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चुनाव हारते ही प्रदेशाध्यक्ष साखरे को बसपा ने दिखाया बाहर का रास्ता, लगे गंभीर आरोप

चुनाव हारते ही प्रदेशाध्यक्ष साखरे को बसपा ने दिखाया बाहर का रास्ता, लगे गंभीर आरोप

डिजिटल डेस्क,  नागपुर। बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश साखरे को पार्टी से निलंबित कर दिया गया है। उत्तर नागपुर विधानसभा क्षेत्र से वे बसपा के उम्मीदवार थे। गुरुवार को चुनाव परिणाम आने के कुछ समय बाद ही साखरे को पार्टी से बाहर कर दिया गया। बसपा के प्रदेश प्रभारी अशोक िसद्धार्थ ने पत्र जारी किया। पत्र में उल्लेख है कि साखरे ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया। पार्टी की इच्छा के िवरुद्ध उन्होंने उत्तर नागपुर से चुनाव लड़ा। राज्य में पार्टी के उम्मीदवारों के प्रचार के बजाय वे केवल उत्तर नागपुर में स्व्यं के प्रचार में लगे रहे। साखरे पर आरोप हैं कि उन्होंने जानबूझकर कमजोर उम्मीदवार उतारे। विरोधियों से मिलकर अन्य विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार तय किए। साखरे के कार्य से बसपा को बड़ा नुकसान हुआ है। उनके विरोध में कार्यकर्ताओं का असंतोष सामने आया है।

पहले भी रहे हैं विवाद में

बसपा में  सुरेश साखरे पहले भी विवादित रहे हैं। 2014 के चुनाव के पहले सोलापुर में साखरे का कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध किया था। मारपीट की स्थिति बनी थी। लेकिन बाद में साखरे गुजरात में संगठन का कार्य करने लगी। इस बीच तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष विलास गरुड के साथ उनका मतभेद बढ़ा। राजनीतिक दांव कुछ ऐसे चले कि साखरे प्रदेश अध्यक्ष बन गए । लेकिन लोकसभा चुनाव के पहले फिर से साखरे चर्चा में आए। अमरावती में कुछ नेताओं पर कार्यकर्ताओं ने कुर्सियां उछाली थी। नागपुर में भी तनाव की स्थिति बनी थी। बाद में चर्चा चली कि साखरे ने अप्रत्यक्ष विवाद की स्थिति बनायी। लोकसभा चुनाव के परिणाम आते ही प्रदेश स्तर पर कई पदाधिकारियों का बदलाव किया गया। जिले में भी पदाधिकारी हटाए गए। इस चुनाव में चर्चा रही कि साखरे प्रदेश अध्यक्ष होते हुए भी बसपा में अपने स्तर पर नया गुट तैयार कर रहे हैं।

और भी होगी कार्रवाई

पार्टी प्रमुख के निर्देश पर प्रदेशाध्यक्ष को हटाया गया है। संगठन को नुकसान पहुंचानेवालों की सूची तैयार की गई है। 26 अक्टूबर तक अन्य नाम भी सामने आ जाएंगे।
अशोक सिद्धार्थ, प्रदेश प्रभारी बसपा

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