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भीमा-कोरेगांव मामला : प्रतिबंधित संगठन से जुड़े थे गोनसालविस, सरकारी वकील का दावा

भीमा-कोरेगांव मामला : प्रतिबंधित संगठन से जुड़े थे गोनसालविस, सरकारी वकील का दावा

डिजिटल डेस्क, मुंबई। भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में आरोपी वर्णन गोनसालविस के पास से मिले पत्र, काल डेटा रिकार्ड और मामले से जुड़े गवाहों के बयान दर्शाते हैं कि गोनसालविस प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) के लिए भर्ती व हथियारों की खरीद से जुड़े थे। यहीं नहीं वे इस संगठन की विचारधारा के प्रचार में भी लगे थे। अतिरिक्त सरकारी वकील अरुणा पई ने बांबे हाईकोर्ट में यह दावा किया है। उन्होंने कहा कि हाल ही में अवैध गतिविधि प्रतिबंधक कानून (यूएपीए) में किए गए संसोधन के तहत आरोपियों के पास से मिली चीजे उसे आरोपी बनाने के लिए पर्याप्त हैं।

हाईकोर्ट में गोनसालिवस सहित प्रकरण से जुड़े अन्य आरोपियों के जमानत आवेदन पर सुनवाई चल रही है। न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल के सामने सरकारी वकील पई ने कहा कि ऐसा दावा किया जा रहा है कि इस मामले में आरोपियों के खिलाफ इसलिए कार्रवाई की गई है क्योंकि वे एक अलग राजनीतिक विचारधारा को मानते थे और दूसरी विचारधारा से असहमति रखते थे। यह बिल्कुल भी सही नहीं है। उन्होंने कहा कि गोनसालविस के खिलाफ पूरे देश में अलग-अलग कानून के तहत 18 मामले दर्ज किए गए हैं। 

 प्रतिबंधित संगठन से जुड़े थे गोनसालविस

साल 2007 में महाराष्ट्र आतंकवादी निरोधक दस्ते (एटीएस) द्वारा दर्ज किए गए मामले में गोनसालविस को दोषी पाया गया था और उसे 6 साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी। जिसे गोनसालविस ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और उसकी अपील सुनवाई के लिए प्रलंबित है। गोनसालविस का सीपीआई (माओवादी) से संबंध होने के दावे को पुष्ट करने के लिए प्रकरण में आरोपियों के पास से मिले पत्र भी न्यायमूर्ति के सामने पेश किया गया। सरकारी वकील ने कहा कि“कमेटी फार रिलीज आफ पालिकिल प्रिजनर’ (सीआरपीपी) व ‘इंडियान एसोसिएशन आफ पीपल्स लॉयर’ इन दोनों संस्थाओं का इस्तेमाल सीपीआई (माओवादी) संगठन को  वित्तीय सहयोग प्रदान करने के लिए किया जाता है। मामले की सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी। 
 

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