मालेगांव विस्फोट मामला: सुनवाई के दौरान कोर्ट कक्ष से बाहर निकाले गए एटीएस अधिकारी, बचाव पक्ष ने जताई थी आपत्ति

January 27th, 2022

डिजिटल डेस्क, मुंबई। साल 2008 मालेगांव विस्फोट मामले की सुनवाई के दौरान मुंबई की  विशेष अदालत ने कोर्ट में उपस्थित महाराष्ट्र एटीएस के दो अधिकारियों को अदालत कक्ष से बाहर का रास्ता दिखा दिया। गुरुवार को बचाव पक्ष ने एटीएस अधिकारियों की कोर्ट में मौजूदगी को लेकर आपत्ति जताई। राज्य सरकार के निर्देश पर दोनों अधिकारी कोर्ट पहुंचे थे। इस पर एनआईए के वकील ने कहा कि एटीएस अधिकारियों का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। वहीं बचाव पक्ष के वकील जे. पी. मिश्रा ने कहा कि इन अधिकारियों को सुनवाई में शामिल होने का हक नहीं है। 

शुरुआत में आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने इस मामले की जांच की थी किंतु बाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी को (एनआईए) इस प्रकरण की जांच सौंप दिया गया था। 

बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि कानून के अनुसार एनआईए जांच के दौरान अन्य एजेंसियों की मदद ले सकता है, लेकिन सुनवाई के दौरान नहीं। न्यायाधीश पी. आर. सित्रे ने जब दोनों एटीएस अधिकारियों से उनकी मौजूदगी पर सवाल किया तो उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के गृहमंत्री दिलीप वलसे पाटिल के निर्देश पर एटीएस प्रमुख विनीत अग्रवाल ने उन्हें भेजा है उन्होंने अदालत को बताया कि उन्हें सिर्फ मौखिक निर्देश मिला है, कोई लिखित आदेश नहीं मिला है। जब बचाव पक्ष के वकीलों ने कहा कि अगर एटीएस के अधिकारी मौजूद रहे तो वे सुनवाई आगे नहीं बढ़ाएंगे। इसके बाद दोनों अधिकारी कक्ष से बाहर चले गए। कक्ष से बाहर जाने से पहले उन्होंने न्यायाधीश को बताया कि अगली सुनवाई में शामिल होने की अनुमति पाने के लिए वे आवेदन करेंगे। 

इस मामले में अभियोजन पक्ष के कई गवाहों के मुकर जाने के बाद प्रदेश कांग्रेस के कार्याध्यक्ष व पूर्व मंत्री नसीम खान की मांग पर गृह मंत्री वलसे पाटिल ने कहा था कि एटीएस सुनवाई में शामिल होगी। मालेगांव के मस्जिद में हुए विस्फोट में छह लोगों की मौत हुई थी और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इस मामले में भोपाल से भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर भी आरोपी हैं।