वडेट्टीवार ने कहा - ओबीसी की संख्या कम दिखाने का षड़यंत्र सहन नहीं करेंगे, कानून के दायरे में ही हो फैसला

वडेट्टीवार ने कहा - ओबीसी की संख्या कम दिखाने का षड़यंत्र सहन नहीं करेंगे, कानून के दायरे में ही हो फैसला
  • युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ ठीक नहीं
  • ओबीसी महासंघ पर भी साधा निशाना

Nagpur News. कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा है कि राज्य में ओबीसी की संख्या कम दिखाने का षड़यंत्र किया जा रहा है। इसे सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इंपिरिकल डेटा के नाम पर ओबीसी की वास्तविक संख्या कम दिखायी जा रही है। ओबीसी की जनसंख्या लगभग 60 प्रतिशत है, उसे 28 से 30 प्रतिशत बताया जा रहा है। ओबीसी को न्याय औरसंवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष और तेज किया जाएगा। रविवार को वडेट्टीवार ने पत्रकारों से चर्चा की। उन्होंने बताया कि ओबीसी जनजागृति के लिए निकाली गई मंडल यात्रा का चंद्रपुर में समापन हुआ है। यात्रा के दौरान विदर्भ के गड़चिरोली, बल्लारपुर , वडसा, देसाईगंज सहित विभिन्न क्षेत्रों में जनजागृति अभियान चलाया गया।

सरकार का जवाब स्पष्ट नहीं

वडेट्टीवार ने कहा कि ओबीसी विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति के मुद्दे पर सरकार कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रही है। ओबीसी समाज की लड़ाई केवल राजनीतिक दल के भरोसे नहीं लड़ी जा सकती। राजनीति से अलग पूरे ओबीसी समाज को एकजुट किया जा रहा है और समाज की एकता के बल पर यह संघर्ष जारी रहेगा।

कानून के दायरे में ही हो फैसला

मराठा आरक्षण के मुद्दे पर वडेट्टीवार ने कहा कि किसी भी मांग को कानून के दायरे में रहकर ही स्वीकार किया जाना चाहिए। धमकियों या हिंसा की भाषा से किसी समाज की समस्या का समाधान नहीं हो सकता है। आरक्षण से संबंधित निर्णय आवश्यक दस्तावेज और निर्धारित मानदंड पूरे करने के बाद ही लिया जाना चाहिए। कोई व्यक्ति हाथ में कोयता या बंदूक लेने जैसी भाषा का इस्तेमाल करता है तो उस पर कार्रवाई करना सरकार और पुलिस की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और दोनों उपमुख्यमंत्रियों के नेतृत्व वाली सरकार पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है। प्रमाणपत्र भी कानून के दायरे में ही जारी किए जाने चाहिए।

युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ ठीक नहीं

मराठा आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटील पर निशाना साधते हुए वडेट्टीवार ने कहा कि समाज और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए। कई मराठा युवाओं को ओबीसी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरियां मिली हैं। भविष्य में इन प्रमाणपत्रों को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हुआ और उनकी नौकरियों पर संकट आया तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

ओबीसी महासंघ पर भी साधा निशाना

राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ पर भी वडेट्टीवार ने सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संगठन सरकार के खिलाफ स्पष्ट रुख नहीं अपना सकते, क्योंकि उन्हें सरकार से लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार के भरोसे ओबीसी के अधिकारों की लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती। वडेट्टीवार ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के संबंध में उचित समय पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।

Created On :   9 Aug 2026 8:40 PM IST

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