सांप ने डसा: जिन बेटियों को मां-बाप ने सपना पूरा करने पढ़ने भेजा, वो उस रात नींद से फिर नहीं जागी और तीन लड़ रहीं है जिंदगी की जंग

जिन बेटियों को मां-बाप ने सपना पूरा करने पढ़ने भेजा, वो उस रात नींद से फिर नहीं जागी और तीन लड़ रहीं है जिंदगी की जंग
  • मौत की खबर ने तीन घरों के आंगन हमेशा के लिए सूने कर दिए
  • आश्रमशाला में सांप ने छह छात्राओं को डसा
  • तीन छात्राएं अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहीं

Nagpur/ Gadchiroli News. वह रात भी बाकी रातों जैसी ही थी...। छह मासूम छात्राएं दिनभर की पढ़ाई और थकान के बाद अपने बिस्तरों पर सोई थीं। आंखों में शायद आने वाले कल के सपने थे। किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि आधी रात के बाद आने वाली एक भयावह घड़ी उनकी जिंदगी और उनके परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए बदल देगी।

सोमवार तड़के धानोरा तहसील की एक निवासी आश्रमशाला में सो रही छह छात्राओं को सांप ने डस लिया। देखते ही देखते मासूम छात्राओं की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन जिंदगी बचाने की हर कोशिश के बावजूद तीन छात्राओं की मौत हो गई। तीन अन्य छात्राएं अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है।

रात 2 बजे मच गई चीख-पुकार

बताया गया कि छात्राओं ने रात में भोजन किया और रोज की तरह अपने बिस्तरों पर जाकर सो गईं। रात करीब 2 से 2.30 बजे के बीच अचानक जहरीले सांप ने सो रही छात्राओं को डस लिया। नींद में हुई इस अनहोनी के बाद छात्राओं की हालत बिगड़ने लगी और आश्रमशाला में अफरा-तफरी मच गई।

घटना की जानकारी मिलते ही छात्राओं को तत्काल अस्पताल ले जाया गया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

कक्षा पांचवीं और आठवीं की दो मासूम छात्राओं ने धानोरा के अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। एक अन्य छात्रा ने गढ़चिरोली जिला अस्पताल में उपचार के दौरान अंतिम सांस ली।

वे तीनों बेटियां अब कभी अपने घर नहीं लौटेंगी।

जिन माता-पिता ने उन्हें अच्छे भविष्य का सपना देखकर आश्रमशाला भेजा था, उनके हिस्से में अब अपनी बेटियों की यादें रह गई हैं। जिस घर में उनकी हंसी गूंजती थी, वहां अब सन्नाटा होगा। जिस मां को अपनी बेटी के लौटने का इंतजार था, उसकी आंखें अब शायद दरवाजे पर ही टिकी रह जाएंगी।

तीन अस्पताल में, एक की हालत गंभीर

सर्पदंश से प्रभावित तीन अन्य छात्राओं को गढ़चिरोली जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें एक की हालत गंभीर बताई जा रही है। अस्पताल में डॉक्टर छात्राओं को बचाने के लिए उपचार कर रहे हैं, जबकि उनके परिजन हर पल उनकी जिंदगी की सलामती की दुआ कर रहे हैं।

एक रात... और तीन परिवारों की दुनिया उजड़ गई

घटना की खबर जैसे ही छात्राओं के घर पहुंची, परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जिन बेटियों को माता-पिता ने पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए आश्रमशाला भेजा था, उन्हीं बेटियों की मौत की खबर ने तीन परिवारों के सपनों को हमेशा के लिए तोड़ दिया।

यह सिर्फ सर्पदंश की एक घटना नहीं है। यह उन सवालों को भी सामने लाती है, जिनके जवाब अब बेहद जरूरी हैं।

  • आखिर आश्रमशाला में सो रही छात्राओं की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं?
  • क्या सोने के कमरों की नियमित जांच होती थी?
  • क्या जहरीले सांप और अन्य जीव-जंतुओं से बचाव के लिए जरूरी उपाय किए गए थे?
  • और यदि समय रहते पर्याप्त सावधानी बरती जाती, तो क्या इन तीन मासूम जिंदगियों को बचाया जा सकता था?

इन सवालों का जवाब जांच में मिलना जरूरी है।

प्रशासन ने घटना की जांच के निर्देश दिए हैं। आश्रमशाला की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी जरूरी है। क्योंकि तीन मासूम बेटियां अब वापस नहीं लौट सकतीं... लेकिन उनकी मौत अगर व्यवस्था को जगाने की वजह बन जाए, तो शायद भविष्य में किसी और मां की गोद उजड़ने से बचाई जा सके।

आधी रात को बुझी इन तीन मासूम जिंदगियों की आखिरी नींद अब व्यवस्था के लिए एक ऐसी चेतावनी बननी चाहिए, जिसे फिर कभी नजरअंदाज न किया जा सके।

Created On :   10 Aug 2026 7:35 PM IST

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