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कानून के सामने बेबस सियासत: पूर्व CM चव्हाण और मंत्री विखे पाटील की कोर्ट में हाजिरी, नोटबंदी विरोधी आंदोलन के 9 साल पुराने मामले में मिली जमानत

Nagpur News. सत्ता, सियासत और पद की अपनी अहमियत हो सकती है, लेकिन अदालत की चौखट पर कानून सबके लिए एक समान है। इसका एक उदाहरण नागपुर में उस समय देखने को मिला, जब नोटबंदी के दौरान सरकार की नीतियों के विरोध में हुए आंदोलन से जुड़े करीब नौ साल पुराने मामले में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण और कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील को अदालत में पेश होना पड़ा। कोर्ट ने दोनों को जमानत पर रिहा कर दिया।
यह मामला 18 जनवरी 2017 को नागपुर के संविधान चौक स्थित आरबीआई कार्यालय के सामने कांग्रेस के आंदोलन से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, आरबीआई में ज्ञापन देने पहुंचे करीब 60 से 70 प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के निर्देशों की अनदेखी करते हुए मुख्य गेट के सामने नारेबाजी की थी। इसी दौरान पुलिस के साथ कथित धक्कामुक्की और हंगामे की स्थिति बनी थी।
घटना के अगले दिन, 19 जनवरी 2017 को सदर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने बाद में मामले में आरोपपत्र दाखिल किया। दस्तावेजों के अनुसार आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 143, 147, 149, 341, 353 और 332 तथा महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 135 के तहत कार्रवाई की गई।
पहले हो चुकी है अन्य आरोपियों की जमानत
इस मामले में विकास ठाकरे, उमाकांत अग्निहोत्री, प्रशांत धवड और प्रज्ञा बडवाइक की जमानत पहले ही हो चुकी है। अब पूर्व मुख्यमंत्री चव्हाण और मंत्री विखे पाटील की अदालत में पेशी हुई। खराब स्वास्थ्य के बावजूद चव्हाण को नागपुर की कोर्ट नंबर-5 में न्यायाधीश एन.एन. चिंतामणी के समक्ष हाजिरी देनी पड़ी।चव्हाण के साथ नागपुर कांग्रेस प्रमुख प्रफुल्ल गुडधे, पूर्व मंत्री राजेंद्र मुलक, कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंडे सहित कांग्रेस के कुछ नेता भी अदालत परिसर में मौजूद रहे।
कोचर दंपती की ओर से पैरवी
पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण सहित अन्य आरोपियों की ओर से एडवोकेट राकेश कोचर, एडवोकेट अनुष्का कोचर और एडवोकेट सानिया कोचर ने पैरवी की।नोटबंदी के दौर में राजनीतिक विरोध के रूप में शुरू हुआ यह आंदोलन अब वर्षों बाद अदालत की प्रक्रिया तक पहुंचा है। मामले ने एक बार फिर यह सवाल भी सामने रखा है कि राजनीतिक आंदोलन में विरोध का अधिकार और कानून-व्यवस्था की सीमा आखिर कहां तक है। न्यायालय में मामले की आगे की प्रक्रिया जारी रहेगी।
Created On :   10 Aug 2026 8:57 PM IST












