मानवाधिकार आयोग पहुंचा भूमिहार ब्राह्मण जाति से ब्राह्मण शब्द हटाने का मामला, शिकायत दर्ज

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली. बिहार में जाति प्रमाण-पत्रों में पूर्व से दर्ज “भूमिहार ब्राह्मण” के स्थान पर केवल “भूमिहार” अंकित किए जाने को लेकर अखिल भारतीय भूमिहार ब्राह्मण महासंघ ने आपत्ति जताते हुए राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आयोग से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा कि बिहार सरकार के वर्तमान निर्देश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए और पूर्व प्रचलित “भूमिहार ब्राह्मण” पहचान को यथावत रखा जाए।
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महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनीष शेखर ने एनएचआरसी को दिए पत्र में ‘भूमिहार ब्राह्मण’ समुदाय को अयाचक ब्राह्मण परंपरा से जोड़ते हुए विभिन्न क्षेत्रों में प्रचलित नामों का भी उल्लेख किया है और कहा है कि समुदाय की पहचान का प्रश्न केवल प्रशासनिक रिकॉर्ड तक सीमित नहीं, बल्कि उसकी सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा है। शेखर ने लिखा है कि भगवान परशुराम के साथ चलने वाले अयाचक ब्राह्मण जिन्होने दान लेने को इन्कार कर दिया और कृषि कार्य को अपना मुख्य पेशा बनाया, देश के विभिन्न कोनों मे भिन्न-भिन्न नाम से जाने जाते है।
ये अयाचक ब्राह्मण बिहार झारखण्ड एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश मे भूमिहार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा मे त्यागी, महाराष्ट्र मे चितपावन तथा देशस्थ, मध्य प्रदेश मे गालव, पंजाब हिमाचल प्रदेश तथा जम्मु मे मोहियाल, राजस्थान में पुष्कर्ण, बंगाल में बारिन्द्रो, उड़ीसा में हलवा, कश्मीर में कौल, गुजरात में अनाविल, आन्ध्र प्रदेश में नियोगी, कर्नाटक में हब्यक, तमिलनाडु में अयंगार तथा केरला मे नम्बूदरी के नाम से जाने जाते है।
Created On :   9 Oct 2026 7:55 PM IST












