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उठते सवाल: क्राइम ब्रांच में जमी जड़ें, बदलाव की राह देखता विभाग - तबादले के बाद भी कई कर्मचारियों का नहीं छूट रहा मोह

Nagpur News. शहर की क्राइम ब्रांच, जिसे अपराध नियंत्रण का सबसे तेज और प्रभावी दस्ता माना जाता है, इन दिनों अपने ही ढांचे की कमजोरियों से जूझती नजर आ रही है। विभाग में लंबे समय से जमे कुछ कर्मचारी पांच वर्ष से अधिक समय से एक ही शाखा में तैनात हैं, लेकिन उनके खाते में कोई खास या उल्लेखनीय कार्रवाई दर्ज नहीं है। इसके बावजूद उनका उसी पद पर बने रहना कई सवाल खड़े कर रहा है।
हालात यह हैं कि कुछ कर्मचारियों का तबादला होने के बाद भी विभाग से उनका मोह खत्म नहीं हो पा रहा है। इसके पीछे के कारण भले ही स्पष्ट न हों, लेकिन इस स्थिति ने कार्यप्रणाली पर असर डालना शुरू कर दिया है। क्राइम ब्रांच में बड़ी संख्या में युवा कर्मचारी तैनात हैं, पर कार्रवाई के स्तर पर उनका विशेष योगदान नजर नहीं आता।
शहर में मादक पदार्थों के मामलों में जहां थाना स्तर पर कार्रवाई अधिक प्रभावी दिख रही है, वहीं क्राइम ब्रांच की ओर से इक्का-दुक्का कार्रवाई को छोड़ दें तो कोई ठोस और उल्लेखनीय उपलब्धि सामने नहीं आ रही है।
जानकारों का मानना है कि क्राइम ब्रांच जैसी संवेदनशील इकाई में समय-समय पर फेरबदल बेहद जरूरी होता है। पूर्व पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार के कार्यकाल में हर दो साल में टीम में बदलाव कर नए और अनुभवी अधिकारियों के बीच संतुलन बनाया जाता था। इससे न केवल नए कर्मचारियों को सीखने का अवसर मिलता था, बल्कि अनुभवी अधिकारियों की पकड़ से मामलों का तेजी से खुलासा भी होता था।
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वर्तमान स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। टीम में अनुभव की कमी और संतुलन के अभाव के कारण डिटेक्शन रेट प्रभावित हुआ है और कई मामलों में अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, साइड ब्रांच में वर्षों से कार्यरत कई सक्षम कर्मचारियों को मौका नहीं मिल रहा, जबकि वे बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। ऐसे में जरूरत है कि विभाग में पारदर्शी और नियमित तबादला नीति लागू की जाए, ताकि योग्य और इच्छुक कर्मचारियों को भी अपनी क्षमता साबित करने का अवसर मिल सके। अब सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस ‘जमी हुई व्यवस्था’ को तोड़कर क्राइम ब्रांच में नई ऊर्जा भर पाएंगे?
Created On :   28 April 2026 9:14 PM IST













