दैनिक भास्कर हिंदी: शीतकालीन सत्र की तैयारी : बीजेपी- शिवसेना गठबंधन पार्ट 2 में इन्हें मंत्री बनने की आस

October 30th, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर। विधानमंडल के शीतकालीन अधिवेशन की तैयारी शुुरु हो गई है। दिसंबर 2019 में अधिवेशन आरंभ होगा। फिलहाल अधिवेशन की कार्यक्रम तालिका घोषित नहीं हो पायी है। खास बात यह है कि 2014 में पहली बार चुनी गई भाजपा के नेतृत्व की सरकार का पहला अधिवेशन नागपुर में हुआ था। दूसरी बार भाजपा के नेतृत्व में ही सरकार बनने जा रही है। इस सरकार के अधिवेशन की शुरुआत भी नागपुर से ही होगी। विधानमंडल के कामकाज के संबंध में नए विधायकों को पहला अनुभव नागपुर में ही सीखने को मिलेगा। अधिवेशन की तैयारी के तहत विधानभवन व विधानपरिषद इमारत की सफाई शुरु हो गई है। विधानपरिषद इमारत के पास नई इमारत का निर्माण भी तेज गति से किया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि इस बार सिविल लाइन स्थित विधानमंडल परिसर में ही राज्य सरकार का सचिवालय होगा। फिलहाल नागपुर में राज्य सरकार के सचिवालय की इमारत विधानमंडल परिसर से काफी दूर है। गौरतलब है कि साल के आरंभ में दिसंबर या जनवरी में नागपुर में होनेवाला शीतकालीन अधिवेशन पिछली बार नागपुर में नहीं हो पाया है। करीब 35 साल बाद मुंबई में शीतकालीन अधिवेशन हुआ था। इससे पहले जुलाई 2018 में मानसून अधिवेशन हुआ था।

सरकार की ओर से कहा गया था कि मुंबई में विधानमंडल भवन परिसर में निर्माण कार्य के कारण नागपुर में अधिवेशन लेना पड़ रहा है। मुंबई में भारी बारिश के कारण अड़चनों को भी मुंबई के बजाय नागपुर में अधिवेशन का कारण बताया गया था। हालांकि बारिश के कारण नागपुर का अधिवेशन भी चर्चा में रहा। विधानसभा की इमारत तक पानी घुस जाने के कारण अधिवेशन को दो दिन का अवकाश घोषित करना पड़ा था। नागपुर में शीतकालीन अधिवेशन की अनिश्चितता का भी प्रश्न उठने लगा था। लेकिन मुंबई में जुलाई 2019 में हुए मानसून अधिवेशन में घोषणा कर दी गई है कि शीतकालीन अधिवेशन नागपुर में होगा।

शीतकालीन अधिवेशन के पहले शिवसेना शामिल हुई थी सत्ता में

2014 में भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनी थी। देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने थे। लेकिन भाजपा के पास बहुमत नहीं था। शिवसेना दूसरे बड़े दल के तौर पर विपक्ष में थी। शिवसेना ने नेता प्रतिपक्ष भी घोषित किया था। लेकिन दिसंबर 2014 में नागपुर में शीतकालीन अधिवेशन  के पहले शिवसेना सत्ता में शामिल हो गई थी।

देवगिरी काे लेकर अनिश्चिता

देवगिरी के मेहमान को लेकर अनिश्चिता है। देवगिरी बंगला उपमुख्यमंत्री का आवास है। पिछले दो दशक में ही देखें तो इस बंगले का खास आकर्षण रहा है। 1995 में शिवसेना के नेतृत्व की गठबंधन सरकार में उपमुख्यमंत्री गोपीनाथ मुंडे देवगिरी के मेहमान थे। तब अधिवेशन के समय भाजपा के लिए सत्ता केंद्र देवगिरी ही हुआ करता था। उसके बाद छगन भुजबल, आर.आर पाटील, विजयसिंह मोहिते पाटील व अजित पवार उपमुख्यमंत्री रहे हैं। भुजबल व पवार दो बार उपमुख्यमंत्री रहे हैं। 2014 में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में भाजपा शिवसेना की गठबंधन की सरकार में उपमुख्यमंत्री पद नहीं रहा। लिहाजा देवगिरी बंगला मेहमान के इंतजार में ही रह गया। 

