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नागपुर में दूध की मिलावटखोरी सबसे अधिक , दूसरे नंबर चंद्रपुर

नागपुर में दूध की मिलावटखोरी सबसे अधिक , दूसरे नंबर चंद्रपुर

डिजिटल डेस्क, नागपुर। विभाग में दूध में मिलावटखोरी करने में नागपुर नंबर वन है। यह हम नहीं, अन्न औषधि विभाग के आंकड़े बयां कर रहे हैं। दूसरे नंबर पर चंद्रपुर है। संबंधित विभाग ने दूध के सैंपल लेने के बाद प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर मिलावटखोरों पर कार्रवाई भी की है।  

कुछ व्यवसायी आमदनी बढ़ाने के लिए खाद्य पदार्थों में मिलावट करते हैं। कई पानी मिलाते हैं, तो कुछ शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थ दूध में मिलाते हैं। इन पर नकेल कसने के लिए अन्न व औषधि विभाग हर महीने इनकी जांच करता है। अप्रैल-2019 से अब तक अन्न व औषधि विभाग ने नागपुर विभाग अंतर्गत 5 जिलों से दूध के नमूने लिए, जिसमें नागपुर, भंडारा, वर्धा, चंद्रपुर, गड़चिरोली शामिल है। कुल 96 सैंपल लिए गए, जिसमें से 17 सैंपल में मिलावट पाई गई है। सबसे ज्यादा मिलावट के सैंपल नागपुर शहर व ग्रामीण में पाए गए हैं। 

इसमें सर्वाधिक नागपुर में आमदनी के चलते व्यवसायियों में होड़ की बात सामने आ रही है। आंकड़ों के अनुसार नागपुर शहर से कुल 21 व नागपुर ग्रामीण से 16 दूध के सैंपल लिए गए थे। शहर से 6 व ग्रामीण से 2 नमूने मिलावटी पाए गए हैं। कुछ नमूनों की रिपोर्ट आनी बाकी है, जबकि, शेष जगहों पर जैसे चंद्रपुर में 22 सैंपल में 7, भंडारा में 24 सैंपल में 2 मिलावटी पाए गए हैं। हालांकि, नागपुर में सबसे ज्यादा 8 सैंपल मिलावट के पाए गए हैं।

लेने थे 196 सैंपल, लिए केवल 96
विभाग में गत कई वर्षों से कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ाई है। ऐसे में लगातार बढ़ते दायरे के कारण कार्रवाई करने में विभाग लक्ष्य पूरा नहीं कर पा रहा है। पूरे विभाग में 196 सैंपल लिए जाने थे, लेकिन 96 सैंपल ही लिए जा सके हैं।  दूध के मामले में कार्रवाई की बात करें, तो विभाग को उपरोक्त अवधि में नागपुर शहर से ही 45 का लक्ष्य था, लेकिन 21 ही हो सका। वहीं, ग्रामीण से 45 की जगह 16 सैंपल ही एकत्रित हो सके। भंडारा से 36 की जगह 24 ही सैंपल लिए जा सके। वर्धा में 27 की जगह 9 ही सैंपल लिए जा सके। गड़चिरोली में 18 की जगह केवल 4 सैंपल ही लिए जा सके।

35 मामले लंबित
गत 9 माह में लिए गए कुछ सैंपल्स की रिपोर्ट अब तक नहीं आ सकी है। नियमानुसार 14 दिनों में रिपोर्ट आना अपेक्षित होता है, लेकिन 196 सैंपल में से अब तक 35 सैंपल की रिपोर्ट नहीं आई है। सबसे ज्यादा प्रलंबित 12 मामले चंद्रपुर के हैं। भंडारा के 9 व नागपुर के 8 हैं।

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।