- Home
- /
- राज्य
- /
- महाराष्ट्र
- /
- नागपुर
- /
- कैदियों के हुनर से सजी दीक्षाभूमि,...
अलबेले हाथों का हुनर: कैदियों के हुनर से सजी दीक्षाभूमि, बिक्री के लिए रखीं आकर्षक वस्तुएं, रंग-बिरंगे दीये-साड़ियां- फर्नीचर और सजावटी सामान उपलब्ध

डिजिटल डेस्क, नागपुर। जिन हाथों ने कभी अपराध का रास्ता चुना, वे अब अपने हुनर से खूबसूरत चीजें बना रहे हैं। रंग-बिरंगे दीयों से लेकर साड़ियों, फर्नीचर और सजावटी सामान तक, इन वस्तुओं की कारीगरी देखकर शायद ही कोई अंदाजा लगा सके कि इन्हें जेल के बंदियों ने तैयार किया है। कैदियों के इसी हुनर को लोगों तक पहुंचाने और उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए मध्यवर्ती कारागृह की ओर से पहल की गई है।
दीक्षाभूमि परिसर में सोमवार, 19 अक्टूबर को बंदियों द्वारा बनाई गई वस्तुओं की प्रदर्शनी और बिक्री केंद्र शुरू किया गया। सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग, नागपुर की सहायक आयुक्त सुकेशिनी तेलगोटे ने सुबह 10 बजे इसका उद्घाटन किया। इस पहल का मकसद बंदियों की कला को पहचान दिलाना, उन्हें काम के अवसर देना और समाज में दोबारा सम्मान के साथ जीवन शुरू करने के लिए तैयार करना है।
दीक्षाभूमि में पहली बार जेल के बंदियों द्वारा बनाई गई रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुओं की बिक्री के लिए इस तरह का स्टॉल लगाया गया है। यहां लोगों को जरूरत का सामान खरीदने के साथ बंदियों के हुनर को करीब से देखने का अवसर भी मिल रहा है।
कारागृह विभाग का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि बंदियों को सुधारकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी है। इसी सोच के साथ जेल में लोहे का काम, बुनाई, बढ़ईगीरी, बेकरी, पावरलूम, हथकरघा, खड्डा करघा, कपड़े धोने, सिलाई और गाड़ियों की धुलाई जैसे काम कराए जाते हैं।
इन कामों के जरिए बंदियों को अलग-अलग व्यवसायों का प्रशिक्षण दिया जाता है। काम करने के बदले उन्हें तय वेतन भी मिलता है। इससे वे हुनर सीखने के साथ अपनी कमाई भी कर सकते हैं। जेल से बाहर आने के बाद इस प्रशिक्षण के आधार पर रोजगार पाने और नई शुरुआत करने में उन्हें मदद मिल सकती है।
दीये से लेकर फर्नीचर तक की बिक्री
जेल में तैयार वस्तुओं की बिक्री रक्षाबंधन, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान की जाती है। इसके अलावा संसद के शीतकालीन सत्र और उपराजधानी में होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी बिक्री के स्टॉल लगाए जाते हैं।
इस वर्ष कारागृह एवं सुधार सेवा, महाराष्ट्र के महानिदेशक डॉ. सुहास वारके की प्रेरणा तथा विशेष महानिरीक्षक योगेश देसाई और नागपुर के कारागृह अधीक्षक एवं उपमहानिरीक्षक वैभव आगे के मार्गदर्शन में बंदियों से कई आकर्षक वस्तुएं तैयार कराई गई हैं।
दीक्षाभूमि के स्टॉल पर दिवाली के लिए रंग-बिरंगे दीये और आकाश कंदील के साथ हथकरघा साड़ियां, लकड़ी की कुर्सियां, टी-टेबल, फोल्डिंग स्टूल, चौरंग, गहनों के डिब्बे, गमलों के स्टैंड, सजावटी सामान, सतरंजी, दरियां, रूमाल, आसनपट्टी, कपड़े और तौलिये उपलब्ध हैं। इन वस्तुओं को महिला और पुरुष बंदियों ने अपनी मेहनत और हुनर से तैयार किया है।
प्रशिक्षकों ने निखारा बंदियों का हुनर
बंदियों को इन वस्तुओं को बनाने का प्रशिक्षण सिलाई काम पर्यवेक्षक अमित खाडे, सिलाई काम निर्देशक परेश मैड, वस्त्र निर्माण कार्यादेशिक आर.एन. भुतल, वस्त्र निर्माण प्रयोग निर्देशक आर.डी. भातमारे, बढ़ई काम पर्यवेक्षक एस.पी. जोशी, बढ़ई काम निर्देशक बी. उईके, बुनकर काम पर्यवेक्षक एस.एस. धिवर, सॉयर वी.डी. चाटसे, ताणाकार आर.जी. बागणे, शुभम भागतव और बेकरी निर्देशक रोहन बच्चाव ने दिया।
उद्घाटन समारोह में वैभव आगे, अतिरिक्त अधीक्षक दीपा आगे, उपअधीक्षक श्रीधर काले, वरिष्ठ जेल अधिकारी मनोहर भोसले, कारखाना प्रबंधक उमेश गुंडरे, जेल अधिकारी माधव खैरगे और सेवानिवृत्त वरिष्ठ जेल अधिकारी आनंद पिल्लेवान उपस्थित थे। दीक्षाभूमि स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्मारक समिति के निजी सहायक रवि मेंढे सहित अन्य गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहे।
कारागृह प्रशासन ने नागरिकों से दीक्षाभूमि स्थित बिक्री केंद्र पर पहुंचकर वस्तुएं खरीदने और बंदियों का उत्साह बढ़ाने की अपील की है। यह पहल बंदियों को अपनी गलतियों से सीखकर हुनर के सहारे नई जिंदगी शुरू करने का अवसर देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Created On :   19 Oct 2026 9:12 PM IST
Tags
- नागपुर
- महाराष्ट्र समाचार
- Nagpur News
- Maharashtra News
- नागपुर शहर
- नागपुर ग्रामीण
- कामठी
- हिंगना
- कलमेश्वर
- काटोल
- नरखेड़
- सावनेर
- उमरेड
- कुही
- भिवापुर
- मौदा
- पारशिवनी
- रामटेक
- कन्हान
- वाडी
- बुटीबोरी
- कोराडी
- खापरखेड़ा
- मोहपा
- कोंढाली
- वर्धा रोड
- वलनी
- पेंच
- येरखेड़ा
- वडधामना
- बेसा
- मानकापुर
- जरीपटका
- कामठी रोड
- पारडी
- वाठोडा
- हुडकेश्वर
- नंदनवन
- दिघोरी
- बेलतरोड़ी
- मानेवाड़ा
- नरेंद्रनगर
- प्रतापनगर
- सोनेगांव
- अजनी
- धरमपेठ
- सदर
- महाल
- इतवारी
- गंजपेठ












