को बनाया आधार

जमीन की स्थिति तय करने के लिए पिछले तीन वर्षों की सैटेलाइट इमेज को आधार बनाया गया है। तीन वर्षों में कम से कम दो वर्षों में जमीन हरी-भरी या खेती होती दिखाई देने पर उसे हंगामी बागायती माना जाना चाहिए।

मुआवजे पर असर

किसानों के अनुसार, जिरायती (असिंचित) जमीन का बेसिक वैल्यूएशन करीब 1.92 करोड़ रुपए है, जबकि हंगामी बागायती का डेढ़ गुना और बागायती जमीन का वैल्यूएशन दो गुना तक होता है। गलत वर्गीकरण के कारण मुआवजे की राशि में भारी अंतर आ जाएगा।

किसानों की मांग

किसानों ने मांग की है कि सैटेलाइट सर्वे के साथ-साथ मौके पर किए गए संयुक्त सर्वे, दस्तावेजों, कुएं, बोरवेल और बागानों को आधार बनाते हुए सर्वे और वैल्यूएशन की दोबारा जांच की जाए।

किसान लामबंद

अदालत ही एकमात्र रास्ता

चंदू मून, प्रभावित किसान, लाडगांव ने बताया कि मेरे खेत में आंवले का बागान है। संयुक्त सर्वे के दौरान टीम ने मौके पर बागान देखा था। कागजात में भी इसका उल्लेख किया गया, लेकिन सुनवाई में पता चला कि सैटेलाइट इमेज में बागान ही गायब हो गया। प्रशासन अपनी मनमर्जी से काम कर रहा है। अब अदालत ही रास्ता है।

मनमाने तरीके से वैल्यूएशन

किशोर आष्टनकर, प्रभावित किसान ने बताया कि मनमाने तरीके से वैल्यूएशन लगाया जा रहा है। जिन जमीनों पर हंगामी बागायती होती है, उनके अवॉर्ड में भी जिरायती जमीन का वैल्यूएशन लगाया गया है। जमीन का वास्तविक उपयोग, सिंचाई की सुविधा और पिछले वर्षों की फसल को ध्यान में रखकर मुआवजा तय होना चाहिए।

सीधे आर्थिक नुकसान

नवाज शेटे, प्रभावित किसान के मुताबित हमारे पास दो एकड़ जमीन है। जमीन के अंदर कुआं भी है। नियम के मुताबिक यह सिंचित भूमि है। इसके बावजूद असिंचित जमीन के हिसाब से मुआवजा लगाया जा रहा है। इससे हमें सीधे आर्थिक नुकसान होगा।

कमेटी में पक्ष रख सकेंगे

वंदना सवरंगपते, उपविभागीय अधिकारी के मुताबिक सैटेलाइट सर्वे के बारे में अभी ज्यादा जानकारी नहीं दे सकती। प्रशासन नियमों के मुताबिक ही काम कर रहा है। किसानों को आपत्ति है तो कमेटी गठित की जाएगी। किसान उसमें अपना पक्ष और दस्तावेज रख सकते हैं।


Created On :   11 Aug 2026 6:39 PM IST

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