थोड़ी राहत: यूपीआई पर एमडीआर शुल्क दिवाली तक स्थगित, व्यापारिक संगठनों ने फैसले का किया स्वागत

यूपीआई पर एमडीआर शुल्क दिवाली तक स्थगित, व्यापारिक संगठनों ने फैसले का किया स्वागत
  • एनवीसीसी, नागपुर चेंबर ऑफ कॉमर्स और कैमिट ने जताया आभार
  • व्यापारियों को अस्थायी राहत, शुल्क पूरी तरह खत्म करने की मांग
  • दिवाली के बाद शुल्क दोबारा लागू हुआ तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी

डिजिटल डेस्क, नागपुर। यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के जरिए 2,000 रुपये से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क को दिवाली तक स्थगित करने के फैसले का व्यापारिक संगठनों ने स्वागत किया है। नाग विदर्भ चेंबर ऑफ कॉमर्स (एनवीसीसी), नागपुर चेंबर ऑफ कॉमर्स लिमिटेड (एनसीसीएल) और चेंबर ऑफ एसोसिएशन्स ऑफ महाराष्ट्र इंडस्ट्री एंड ट्रेड (कैमिट) ने इसे त्योहारी सीजन में व्यापारियों और ग्राहकों के लिए राहत भरा कदम बताया है। हालांकि, संगठनों ने स्पष्ट किया कि शुल्क स्थगित करना स्थायी समाधान नहीं है। उनकी मांग है कि यूपीआई पर शून्य एमडीआर की व्यवस्था हमेशा के लिए जारी रखी जाए।

व्यापारिक संगठनों का कहना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था का उद्देश्य लेनदेन को सरल, पारदर्शी और किफायती बनाना है। ऐसे में यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने से व्यापारियों की लागत बढ़ सकती है, जिसका अप्रत्यक्ष बोझ ग्राहकों पर पड़ने की आशंका है। इसलिए सरकार को व्यापार जगत की भावनाओं का सम्मान करते हुए प्रस्तावित शुल्क को स्थायी रूप से वापस लेना चाहिए।

व्यापारियों के विरोध के बाद सरकार का कदम

एनवीसीसी ने शुल्क स्थगित करने के फैसले का स्वागत करते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। चेंबर के अध्यक्ष स्वप्निल अहिरकर ने बताया कि प्रस्तावित शुल्क के विरोध में संगठन ने 2 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस और प्रतिवेदनों के माध्यम से अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। उन्होंने इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री, केंद्रीय वित्त मंत्री, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर और महाराष्ट्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर पूर्व अध्यक्ष दीपेन अग्रवाल, अश्विन मेहाड़िया, अर्जुनदास आहुजा, उपाध्यक्ष सीए अश्विनी अग्रवाल, रामअवतार तोतला, उमेश पटेल, सचिव सीए हेमंत सारडा, सहसचिव दीपक अग्रवाल, मनीष जेजानी और जनसंपर्क अधिकारी धर्मेंद्र आहुजा सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

दिवाली के बाद आंदोलन तेज करने की चेतावनी

एनवीसीसी के सचिव सीए हेमंत सारडा और उपाध्यक्ष तथा यूपीआई समिति के संयोजक सीए अश्विनी अग्रवाल ने कहा कि शुल्क केवल स्थगित हुआ है, पूरी तरह समाप्त नहीं किया गया है। यदि दिवाली के बाद इसे दोबारा लागू करने का प्रयास किया गया, तो चेंबर के नेतृत्व में आंदोलन तेज किया जाएगा। संगठन की मांग है कि अस्थायी स्थगन के बजाय शुल्क को पूरी तरह वापस लिया जाए।

शून्य एमडीआर व्यवस्था स्थायी रखने की मांग

नागपुर चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष प्रदीप जाजू ने शुल्क लागू करने के फैसले को टालने के लिए सरकार के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान यह निर्णय व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों को राहत देगा। यूपीआई देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है और छोटे दुकानदारों के लिए सुविधाजनक भुगतान माध्यम है। इस पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के प्रयास प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने सरकार से शून्य एमडीआर व्यवस्था स्थायी रूप से बनाए रखने का आग्रह किया।

डिजिटल रुपये के विस्तार तक यूपीआई पर शुल्क नहीं लगाने की मांग

नागपुर चेंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष सीए कैलाश जोगानी ने देश में केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा यानी ई-रुपये के विस्तार की दिशा में तेजी लाने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब तक डिजिटल रुपये की व्यवस्था व्यापक और मजबूत नहीं हो जाती, तब तक यूपीआई लेनदेन पर किसी भी तरह का शुल्क या एमडीआर नहीं लगाया जाना चाहिए।

जीरो एमडीआर ही व्यापारियों के हित में : डॉ. दीपेन अग्रवाल

कैमिट के अध्यक्ष डॉ. दीपेन अग्रवाल ने कहा कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की ओर से प्रस्तावित एमडीआर शुल्क की वसूली दिवाली के बाद तक स्थगित करने का निर्णय स्वागतयोग्य है। हालांकि, इससे व्यापारियों को केवल अस्थायी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों के हित में स्थायी समाधान यही है कि यूपीआई पर जीरो एमडीआर की व्यवस्था जारी रखी जाए।

Created On :   13 Oct 2026 9:23 PM IST

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