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बढ़ती गर्मी में बत्ति गुल: 44.2OC में पड़ रहा मेंटेनेंस भारी,बेमुरव्वत महावितरण से उपभोक्ता परेशान - मरीज तंग, विद्यार्थी हलाकान

Nagpur News. भीषण गर्मी में लोग राहत के लिए पूरी तरह बिजली पर निर्भर हैं। एक पल भी कूलर, एसी के बगैर रहना मुश्किल है। ऐसे में महावितरण की ‘मेंटेनेंस की घोषणा किसी मुसीबत से कम नहीं। 44.2 डिग्री सेल्सियस तापमान में यह मुसीबत मरीजों की जान पर बन आई, तो विद्यार्थियों को भरी दोपहरिया पसीने छुड़ाती रही।
इन क्षेत्रों में प्रभावित रही आपूर्ति
- गांधीबाग विभाग के तहत आने वाले कुंदनलाल गुप्ता नगर, किंखेडे ले-आउट, शाहू मोहल्ला, 12 नल चौक, फुकट नगर, नामदेव नगर और वृंदावन नगर में बुधवार सुबह 7 से 11 बजे तक बिजली आपूर्ति बंद रही।
- कांग्रेस नगर विभाग के तहत शंकर नगर, गांधीनगर, यशवंत नगर, अंबाझरी ले-आउट, हिल रोड, बजाज नगर, धरमपेठ एक्सटेंशन और गोकुलपेठ परिसर में सुबह 7 से 11 बजे तक बिजली गुल रही।
- त्रिमूर्ति नगर कन्नमवार नगर, उज्ज्वल नगर, कुर्वे नगर, पावनभूमि, पर्यावरण नगर, यशोदा नगर, वासुदेव नगर, कल्याण नगर, ऐश्वर्या कॉलोनी, गाडगे नगर, राजेंद्र नगर, एसबीआई कॉलोनी, साईनाथ नगर, मोखारे कॉलेज, भामटी, गोपाल नगर, प्रताप नगर, जोशीवाडी, मॉडर्न सोसायटी, स्वावलंबी नगर, सरस्वती ले-आउट और कापसे ले-आउट में सुबह 7 से 11 और लोकसेवा नगर और दीनदयाल नगर परिसर में सुबह 8 से 11 बजे तक बिजली गुल रही।
बच्चे-बुजुर्ग हुए बेहाल
भीषण गर्मी में बच्चे-बुजुर्गों की हालत ज्यादा खराब रही। कुछ लोगों की तबीयत भी बिगड़ने की खबरें सामने आई हैं। नागरिकों का सीधा सवाल है कि क्या विभाग को यह अंदाजा नहीं कि अप्रैल-मई की गर्मी में बिजली बंद करना लोगों के लिए कितना कष्टदायक हो सकता है? घोषणा के अलावा बिजली आने-जाने की परेशानी लगातार बनी हुई है। लोगों में भारी आक्रोश है।
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1. स्वास्थ्य पर असर
मरीजों की स्थिति : अस्पतालों में तो बैकअप होता है, लेकिन घर पर स्वास्थ्य लाभ ले रहे बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के लिए बिजली जाना जानलेवा हो सकता है। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर या नेबुलाइज़र जैसे उपकरण बिजली पर ही निर्भर हैं।
हीट स्ट्रोक का खतरा: बिना पंखे या कूलर के बंद कमरों में तापमान तेजी से बढ़ता है, जिससे डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
2. विद्यार्थियों को मानसिक और शारीरिक थकान
अप्रैल और मई का समय परीक्षाओं और उनके परिणामों का होता है। ऐसी भीषण गर्मी में बिना बिजली के पढ़ाई करना तो दूर, एकाग्रता बनाए रखना भी नामुमकिन है। पसीने से तर-बतर छात्र न तो सो पाते हैं और न ही पढ़ पाते हैं।
3. ‘मेंटेनेंस' का गलत समय
सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि "जब तापमान 44 डिग्री पार कर रहा है, तब मेंटेनेंस क्यों? बिजली विभाग को भारी मरम्मत के काम फरवरी या मार्च में ही निपटा लेने चाहिए थे। पीक समर में मेंटेनेंस की घोषणा विभाग की नियोजन विफलता को दर्शाती है।
4. गारंटी मिलनी चाहिए
आपातकालीन बैकअप : मेंटेनेंस के दौरान वैकल्पिक लाइन से बिजली की आपूर्ति हो।
पूर्व सूचना और समय सीमा: कटौती केवल घोषित समय तक ही सीमित रहे और रात के समय या दोपहर के सबसे गर्म घंटों (12 से 4 बजे) में बिल्कुल न हो।
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यह जनता के साथ अन्याय है
राजेश तिवारी ने कहा इतनी गर्मी में बिजली काटना किसी सजा से कम नहीं है। महावितरण को जनता की कोई परवाह नहीं है, बस बहाने चाहिए। हमारे घर में बुजुर्ग हैं, बिना लाइट पंखे से उनका बीपी लो हो गया था।
रख-रखाव नहीं, लापरवाही
सविता शर्मा ने कहा घर में छोटे बच्चे हैं, बुजुर्ग हैं, सबकी हालत खराब हो गई। यह रख-रखाव नहीं, लापरवाही है। हमारा घर थर्ड फ्लोर पर हैं ऐसे में गर्मी बहुत ज्यादा सता रही थी।
कामकाज पूरी तरह ठप
इमरान खान ने कहा दुकान का पूरा काम ठप हो गया। हर बार मेंटेनेंस का नाम लेकर बिजली काट दी जाती है, लेकिन सुधार कहीं नजर नहीं आता।
पढ़ाई पर पड़ा असर
पूजा देशमुख ने बताया आने वाले दिनों में परीक्षाए आने वाली हैं, ऐसे में घंटों बिजली नहीं रहती। पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है। गर्मी और लाइट दोनों बहुत जरूरी है पर दोनों नहीं रहने से बहुत समस्या हो जाती हैं।
गुस्सा सड़कों पर नजर आएगा
अमित वर्मा ने कहा अगर यही हाल रहा तो लोगों का गुस्सा सड़कों पर नजर आएगा। विभाग को अब जवाब देना ही होगा। सुबह ऑफिस जाने के वक्त में कई काम होते हैं पर बिजली न होने से समस्या बढ़ती हैं और गुस्सा बढ़ते जाता है।
Created On :   30 April 2026 7:38 PM IST











