नेशनल फार्मेसी वीक 2026: एंटीबायोटिक के अंधाधुंध इस्तेमाल से बढ़ रहा रेजिस्टेंस का खतरा, ऐसे में फार्मासिस्ट की भूमिका भी अहम - विशेषज्ञों ने सुझाए खास टिप्स

- नागपुर यूनिवर्सिटी में ‘वर्ल्ड फार्मेसी डे और नेशनल फार्मेसी वीक’ के तहत विविध कार्यक्रम
- राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में नेशनल फार्मेसी वीक 2026 का आयोजन
- क्विज, पोस्टर, स्लोगन और रील मेकिंग प्रतियोगिताओं के जरिए विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा
- विशेषज्ञों ने एंटीबायोटिक्स के उचित इस्तेमाल और फार्मासिस्ट की भूमिका पर किया मार्गदर्शन
- बिना जरूरत सेवन करने से लिवर और किडनी पर पड़ सकता है असर
डिजिटल डेस्क, नागपुर। एंटीबायोटिक दवाओं का अनावश्यक और गलत इस्तेमाल आज स्वास्थ्य जगत के सामने एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। इस समस्या के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इसके नियंत्रण में फार्मासिस्ट की भूमिका को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के फार्माकोलॉजी विभाग की ओर से फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रायोजन में ‘वर्ल्ड फार्मेसी डे एवं नेशनल फार्मेसी वीक 2026’ का आयोजन किया गया। ‘हेल्दी इंडिया – एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का सामना’ थीम पर आधारित इस आयोजन में विद्यार्थियों को एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस के कारणों, दुष्परिणामों और रोकथाम के उपायों से अवगत कराया गया।
वायरल संक्रमण में बेअसर हैं एंटीबायोटिक्स
सर्दी-जुकाम, फ्लू और डेंगू जैसी बीमारियां वायरस के कारण होती हैं। ऐसे में एंटीबायोटिक दवाएं संक्रमण पर असर नहीं करतीं। इसके बावजूद बिना चिकित्सकीय सलाह इन दवाओं का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
जीएमसी के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अतुल राजकोंडावार के अनुसार, एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल केवल बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण में ही किया जाना चाहिए। निमोनिया जैसे बैक्टीरियल संक्रमण में डॉक्टर की सलाह पर इन दवाओं की आवश्यकता हो सकती है। बिना जरूरत एंटीबायोटिक्स लेने से बैक्टीरिया में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने लगती है। इसके चलते भविष्य में संक्रमण होने पर संबंधित दवाएं बेअसर हो सकती हैं। वहीं, दवाओं की अधिक मात्रा या तेज डोज लेने से लिवर और किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर भी दुष्प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह और निर्धारित खुराक के अनुसार ही करना चाहिए।
क्या है एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस यानी एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) के पीछे कई कारण हैं। बैक्टीरिया में समय के साथ प्राकृतिक रूप से बदलाव होते रहते हैं, लेकिन हमारी कुछ गलत आदतें इस प्रक्रिया को और तेज कर देती हैं। इनमें प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं
एंटीबायोटिक दवाओं का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल: कई बार लोग बिना जरूरत के भी एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करते हैं। जबकि सर्दी-जुकाम और अन्य वायरल संक्रमण में इन दवाओं का कोई असर नहीं होता। इसके बावजूद इनका इस्तेमाल करने से बैक्टीरिया में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।
दवा का पूरा कोर्स न करना: डॉक्टर द्वारा निर्धारित अवधि से पहले ही एंटीबायोटिक दवाएं बंद कर देना भी नुकसानदायक हो सकता है। कई मरीज तबीयत में सुधार होते ही दवा लेना छोड़ देते हैं। इससे संक्रमण फैलाने वाले कुछ बैक्टीरिया जीवित रह सकते हैं और दोबारा बीमारी पैदा कर सकते हैं।
बिना डॉक्टरी सलाह के दवा लेना: मेडिकल स्टोर से बिना डॉक्टर की पर्ची के एंटीबायोटिक खरीदकर खुद ही सेवन करना गलत है। इस तरह बिना जांच और उचित सलाह के दवा लेने से इलाज प्रभावित होने के साथ ही एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस का खतरा भी बढ़ता है।
दवा की गलत खुराक और अनुचित प्रिस्क्रिप्शन: जरूरत से ज्यादा मात्रा में या गलत प्रकार की एंटीबायोटिक लिखना भी इस समस्या का एक कारण है। सही बीमारी की पहचान और मरीज की स्थिति के अनुसार उचित दवा, खुराक और अवधि तय करना जरूरी है।
प्रतियोगिताओं के जरिए दिया जागरूकता का संदेश
कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों के ज्ञान, रचनात्मकता और व्यावसायिक कौशल को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। 22 अक्टूबर को फार्मा क्विज और पोस्टर प्रतियोगिता हुई, जबकि 29 अक्टूबर को स्लोगन, रील मेकिंग और लीफलेट प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इनमें बी.फार्म, एम.फार्म और पीएचडी के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को फार्मास्युटिकल साइंस की जानकारी बढ़ाने के साथ ही समाज के स्वास्थ्य के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का अवसर मिला।
विशेषज्ञों ने बताए एंटीबायोटिक के सही इस्तेमाल के तरीके
2 नवंबर को जागरूकता रैली और विशेषज्ञ सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें डॉ. शिल्पा एस. देशपांडे ने एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस के कारणों, इसके बढ़ते प्रभाव और बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल केवल जरूरत के अनुसार और चिकित्सकीय सलाह से ही किया जाना चाहिए। दवाओं का अनावश्यक इस्तेमाल और निर्धारित उपचार का सही तरीके से पालन नहीं करना एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की समस्या को बढ़ा सकता है। उन्होंने इस चुनौती से निपटने में फार्मासिस्ट की जिम्मेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया।
विभागीय टीम ने किया कार्यक्रमों का समन्वय
विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र काकडे और नोडल अधिकारी डॉ. राजेश उगले के मार्गदर्शन में डॉ. प्रफुल्ल साबले, डॉ. रीता वडेटवार, डॉ. निशिकांत राउत सहित विभाग के अन्य सदस्यों ने आयोजन की विभिन्न गतिविधियों का समन्वय किया। वहीं, डॉ. वीणा बेलगमवार, डॉ. डी.एम. कोकरे, डॉ. पी.एस. साल्वे और डॉ. एस.के. प्रसाद ने प्रतियोगिताओं के मूल्यांकन की जिम्मेदारी संभाली।
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