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विधानसभा : कोरोना वायरस को लेकर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई

विधानसभा : कोरोना वायरस को लेकर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई

डिजिटल डेस्क, मुंबई। कोरोना बीमारी और मांस खाने को लेकर सोशल मीडिया में अफवाह फैला रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने विधानसभा में यह जानकारी दी। टोपे ने कहा कि मामले में साइबर क्राइम डिपार्टमेंट में शिकायत की गई है अफवाह फैलाने वालों पहचान की कोशिश की जा रही है। कोरोना वायरस को लेकर शिवसेना के संजय पोतनिस, भाजपा के चंद्रकांत पाटील, आशीष शेलार आदि सदस्यों द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदस्यों से सवालों के जवाब देते हुए टोपे ने यह भी बताया कि फिलहाल राज्य में कोरोना का कोई मरीज नहीं है। और अच्छी तरह पका मांस खाने से कोरोना का कोई खतरा नहीं होता। विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस के सवाल का जवाब देते हुए टोपे ने बताया कि हवाई मार्ग के साथ बंदरगाहों पर जल मार्ग से आने वाले लोगों की भी स्क्रीनिंग की जा रही है। अब तक 12 देशों से आने वाले 61939 लोगों की स्क्रिनिंग की जा चुकी है। पुणे में कंट्रोलरूम बनाया गया है। इसके अलावा फिलहाल राज्य में पर्याप्त मात्रा में एन-95 मास्क उपलब्ध है, जरूरत पड़ी तो और मास्क मंगाए जाएंगे। वहीं पशुसंवर्धन मंत्री सुनील केदार ने कहा कि कोरोना विषाणु और मुर्गियों और मांस के जरिए फैलने की अफवाह फैलाई जा रही है जिससे पोल्ट्री उद्योग को नुकसान हुआ है। पशुसंवर्धन आयुक्त ने इस मामले में साइबर सेल में शिकायत की है। संदेश लिखने वाले व्यक्ति की पहचान की कोशिश की जा रही है। अमीन पटेल ने मांस का निर्यात रोकने की मांग की लेकिन टोपे ने कहा कि इस पर केंद्र सरकार ही फैसला कर सकती है। 

गोवंश हत्या मामले में नमूनों की जांच के लिए तय होगी समय सीमाः देशाई

गोवंश हत्या के मामलों में मांस के नमूनों की जांच के लिए समयसीमा तय की जाएगी।  मांस की जांच करने वाली प्रयोगशालाओं को निश्चित अवधि में अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। गृहराज्यमंत्री शंभुराजे देसाई ने विधानसभा में यह जानकारी दी। शिवसेना के भास्कर जाधव ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए सदन का ध्यान रत्नागिरी के कामथे, पिंपलीखुर्द और लोटे इलाकों में गोवंश हत्या का मुद्दा उठाया था। उन्होंने पुलिस पर निष्कृयता का आरोप लगाते हुए कहा कि मामलों में ठीक से जांच नहीं की गई आला अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे और मांस की जांच रिपोर्ट में देरी हो रही है। ऐसे में लोगों में रोष बढ़ रहा है। जवाब में गृह राज्यमंत्री देसाई ने कहा कि पिंपलीखुर्द मामले में 8 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इनमें से 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि फरार आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की दो टीमें बनाई गईं हैं। उन्होंने कहा कि डीवायएसपी और इंस्पेक्टर मौके पर मौजूद थे। भीड़ पर किए गए लाठीचार्ज व आला पुलिस अधिकारियों पर मामले में लगे लापरवाही के आरोपों की जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। देसाई ने कहा कि जांच में साफ हुआ कि गिरोह चिपलून में आवारा पशुओं को बेहोशी का इंजेक्शन देकर उनका कत्ल करता था और उनका मांस मुंबई लाकर बेंच देता था। आरोपियों के खिलाफ पुलिस के पास ठोस सबूत हैं। चर्चा में हिस्सा लेते हुए भाजपा के आशीष शेलार ने कहा कि जोगेश्वरी से मीरारोड तक भी गोवंश हत्या करने वालों का गिरोह सक्रिय है। सरकार को इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। शेलार ने कहा कि मुंबई गोवा हाईवे पर बार-बार सामने आ रहीं इस तरह की घटनाओं से समुदायों के बीच तनाव बढ़ रहा है। 

यह सरकार खत्म कर सकती है गोवंश हत्या विरोध कानून 

दूसरी ओर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष-विधायक चंद्रकांत पाटील ने कहा कि ठाकरे सरकार फडणवीस सरकार के फैसलों को एक-एक कर रद्द कर रही है। यदि यह सरकार गोवंश हत्या विरोधी कानून को खत्म कर दे तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं। जबकि फडणवीस सरकार में पशुधन विकास मंत्री रहे महादेव जानकर ने कहा कि गोवंश हत्या विरोध कानून को खत्म किया गया तो कड़ा विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके खिलाफ हम सदन से सड़क तक संघर्ष करेंगे। 

स्थाई गैर अनुदानित स्कूलों का अनुदान से 20 से होगा 40 फीसदी

पात्र ठहराए गए स्थाई गैर अनुदानित स्कूलों का अनुदान चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाएगा। जिन स्कूलों को फिलहाल 20 फीसदी अनुदान मिल रहा है उनका अनुदान बढ़ाकर 40 फीसदी करने को लेकर पूरकमांगों में प्रावधान किया गया है। बाकी बचे हुए स्कूलों को अगले शैक्षणिक सत्र से अनुदान शुरू किया जाएगा और इसे धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने विधानसभा में यह जानकारी दी। विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने ध्यानकर्षण प्रस्ताव के जरिए सदन का ध्यान इस मुद्दे पर खींचा था। सदस्यों के सवालों के जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड ने बताया कि हमेशा के लिए गैर अनुदानित स्कूलों को अनुदान देने से जुड़ा फैसला 2009 में हुआ था। उच्च माध्यमिक स्कूलों और कॉलेजों के लिए भी 2014 में इसी तरह का फैसला हुआ। इसके बाद पात्र शैक्षणिक संस्थाओं को 20 फीसदी अनुदान शुरू किया गया। अगले 20 फीसदी का प्रस्ताव फिलहाल वित्त विभाग के पास है और मंजूरी के बाद इसे स्कूलों को दिया जाएगा। पूरक मांगों में इसके लिए 145 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। गायकवाड ने कहा कि इस मुद्दे पर सरकार सकारात्मक है और जल्द ही फैसला किया जाएगा। 
 

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