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रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी, न्यू मुनीश मेडिकोज के कर्मचारियों पर हुआ मामला दर्ज - दुकानदार को बचाया

रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी, न्यू मुनीश मेडिकोज के कर्मचारियों पर हुआ मामला दर्ज - दुकानदार को बचाया

ड्रग इंस्पेक्टर के प्रतिवेदन पर ओमती पुलिस ने की कार्रवाई, इंजेक्शन के माँगे जा रहे थे 18 हजार
डिजिटल डेस्क जबलपुर ।
कोरोना महामारी के बीच मरीजों की जान बचाने के लिए जरूरी रेमडेसिविर इंजेक्शन की कीमत निर्धारित रेट से कई गुना अधिक 18 हजार बताने वाले न्यू मुनीश मेडीकोज के दो कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस ने कालाबाजारी व अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। ज्ञात हो कि रेमडेििसवर इंजेक्शन की कालाबाजारी किए जाने की शिकायत पर रविवार की शाम दुकान पर छापा मारकर दुकान को सील किया गया था। हालाँकि लोग बात पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं कि न्यू मुनीश मेडिकोज के संचालक कामेश राजानी को कार्रवाई के दायरे से बाहर क्यों रखा गया? इस मामले में ड्रग विभाग की भूमिका को संदेह के घेरे में है। 
ओमती थाने से एसआई सतीश झारिया ने बताया कि ड्रग इंस्पेक्टर लखन पटैल द्वारा थाने में एक लिखित प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसमें मॉडल रोड स्थित गुरुद्वारे के नीचे स्थित मेसर्स न्यू मुनीश मेडिकोज में कार्यरत कर्मचारी नितिन विश्वकर्मा व सुदामा बघेल ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी कर निर्धारित मूल्य से अधिक 18 हजार में बेचने की बात एक ग्राहक से की थी। पीडि़त द्वारा इसकी शिकायत किए जाने पर एसडीएम आशीष पांडे के नेतृत्व में दुकान पर छापामारी कर दोनों कर्मचारियों को अभिरक्षा में लिया गया था। ओमती सीएसपी आरडी भारद्वाज के अनुसार उक्त प्रतिवेदन के आधार पर दोनों कर्मचारियों के खिलाफ धारा 269, 270, आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 53, 57 महामारी अधिनियम 3 कालाबाजारी निवारण और आवश्यक वस्तु प्रदाय अधिनियम 3 व ड्रग कंट्रोल 5-13 के तहत मामला दर्ज किया गया है। 
उठे सवाल - दुकान संचालक कैसे अनजान? 
रेमडेसिविर की कालाबाजारी किए जाने को लेकर रविवार को की गई छापेमारी के दौरान न्यू मुनीश मेडिकोज के संचालक कामेश राजानी को पूरे घटनाक्रम से अनजान बताया था। इस दौरान वहाँ मौजूद लोगों ने इस बात पर हैरानी जताई थी कि जिस दुकान के कर्मचारी कालाबाजारी में लिप्त हैं, उस संचालक को इस बात की जानकारी न ही हो, यह बात गले से नहीं उतरती है। उधर, इस मामले में ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा जो प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया, उसमें दुकान संचालक का नाम नहीं था और उसी आधार पर पुलिस द्वारा मामला दर्ज किया गया है। 


 

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