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हाईकोर्ट : अस्पताल जाने के लिए कर सकते हैं कार का इस्तेमाल, मास्क को लेकर नए सिरे से आदेश जारी करे एनपीपीए

हाईकोर्ट : अस्पताल जाने के लिए कर सकते हैं कार का इस्तेमाल, मास्क को लेकर नए सिरे से आदेश जारी करे एनपीपीए

डिजिटल डेस्क, मुंबई। राज्य के महाधिवक्ता आशुतोष कुम्भकोणी ने बॉम्बे हाईकोर्ट को सूचित किया है कि लॉकडाउन में मिली ढील के चलते लोग अब आपात स्थिति में अपनी कार का इस्तेमाल अस्पताल जाने के लिए कर सकते हैं। हाईकोर्ट में भारतीय जनता पार्टी के नेता व पूर्व सांसद किरीट सोमैया की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई चल रही है। याचिका में दावा किया गया है कि मुंबई सहित राज्य के अन्य इलाकों में एम्बुलेंस की भारी कमी है। जिसके कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता की खंडपीठ के सामने याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान कुम्भकोणी ने कहा कि सरकार क्षेत्रवार तरीके से आरटीओ की वेबसाइट में मोबाइल नम्बर के साथ निजी एम्बुलेंस की जानकारी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव बना रही है। इसके बाद यदि कोई एम्बुलेंस मालिक अस्पताल जाने से इंकार करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस बीच याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि एम्बुलेंस वाले मनमाना किराया वसूल रहे हैं। इस पर राज्य के महाधिवक्ता ने इस विषय पर निर्देश लेने के लिए खंडपीठ से समय की मांग की। इसके बाद खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 23 जून तक के लिए स्थगित कर दी। 


मास्क को लेकर नए सिरे से आदेश जारी करे एनपीपीए

इसके अलावा बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि नेशनल फार्मसिटुकल प्राइसिंग एथॉरिटी (एनपीपीए) को एन 95 मास्क की कीमत तय करने के संबंध में नए सिरे से आदेश जारी करे। एनपीपीए इस विषय पर निर्णय लेते समय ड्रग्स प्राइस कंट्रोल के प्रावधानों का भी ध्यान रखें। ड्रग्स प्राइस कंट्रोल के प्रावधानों के तहत ड्रग्स की कीमत में 10 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी नहीं कि जा सकती हैं। यह प्रावधान एन 95 मास्क की कीमत के संदर्भ में भी प्रासंगिक हैं। मास्क की कीमत की एक सीमा तय किए जाने की मांग को  लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अंजली दमानिया व अन्य की ओर से  जनहित याचिका दायर की गई  है। याचिका में मांग की गई है कि एनपीपीए को निर्देश दिया जाए कि एन 95 मास्क के मूल्य की एक सीमा तय करे। जिससे इसकी कालाबाजारी व जमाखोरी पर रोक लगाई जा सके। याचिका में दावा किया गया है कि यदि मास्क के मूल्य की एक कीमत नहीं तय की गई तो इसकी बिक्री मनमानी कीमत पर जारी रहेगी। और कोरोना योद्धाओं के लिए जरूरी यह मास्क सहज रुप से कम कीमत में उपलब्ध नहीं हो सकेगा। याचिका में कहा गया है अधिकतम 20 रुपए में बिकने वाला एन 95 मास्क दो सौ रुपये से अधिक की कीमत में बिक रहा है। मंगलवार को एडिसनल सालिसिटर जनरल अनिल सिंह के कहा कि इस मामले में निर्देश लेने का समय दिया जाए। इस दौरान उन्होंने इस विषय पर एनपीपीए की बैठक को लेकर एक दस्तावेज भी पेश किया। इससे असंतुष्ट खंडपीठ ने एनपीपीए को नए सिरे से मास्क की कीमत के बारे में निर्णय लेने को कहा। 

आईसीएसई बोर्ड की परीक्षा के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका 

