दैनिक भास्कर हिंदी: नागपुर में एक माह में तोड़े जाएंगे 121 अनधिकृत धार्मिक स्थल ,हाईकोर्ट से रास्ता साफ 

June 18th, 2019

डिजिटल डेस्क,  नागपुर। नागपुर शहर में अगले एक माह के भीतर 121 अनधिकृत धार्मिक स्थल गिराए जाएंगे।  बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ से इसका रास्ता साफ हो गया है। मनपा ने हाईकोर्ट में शपथ-पत्र प्रस्तुत करके यह जानकारी दी है। दरअसल, हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के मुताबिक मनपा ने शहर के 1205 अनधिकृत धार्मिक स्थलों को ‘ए’ और ‘बी’ श्रेणी में विभाजित करके उनकी सूची जारी की। वर्ष 2009 के पहले बने अनधिकृत धार्मिक स्थलों को नियमित किया जा सकता है, ऐसे 1007 स्थल सूची ‘ए’ में थे। ‘बी’ श्रेणी में 198 ऐसे अनधिकृत धार्मिक स्थल रखे गए, जिन्हें नियमित नहीं किया जा सकता और तोड़ना जरूरी है।

एक माह का मिला समय

इसके बाद आए दावे और आपत्तियों पर मनपा की एक विशेष समिति ने सुनवाई ली। अंतत: 1084 अनधिकृत धार्मिक स्थलों को ‘ए’ श्रेणी और 121 धार्मिक स्थलों को ‘बी’ श्रेणी में डाला गया, मनपा ने इन 121 स्थलों को एक माह के भीतर तोड़ने का फैसला लिया है, जिसे हाईकोर्ट ने मंजूर कर लिया है। कोर्ट ने मनपा काे एक माह के भीतर इस आशय का शपथ-पत्र देने को कहा है कि शहर में एक भी अनधिकृत धार्मिक स्थल बाकी नहीं है। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से एड. फिरदौस मिर्जा और मनपा की ओर से एड. सुधीर पुराणिक ने पक्ष रखा।

यह था कोर्ट का पिछला आदेश

19 सितंबर 2018 को हाईकोर्ट ने मनपा को आदेश दिया था कि मनपा आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति गठित करें और 29 सितंबर 2009 के पहले स्थापित किए गए अनधिकृत धार्मिक स्थलों की सूची नए सिरे से बनाएं। ‘ए’ श्रेणी में ऐसे अनधिकृत धार्मिक स्थलों को रखें, जिन्हें नियमित किया जा सकता है। कोर्ट ने 1 मई 1960 के बाद के अनधिकृत धार्मिक स्थलों को नियमित करने के लिए राज्य स्तरीय समिति से एक माह में मंजूरी लेने को कहा था। ‘बी’ श्रेणी में ऐसे अनधिकृत धार्मिक स्थलों को रखें, जिन्हें गिराना जरूरी हो, लेकिन इन्हें गिराने के पहले राज्य स्तरीय समिति से एक माह पूर्व मंजूरी लें। 

यह थी याचिका

हाईकोर्ट में वर्ष 2006 में मनोहर खोरगड़े द्वारा दायर याचिका में शहर में जनता से जुड़ी विविध समस्याओं का जिक्र किया गया था। मामले की सुनवाई होती गई और शहर में व्याप्त धार्मिक स्थलों के अतिक्रमण, उससे होने वाली यातायात व अन्य समस्याओं पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। इसके बाद मनपा ने कोर्ट में बताया कि उनके सर्वे में 1521 धार्मिक स्थल अनधिकृत पाए गए हैं। इसके बाद हाईकोर्ट ने समय-समय पर मामले में विविध आदेश जारी किए। इसके बाद मनपा और नासुप्र ने धार्मिक स्थलों के अतिक्रमण के खिलाफ धड़ल्ले से कार्रवाई शुरू की थी। कई स्तर के विरोध के बाद में हाईकोर्ट ने भी धार्मिक स्थलों को श्रेणियों में विभाजित करने के आदेश दिए थे।