दैनिक भास्कर हिंदी: ‘मोदीमुक्त भारत’ के बयान को लेकर राज ठाकरे पर भड़की BJP, किया पटलवार

March 19th, 2018

डिजिटल डेस्क, मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ MNS अध्यक्ष राज ठाकरे ने बयान पर BJP नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मुंबई BJP अध्यक्ष आशिष शेलार ने कहा कि जिसको महाराष्ट्र की जनता ने रोजगारमुक्त कर दिया है, वह मोदी मुक्तभारत की बात कर रहा है। सोमवार को विधानभवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत में शेलार ने कहा कि राज ठाकरे को अपना स्तर देखते हुए बोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा MNS मुक्त हो चुकी है। मुंबई मनपा में जो नगरसेवक बचे थे, वह भी दूसरे दल में जा चुके हैं। इस लिए महाराष्ट्र की जनता अब उनपर विश्वास नहीं करने वाली है। BJP नेता ने कहा इसके पहले राज ठाकरे के भाषणों पर बाला साहेब ठाकरे का प्रभाव दिखता था लेकिन अब राकांपा अध्यक्ष शरद पवार का प्रभाव दिख रहा। 

गली के नेता है कैसे करेंगे ‘मोदीमुक्त भारत’ 
महाराष्ट्र BJP के सचिव विधायक अतुल भातखलकर ने कहा कि मोदी मुक्त भारत से पहले महाराष्ट्र MNS मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि यह पराजीत मानसिकता की छटपटाहट है। मोदी मुक्त भारत का नारे देने वाले गल्ली के नेता हैं। इसके पहले रविवार को राज ठाकरे ने MNS की गुडीपाडवा रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि भारत को पहली आजादी 1947 और दूसरी स्वतंत्रता 1977 में मिली थी अब 2019 में भारत को तीसरी आजादी की जरूरत है। अब मोदी मुक्त भारत करने की जरूरत है। 

विपक्षी गठबंधन में शामिल होना चाहते हैं राज ? 
MNS अध्यक्ष राज ठाकरे की राकांपा अध्यक्ष शरद पवार से नजदीकी और मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोलने से उनके विपक्षी गठबंधन में शामिल होने को लेकर चर्चा शुरु हो गई है। हालांकि राज ठाकरे की छवि को देखते हुए कांग्रेस अब भी उनसे दूसरी बनाए रखने में अपनी भलाई समझ रही है। कांग्रेस  के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कांग्रेस ने यदि राज से हाथ मिलाया तो उसे नुकसान उठाना पड़ेगा। महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में उत्तरभारतीय रहते हैं। राज ठाकरे की राजनीति उत्तरभारतीय विरोध की रही है जबकि उत्तरभारतीय कांग्रेस के परंपरागत मतदाता रहे हैं। हालांकि पिछले लोकसभा व विधानसभा चुनाव में उत्तरभारतीय BJP के साथ चले गए थे। लेकिन अभी भी कांग्रेस उन्हें अपना समर्थक मानती है। ऐसी स्थिति में राज ठाकरे से हाथ मिलाने पर कांग्रेस को महाराष्ट्र के अलावा उत्तरभारत में जवाब देना मुश्किल हो जाएगा। दूसरी तरफ MNS और राकांपा के साथ समझौते की अधिक संभावना है। महाराष्ट्र के शहरों में राकांपा अपनी जड़े नहीं जमा सकी है। तमाम कोशिशों के बावजूद मुंबई, ठाणे व नाशिक जैसे शहरों के उत्तरभारतीय मतदाताओं ने राकांपा का साथ नहीं दिया। जबकि इन शहरों में राकांपा की तुलना में MNS के पास अधिक कार्यकर्ता हैं। हालांकि राकांपा प्रवक्ता नवाब मलिक का कहना है कि फिलहाल ऐसी कोई संभावना नहीं है। MNS से गठबंधन को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है।