कॉउन्सिल फॉर इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन बोर्ड (आईसीएसई बोर्ड) की ओर से दसवीं की परीक्षा लिए जाने के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। यह याचिका पेशे से वकील अरविंद तिवारी ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि महाराष्ट्र में जिस तरह से कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। उसके मद्देनजर परीक्षा का आयोजन ठीक नहीं होगा। याचिका में कहा गया है कि बच्चों के पुराने प्रदर्शन के आधार पर उन्हें अंक आवंटित किया जाए। क्योंकि महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक व उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने भी दसवीं की बची हुई परीक्षा रद्द कर दी है और महाराष्ट्र में दसवीं का परीक्षा परिणाम घोषित कर 11 वी में एडमिशन की तैयारी चल रही हैं। इसलिए 2 जुलाई से 12 जुलाई के बीच परीक्षा लेने के निर्णय को रद्द किया जाए। 
 

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राजस्थान में सियासी घमासान फिर तेज, मंत्रिमंडल विस्तार पर गहलोत-पायलट आमने सामने


डिजिटल डेस्क, जयपुर। पंजाब में जब से कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को दरकिनार कर कांग्रेस प्रदेश कमेटी का अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को बनाया है, तब से राजस्थान में पायलट गुट का भी जोश हाई है। अब पायलट गुट के दबाव के कारण मंत्रिमंडल पर नए सिरे से चर्चा हो रही है। मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल पर अशोक गहलोत और सचिन पायलट गुट के बीच तलवारें खिंच गईं हैं,  दोनों गुट आमने-सामने आ गये हैं। फिलहाल विस्तार की कोई तारीख तय नहीं है लेकिन यह माना जा रहा है कि अगले महीने इस पर कोई फैसला लिया जा सकता है। अभी गहलोत कैबिनेट में 9 पद खाली हैं। अगर कांग्रेस 'एक व्यक्ति एक पद' के फॉर्मूले को मानती है तो शिक्षा राज्य मंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा को अपना पद छोड़ना होगा। वैसे गोविंद डोटासरा ने यह कहकर कि 'मैं दो-चार दिन का मेहमान हूं' अपने जाने के संकेत दे दिये हैं। एक पद विधानसभा उपाध्यक्ष का भी खाली है।   
 
आंकड़ों के हिसाब से गहलोत कैबिनेट में कुल 11 पद खाली हैं। लेकिन इन सभी पदों पर फिलहाल मंत्री नहीं बनाए जाएंगे। अंदेशा है कि विस्तार के बाद भी नाराजगी रह सकती है। उन हालातों का सामना करने के लिए फिलहाल कैबिनेट में दो या तीन पद खाली ही रखे जाएंगे। 
मत्रिमंडल विस्तार पर अगर पूरी तरह गहलोत हावी रहे तो 2 या 3 ही मंत्रियों की छुट्टी होगी। पर ये फैसला लेना भी गहलोत के लिए आसान नहीं होगा,  क्योंकि उन्हें उन लोगों के बीच फैसला लेना होगा जिन लोगों ने मुश्किल वक्त में उनका साथ दिया था। 
अगर विस्तार पर पायलट गुट का दबाव रहा तो फिर 6 से 7 मंत्री आउट होना तय माने जा रहे हैं। और, अगर आलाकमान ने प्रदर्शन को आधार माना तो कई मंत्रियों को जाना पड़ सकता है, लेकिन इसकी उम्मीद कम ही है। हालांकि, अजय माकन का 28-29 को जयपुर दौरा है। जिसमें वह जयपुर आकर हर विधायक से बात करेंगे। उसके बाद यह तय होगा कि कौन रहेगा और कौन जाएगा?   

इन मंत्रियों की कुर्सी पर खतरा


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इनकी हो सकती मंत्रिमंडल में एंट्री- पायलट गुट के 3 और गहलोत गुट के 7 चहेरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। 

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डोटासरा के बयान से उनके जाने के संकेत

प्रदेश में मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाऐं जारी हैं उस बीच शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर छा गया है। इसमें उनको राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डीपी जारोली से कहते सुना जा सकता हैं- ‘मेरे पास एक घंटे फाइल नहीं रुकेगी, आप सोमवार को आ जाओ। एक मिनट में निकाल दूंगा, जितनी कहोगे। मैं दो-पांच दिन का ही मेहमान हूं। मुझसे जो कराना है करा लो।’ इसके बाद बोर्ड अध्यक्ष डीपी जारोली ने हाथ जोड़कर कहा कि मैं आता हूं सर। इस वायरल वीडियो के बाद से ये कयास तेज हो गए हैं कि मंत्रिमंडल से डोटासरा की रवानगी तय है। 
 

