Nagpur News: छह एकांकियों में दिखे सामाजिक सरोकार और हास्य के विविध रंग

Nagpur News विदर्भ साहित्य संघ, नागपुर की ओर से आयोजित विदर्भस्तरीय ओपन एकांकी प्रतियोगिता के तीसरे दिन छह एकांकियों का मंचन किया गया। इन प्रस्तुतियों में सामाजिक मुद्दों, मानवीय संवेदनाओं, रिश्तों, दोस्ती, अंधविश्वास और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों को अलग-अलग अंदाज में प्रस्तुत किया गया। कलाभिनय, नागपुर की ओर से संजय पवार लिखित और निखिल टोंगले निर्देशित ‘1947 से ए.के. 47’ में सांप्रदायिक हिंसा और राजनीतिक स्वार्थ के बीच मानवीय दया, संवाद और अहिंसा का संदेश दिया गया। वहीं, यवतमाल के गणपति मंदिर देवस्थान की प्रस्तुति ‘खानदानी लग्नाचा लोचा’ में अंधविश्वास, पाखंड और पारिवारिक दुश्मनी को हास्य के माध्यम से दर्शाया गया। वत्सल क्रिएशन कल्चरल मंडल की ‘रिसर्च एंड एनालिसिस विंग’ एकांकी में देश की सुरक्षा से जुड़ी साजिश और जासूसी की रोमांचक कहानी दिखाई गई।
गंभीर विषयों को दिया रोचक अंदाज
‘सुसाइड पॉइंट’ में हरेश मायेकर ने आत्महत्या जैसे गंभीर विषय को संवेदनशीलता और हास्य के साथ प्रस्तुत किया। मनीष चौधरी के निर्देशन में मंचित इस एकांकी ने मुश्किल परिस्थितियों से उबरने और जीवन में उम्मीद तलाशने का संदेश दिया। वहीं, देवरंजन मल्टीपर्पज इंस्टीट्यूशन की ‘शेरलॉक होम्स’ में लेखक आर्थर कॉनन डॉयल के जीवन के उस संघर्ष को दर्शाया गया, जिसमें काल्पनिक किरदार की लोकप्रियता के बीच लेखक अपनी पहचान तलाशता है। इस प्रस्तुति का निर्देशन प्रवीण देशकर ने किया।
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दोस्ती और भावनात्मक सहारे का संदेश
दिन की छठी प्रस्तुति ‘ऑल इज वेल’ ने दोस्ती के महत्व और भावनात्मक सहारे को केंद्र में रखा। अनीता जोशी लिखित और निर्देशित इस एकांकी में दिखाया गया कि संघर्षपूर्ण जीवन में सच्ची दोस्ती किस तरह मन को सुकून और मुश्किलों से लड़ने की ताकत देती है। छहों प्रस्तुतियों के माध्यम से कलाकारों ने मनोरंजन के साथ सामाजिक संदेश भी दिए और दर्शकों को विभिन्न विषयों पर विचार करने का अवसर प्रदान किया।
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