दैनिक भास्कर हिंदी: भीमा कोरेगांव मामला : हाईकोर्ट ने न्यायाधीश वादने को लेकर मंगाई जानकारी

July 6th, 2021

डिजिटल डेस्क, मुंबई। भीमा-कोरेगांव के एल्गार परिषद मामले में आरोपी सुधा भारद्वाज ने अपने वकील के माध्यम से बांबे हाईकोर्ट में दावा किया है कि पुणे के जिन न्यायाधीश ने उन्हें गिरफ्तारी के बाद हिरासत में भेजा था वे विशेष न्यायाधीश रुप में नहीं किए गए थे। फिर भी उन्होंने उनके जमानत आवेदन को खारिज करने का फैसला सुनाया। जिसके चलते उन्हें लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा। भारद्वाज की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता युग चौधरी ने कहा कि पुणे के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश केडी वादने ने उनके मुवक्किल व आठ अन्य आरोपियों को साल 2018 में हिरासत में भेजा था। 

इसके साथ ही पुणे के न्यायाधीश ने ही पुणे पुलिस को तत्कालीन समय में इस मामले में आरोपपत्र दायर करने के लिए अतिरिक्त समय दिया था । फिर आरोपपत्र का संज्ञान लिया था। श्री चौधरी ने कहा कि इस दौरान न्यायाधीश वादने ने भारद्वाज के जमानत आवेदन को भी खारिज किया। न्यायाधीश वादने ने अपने सभी आदेशों पर विशेष युएपीए न्यायाधीश के तौर पर हस्ताक्षर किए है लेकिन सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के मुताबिक वादने को कभी भी किसी कानूनी प्रावधान के तहत विशेष न्यायाधीश के तौर पर नामित नहीं किया गया।

हाईकोर्ट में भारद्वाज की ओर से दायर जमानत आवेदन पर सुनवाई चल रही है। मंगलवार को न्यायमूर्ति एसएस शिंदे व न्यायमूर्ति एनजे जमादार की खंडपीठ के सामने याचिका सुनवाई के आयी। इस दौरान अधिवक्ता चौधरी ने उपरोक्त बाते कही। याचिका में भारद्वाज ने न्यायाधीश वादने की ओर से जारी किए गए आदेश को रद्द करने की मांग की है।

इन दलीलों को सुनने के बाद खंडपीठ ने हाईकोर्ट प्रशासन को न्यायाधीश वादने की नियुक्ति व पद को लेकर ब्यौरा देने का निर्देश दिया। खंडपीठ ने कहा कि हम याचिकाकर्ता की ओर से सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी पर संदेह नहीं व्यक्त कर रहे है लेकिन हम खुद भी इस जानकारी सत्यापित करना चाहते है।  खंडपीठ ने मामले को लेकर राज्य सरकार को हलफनामा भी दायर करने का निर्देश दिया है। सरकार को न्यायाधीश वादने से जुड़े रिकार्ड भी पेश करने को कहा है। खंडपीठ ने आठ जुलाई को याचिका पर सुनवाई रखी है।