Nagpur News: अखिल भारतीय प्राच्यविद्या परिषद में कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय का शानदार प्रदर्शन

  • 104 प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा
  • 101 शोधपत्र किए प्रस्तुत, विद्यार्थियों और शोधार्थियों को मिले पुरस्कार

Nagpur News अखिल भारतीय प्राच्यविद्या परिषद का 52वां अधिवेशन हाल ही में पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार में आयोजित किया गया। सम्मेलन में देश-विदेश से करीब 3 हजार प्रतिनिधियों, संस्कृत विद्वानों और विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने सहभागिता की। पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्वामी रामदेव, कुलपति आचार्य बालकृष्ण और प्रति-कुलपति साध्वी देवप्रिया के मार्गदर्शन में संपन्न इस अधिवेशन में कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। कुलपति डॉ. अतुल वैद्य की प्रेरणा से विश्वविद्यालय के 104 प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। इनमें 22 प्राध्यापक, 16 स्नातकोत्तर विद्यार्थी, 65 शोधार्थी और एक प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे। विश्वविद्यालय की ओर से कुल 101 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। सम्मेलन की आयोजन महासचिव एवं संस्कृत तथा संस्कृतेतर संकाय की अधिष्ठाता प्रो. कविता होले ने आयोजन की योजना और क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं, रत्नागिरी उपकेंद्र के संचालक डॉ. दिनकर मराठे ने 22 शैक्षणिक विभागों में करीब 1,000 शोधपत्रों के सत्रों का समन्वय किया। कुलपति डॉ. वैद्य ने सभी सहभागियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए इसे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता और अनुसंधान क्षमता का प्रमाण बताया।

कार्यकारिणी में विश्वविद्यालय के छह प्राध्यापकों को स्थान : परिषद के आगामी 2026-2028 कार्यकाल के लिए प्रो. कविता होले को पुनः महासचिव निर्वाचित किया गया। इसके अलावा प्रो. हरेकृष्ण अगस्ती, प्रो. प्रसाद गोखले, डॉ. जयवंत चौधरी, प्रो. पराग जोशी और प्रो. दिनकर मराठे को कार्यकारिणी सदस्य चुना गया। संस्कृत कविगोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. पराग जोशी ने की, जिसमें देशभर के करीब 25 कवियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने स्वामी रामदेव के समक्ष अपनी प्रसिद्ध कविता ‘सुता’ का काव्यपाठ किया। विश्वविद्यालय के डॉ. निशांत मिश्र ने भी संस्कृत काव्य प्रस्तुत किया। वहीं, प्रो. प्रसाद गोखले ने शास्त्रार्थ सभा के ज्योतिष सत्र की अध्यक्षता की। ब्रह्मवादिनी सभा में प्रा. सिमरन ठाकुर और प्रा. राधा देशकर ने पारंपरिक शास्त्रार्थ पद्धति से अपने विचार प्रस्तुत किए।

विभिन्न शैक्षणिक विभागों में विद्वानों ने निभाई नेतृत्व की भूमिका : सम्मेलन के विभिन्न शैक्षणिक विभागों की अध्यक्षता भी विश्वविद्यालय के विद्वानों ने की। प्रो. कलापिनी अगस्ती ने भारतीय दर्शन एवं तत्त्वज्ञान, डॉ. राजेंद्र जैन ने प्राकृत एवं जैन अध्ययन, प्रो. नंदा पुरी ने संस्कृत एवं अभिजात भाषा तथा श्री नंदकिशोर पत्तारकिने ने भारतीय विद्या पुनरीक्षण विभाग की जिम्मेदारी संभाली। उल्लेखनीय है कि नागपुर में आयोजित परिषद के शताब्दी अधिवेशन और उडुपी में हुए सम्मेलन के आयोजन का अनुभव विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों को पहले से प्राप्त है। इसी विशेषज्ञता को देखते हुए पतंजलि विश्वविद्यालय ने आयोजन के लिए उनसे मार्गदर्शन लिया। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने भी शोधपत्र प्रस्तुतियों में पुरस्कार हासिल किए। बोम्मदेवरा विष्णु वर्धन को प्राचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, लीलाधर शर्मा को वेद एवं व्याकरण विभाग तथा रोहिणी शालिग्राम और कांचन सुतोणे को संस्कृत साहित्य विभाग में उत्कृष्ट शोधपत्र के लिए सम्मानित किया गया।

डॉ. रेणुका बोकारे को दो प्रतिष्ठित शोधपत्र पुरस्कार : सम्मेलन के प्रचार-प्रसार और मीडिया समन्वय की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय की जनसंपर्क अधिकारी डॉ. रेणुका बोकारे ने संभाली। प्रिंट, सोशल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से सम्मेलन को देशभर में व्यापक प्रचार मिला। इसके साथ ही डॉ. बोकारे ने अपने शोधकार्य से भी विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया। उनके दो शोधपत्रों के लिए उन्हें दो प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किए गए। सौंदर्यशास्त्र एवं काव्यशास्त्र विभाग में प्रस्तुत शोधपत्र के लिए उन्हें ‘स्रग्धरा नंदिनी पुरस्कार’ तथा भारतीय विद्या पुनरीक्षण विभाग में प्रस्तुत शोधपत्र के लिए ‘प्रेसिडेंट पुरस्कार’ मिला। दोनों पुरस्कार स्वामी रामदेव के हाथों प्रदान किए गए। इस प्रकार सम्मेलन में विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों की सामूहिक उपलब्धियों ने राष्ट्रीय स्तर पर उसकी अकादमिक और शोध क्षमता को स्थापित किया।


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