Nagpur News: नायलॉन मांजे का रूट ही नहीं पता, तो रोकेंगे कैसे? हाईकोर्ट ने अमरावती पुलिस की नीति पर उठाए सवाल

नायलॉन मांजे का रूट ही नहीं पता, तो रोकेंगे कैसे? हाईकोर्ट ने अमरावती पुलिस की नीति पर उठाए सवाल
  • उत्पादन से बिक्री तक पूरी श्रृंखला की जानकारी नहीं, सीमा पर निगरानी को लेकर भी मांगा स्पष्टीकरण
  • पक्षियों, नागरिकों और दोपहिया वाहन चालकों के घायल होने की घटनाओं पर कोर्ट ने जताई गंभीर चिंता
  • सिर्फ कागजों पर उपाय पर्याप्त नहीं, 28 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

Nagpur News नायलॉन मांजा आखिर कहां से आता है और उसकी आपूर्ति किन रास्तों से होती है, इसकी स्पष्ट जानकारी ही पुलिस के पास नहीं है। ऐसे में इसके उत्पादन और वितरण पर प्रभावी रोक कैसे लगाई जाएगी? इस सवाल को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने अमरावती पुलिस द्वारा पेश की गई नीति पर नाराजगी जताई। नायलॉन मांजे के आने का मार्ग स्पष्ट नहीं होने पर कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए पूछा कि यदि यह पड़ोसी राज्यों से महाराष्ट्र में लाया जा रहा है, तो सीमा क्षेत्रों में इसकी जांच और आवाजाही रोकने के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी। न्यायालय ने इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है।

घटनाओं को गंभीरता से लेने के निर्देश : नायलॉन मांजे से पक्षियों, नागरिकों और दोपहिया वाहन चालकों के घायल होने की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने पहले ही इसके उत्पादन से लेकर बिक्री और उपयोग तक प्रभावी रोक लगाने के लिए व्यवस्था तैयार करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद नागपुर और अमरावती पुलिस के साथ ही महानगरपालिका प्रशासन ने अपनी-अपनी नीतियां न्यायालय के समक्ष पेश कीं। मंगलवार को न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति रजनीश व्यास की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।

उत्पादन और वितरण की पूरी श्रृंखला पर उठे सवाल : अमरावती के लिए तैयार की गई नीति की समीक्षा के दौरान न्यायालय ने उसकी कमियों पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि नायलॉन मांजे के उत्पादन और वितरण की पूरी श्रृंखला के संबंध में नीति में पर्याप्त जानकारी दिखाई नहीं देती। साथ ही जमीनी स्थिति के अनुरूप भी नीति प्रभावी नजर नहीं आती। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल कागजों पर उपाय लिख देने से नायलॉन मांजे पर प्रभावी प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।

अब इस मामले में अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी। न्यायालय मित्र के रूप में एड. निश्चय जाधव ने पैरवी की। राज्य सरकार की ओर से एड. एस. एम. उके तथा महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से एड. एस. एस. सन्याल ने पक्ष रखा।

Created On :   23 Sept 2026 1:44 PM IST

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