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प्रतीक्षा सूची में शामिल उम्मीदवार को बांबे हाईकोर्ट ने दी राहत

प्रतीक्षा सूची में शामिल उम्मीदवार को बांबे हाईकोर्ट ने दी राहत

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बांबे हाईकोर्ट ने प्रतीक्षा सूची में नाम होने के बावजूद उम्मीदवार को नियुक्ति न देने के निर्णय को न्यायसंगत मानने से इंकार कर दिया है। यहीं नहीं तलाठी पद के लिए तैयार की गई प्रतीक्षा सूची में पहले क्रमांक पर रहनेवाले विजय गडवे को चार सप्ताह के भीतर तलाठी पद पर नियुक्त करने का निर्देश दिया है। गडवे ने दावा किया था कि तलाठी पद के लिए जिन उम्मीदवारों को चयनित किया गया था उसमे से एक उम्मीदवार सचिव जाधव ने चार महीने की नौकरी के बाद 4 मई 2017 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। जाधव का इस्तीफा चार महीने बाद यानी 2 अक्टूबर 2017 को स्वीकार कर लिया गया। इस बीच गडवे ने सरकार के पास रिक्त पर नियुक्ति देने का आग्रह किया। लेकिन उसके निवेदन पर विचार नहीं किया गया। फिर गडवे ने महाराष्ट्र प्रशासकीय न्यायाधिकरण(मैट) में आवेदन दायर किया। मैट ने भी गडवे को राहत देने से इंकार कर दिया।मैट ने अपने आदेश में साफ किया कि चूंकी पद तत्काल रिक्त नहीं हुआ है। इसलिए प्रतीक्षा सूची में शामिल याचिकाकर्ता को नियुक्ति न देने का निर्णय सही है। लिहाजा उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 

न्यायमूर्ति आरवी मोरे व न्यायमूर्ति एनजे जमादार की खंडपीठ के सामने गडवे के आवेदन पर सुनवाई हुई। इस दौरान गडवे की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने मैट के आदेश को खामीपूर्ण बताया। और अपने मुवक्किल को रिक्त पद पर नियुक्ति करने का निर्देश दिया। वहीं सरकारी वकील मौलीना ठाकुर ने मैट के आदेश को सही बताया और खंडपीठ से इस मामले में हस्तक्षेप न करने का आग्रह किया। 

मामले से जुड़े दोनों पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि प्रतीक्षा सूची तैयार करने का मुख्य उद्देश्य है कि चयनित उम्मीदवार के नौकरी से इस्तीफा देने व ज्वाइन न करने की स्थिति में प्रतीक्षा सूची के उम्मीदवार के नाम पर विचार किया जा सके। और सरकार फिर से पद के लिए लिखित परीक्षा व साक्षात्कार लेने की प्रक्रिया से बच सके। याचिकाकर्ता के मामले में जब चयनित उम्मीदवार ने पद से इस्तीफा दिया तो उस समय प्रतीक्षा सूची वैध थी। इसके अलावा सरकार ने अब तक रिक्त पद पर दोबारा नियुक्ति की प्रक्रिया नहीं शुरु की है। पद के तुरंत रिक्त होने की अावधारण को व्यापक रुप से देखा जाना चाहिए। अन्यथा प्रतिक्षा सूची का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। यह बात कहते हुए खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को चार सप्ताह के भीतर तलाठी पद पर नियुक्ति देने का निर्देश दिया। 
 

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