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ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

डिजिटल डेस्क, टोक्यो। टोक्यो ओलंपिक में पूरी दुनिया से आए हुए खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। खेल में अपनी प्रतिभा दिखाने के अलावा जर्मन की महिला जिमनास्टिक्स ने फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपने मन के कपड़े पहनने की आजादी को अपने खेल के जरिए प्रमोट करने का फैसला किया है, जिससे उनकी हर तरफ चर्चा हो रही है। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness

जर्मनी की महिला जिमनास्ट रविवार को हुए टोक्यो ओलंपिक मुकाबले में फुल बॉडी सूट पहने नजर आई। खिलाड़ियों ने बताया कि इस सूट को फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपनी पसंद के कपड़े पहनने की आजादी को बढ़ावा देने साथ ही महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए डिजाइन किया गया है जिसे पहनकर महिला खिलाड़ी आरामदायक महसूस कर सकें।

Germany's gymnasts wear body-covering unitards, rejecting 'sexualization' of sport - CNN 
 

जर्मनी की 4 जिमनास्ट जिनके नाम है पॉलीन शेफर-बेट्ज, सारा वॉस, एलिजाबेथ सेट्ज और किम बुई लाल और सफेद रंग के इस यूनिटार्ड सूट में नजर आई जो लियोटार्ड और लेगिंग्स को मिलाकर बनाया गया था। खिलाड़ी इसी को पहन कर मैदान में उतरीं थी। 

German gymnastics team, tired of 'sexualisation,' wears unitards | Deccan Herald
 

जर्मनी की टीम ने अपनी ट्रेनिंग में भी इसी तरह के कपड़े पहने हुए थे और अपने कई इंटरव्यूज में खिलाड़ियों ने कहा था कि इस साल फाइनल कॉम्पटीशन में भी वो फ्रीडम ऑफ चॉइस को प्रमोट करने के लिए इसी तरह के कपड़े पहनेंगी। खिलाड़ी सारा वॉस ने द जापान टाइम्स को बताया था यूनिटार्ड को फाइनल करने से पहले उन्होंने इस पर चर्चा भी की थी। सारा ने ये भी कहा कि जैसे जैसे एक महिला बड़ी होती जाती है, वैसे ही उसे अपने शरीर के साथ सहज होने में काफी मुश्किल होती हैं। हम ऐसा कुछ करना चाहते थे जिसमें हम अच्छे भी दिखे और सहज भी महसूस करें। चाहे वो कोई लॉन्ग यूनिटार्ड हो या फिर शॉर्ट। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness
 

सारा ने यह भी बताया कि उनकी टीम ने इससे पहले यूरोपीय चैंपियनशिप में भी इसी तरह का फुल बॉडी सूट पहना था और इसका उद्देश्य सेक्सुलाइजेशन को कम करना है। हम लोगों के लिए एक रोल मॉडल बनना चाहते थे जिससे वो हमे फॉलो कर सकें। जर्मन के खिलाड़ियों की लोग काफी प्रशंसा भी कर रहे हैं। 


ओलंपिक प्रतियोगिताओं में जिमनास्ट महिलाओं को फुल या हाफ बाजू के पारंपरिक लियोटार्ड ही पहनना होता है साथ ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में फुल कपड़े पहनने की अनुमति तो है लेकिन किसी भी महिला जिमनास्ट ने इस तरह के कपड़े नहीं पहने थे। यह पहली बार था जब जर्मन खिलाड़ी महिलाओं ने इस तरह के कपड़े पहने थे। 
बीते कुछ सालों में खेल प्रतियोगिताओं में महिलाओं के शारीरिक शोषण के बढ़ते मामलों को देख महिला खिलाड़ियो की चिंता बढ़ती जा रही है अब एथलीटों की सुरक्षा को देखते हुए नए सेफ्टी प्रोटोकॉल बनाए जा रहे हैं।