- Home
- /
- राज्य
- /
- महाराष्ट्र
- /
- नागपुर
- /
- विभाजन के बाद भारत आए लोग शरणार्थी...
Nagpur News: विभाजन के बाद भारत आए लोग शरणार्थी नहीं, मातृभूमि के लिए संघर्ष करने वाले थे - भागवत

Nagpur News भारत-पाकिस्तान विभाजन को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ.मोहन भागवत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा है कि विभाजन के बाद पाकिस्तान से भारत आनेवाले लोगों को शरणार्थी कहना रचित नहीं है। वे अपनी मातृभूमि, संस्कृति और धर्म के प्रति प्रेम के कारण विस्थापित हुए संघर्षशील लोग हैं। नागपुर में सिंधु एजुकेशन सोसायटी की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सरसंघचालक डॉ.भागवत बोल रहे थे। डॉ.भागवत ने कहा कि इन लोगों ने अपना भविष्य, संपत्ति और जीवनभर की कमाई पीछे छोड़कर भारत का रुख किया और यहां आकर नए सिरे से जीवन बनाया। ऐसे लोगों के लिए “शरणार्थी” शब्द का इस्तेमाल एक ऐतिहासिक भूल थी।
संकटों से भागने वाला पहले ही हार जाता है : अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि किसी भी संस्था की यात्रा में ऐसे पड़ाव आत्ममंथन का अवसर प्रदान करते हैं। समय बदल सकता है, लेकिन कार्य के पीछे की निष्ठा और उद्देश्य नहीं बदलने चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में कठिनाइयां आना स्वाभाविक है, लेकिन उनसे घबराना नहीं चाहिए। जो व्यक्ति लगातार प्रयास करता है, वही सफलता प्राप्त करता है, जबकि संकटों से बचने की कोशिश करने वाला व्यक्ति पहले ही पराजित हो जाता है। भागवत ने सुख और दुख दोनों परिस्थितियों को समान दृष्टि से देखने की सलाह देते हुए कहा कि कठिन समय में भी आशा की किरण तलाशनी चाहिए।
शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं : शिक्षा के विषय पर भागवत ने कहा कि रोजगार प्राप्त करना शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य हो सकता है, लेकिन यही उसका अंतिम लक्ष्य नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य व्यक्ति में विवेक, नैतिकता और सही-गलत की पहचान विकसित करना है।
उन्होंने कहा कि मूल्य आधारित शिक्षा केवल पुस्तकों से नहीं मिलती, बल्कि शिक्षकों के आचरण और संस्कारों से भी प्राप्त होती है। समाज के प्रति जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक तैयार करना ही शिक्षा का सबसे बड़ा उद्देश्य होना चाहिए। कार्यक्रम में सिंधी समाज के गणमान्यों के अलावा कई सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।
-संघ और सरसंघचालक कई बार भारत के विभाजन का विरोध करते रहे हैं। लेकिन इस बार विभाजन को लेकर उन्होंने अलग मत व्यक्त किया है।
-सरसंघचालक ने सामाजिक, मानवीय व सार्वजनिक जीवन का महत्व समझाया है। शिक्षा को संस्कार से जोड़ा है।
Created On :   2 July 2026 3:25 PM IST