मंत्री बनने के लिए जगने लगी आस,अपने अपने स्तर पर प्रयास जारी

वहीं राज्य में भाजपा शिवसेना गठबंधन की सरकार बनना तय माना जा रहा है। देवेंद्र फडणवीस को भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया है। फडणवीस ने कहा है कि पिछली बार की तरह इस बार भी 5 साल तक वे स्थायी सरकार देंगे। फडणवीस के दोबारा मुख्यमंत्री बनने की तैयारी के साथ ही मंत्री बनने की इच्छुकों की उम्मीद फिर से जाग गई है। राजनीतिक जानकार कह रहे हैं कि सत्ता के लिए क्षेत्रीय व दलीय संतुलन को देखते हुए इस बार विदर्भ व नागपुर क्षेत्र में मंत्री पद कम ही आएगा। फिर भी मंत्री चुनने का अधिकार मुख्यमंत्री के पास है। लिहाज उम्मीदें बढ़ रही है कि मुख्यमंत्री मेहरबान होंगेे। मंत्री बनने के इच्छुकों में विधानपरिषद सदस्य भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री के गृह जिले की बात की जाए तो यहां से मंत्री रहे चंद्रशेखर बावनकुले ने इस बार चुनाव नहीं लड़ा है। वे स्वयं कह रहे हैं कि उन्हें पार्टी ने संगठन की जिम्मेदारी दी है। लेकिन मुख्यमंत्री ने चुनाव सभा में कहा है कि बावनकुले को पहले से अधिक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलेगी। ऐसे में बावनकुले समर्थकों को लगता है कि बावनकुले को संगठन में प्रदेश स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। मुख्यमंत्री विशेषाधिकार का प्रयाेग करके बावनकुले को किसी महामंडल की जिम्मेदारी भी दे सकते हैं। नागपुर शहर से मंत्री बनने के इच्छुकों में कृष्णा खोपड़े व सुधाकर देशमुख 5 वर्ष इंतजार करते रह गए। खोपडे तीसरी बार जीते। देशमुख पराजित हुए हैं। ऐसे में खोपड़े व उनके समर्थकों की उम्मीद बढ़ गई है। सामाजिक न्याय के प्रश्न के साथ विकास कुंभारे के समर्थकों को भी कुछ शुभ समाचार मिलने की उम्मीद है। विधानपरिषद सदस्यों में अनिल सोले व गिरीश व्यास पहले से ही इंतजार की कतार में हैं। दोनों को तालिका सभापति के तौर पर विधानपरिषद में सभापति के आसन पर बैठने का मौका मिल चुका है। विधानपरिषद सदस्य रामदास आंबटकर का नाम भी चर्चा में है। चंद्रपुर-वर्धा क्षेत्र निकाय संस्था से विधानपरिषद में पहुंचे आंबटकर प्रदेश भाजपा में महत्चपूर्ण स्थान रखते हैं। संगठन महामंत्री है। यह भी कहा जा रहा है कि आंबटकर को मौका मिले तो खोपड़े की उम्मीद पर पानी फिर सकता है। आंबटकर,खोपड़े व बावनकुले एक ही समाज से संबंधित हैं। फिलहाल भाजपा से राज्यमंत्रिमंडल में सुधीर मुनगंटीवार, अशोक उइके, अनिल बोंडे, संजय कुंटे, मदन येरावार, परिणय फुके शामिल है। बोंडे, फुके पराजित हुए हैं। पिछली बार मंत्री बनने की आस में एक साल तक विदर्भ वैधानिक विकास मंडल का अध्यक्ष पद नहीं स्वीकारनेवाले चैनसुख संचेती भी मंत्री पद की आस नहीं छोड़ेंगे। अन्य इच्कुकों में  राजेंद्र पाटणी, प्रकाश भारसाकले , हरिश पिंपले, समीर कुणावार, पंकज भोयर व आकाश फुंडकर शामिल हैं। गोंदिया से निर्दलीय जीते विनोद अग्रवाल कभी भी भाजपा में लौट सकते हैं। स्वाभिमान पक्ष के रवि राणा भी मुख्यमंत्री के करीब है। दोनों मंत्रीपद के इच्छुक रहेंगे।

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