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सहकारी बैंक घोटाला : अजित पवार सहित 69 को क्लीन चिट के खिलाफ दायर हुई याचिका, EOW की क्लोजर रिपोर्ट पेश

सहकारी बैंक घोटाला : अजित पवार सहित 69 को क्लीन चिट के खिलाफ दायर हुई याचिका, EOW की क्लोजर रिपोर्ट पेश

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र स्टेट को ऑपरेटिव बैंक के 25 हजार करोड़ रुपए के कथित घोटाले के मामले में राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार सहित 69 लोगों को क्लीन चिट देने के विरोध में विशेष अदालत में याचिका दायर की गई है। यह याचिका इस मामले में शिकायतकर्ता सुरेंद्र अरोड़ा ने अधिवक्ता सतीश तलेकर के माध्यम से दायर की गई है। पिछले दिनों मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्लू) ने इस मामले को लेकर कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट (सी समरी) दायर की थी। जिसका याचिका में विरोध किया गया है और आगे की जांच का निर्देश देने का आग्रह किया गया है। याचिका के मुताबिक बैंक में कर्ज़ देने में हुई गड़बड़ी व सरकारी खजाने को हुए नुकसान से जुड़े आरोप कैग व नाबार्ड की वैधानिक रिपोर्ट के आधार पर लगाए गए थे। जिसे जांच के दौरान नजरअंदाज किया गया है।

याचिका में दावा किया है कि ईओडब्ल्यू ने गलत तरीके से यह निष्कर्ष निकाला है कि यह मामला सिविल स्वरुप का है। याचिका के अनुसार क्लोजर रिपोर्ट में 315 गवाहों के बयान दर्ज करने की बात कही गई है। इसमें से 32 गवाह जांच से जुड़े पुलिसकर्मी हैं, जबकि 40 पंच विटनेस हैं। 242 गवाहों में किसानों, बैंक कर्मचारी व अन्य लोगों का समावेश है। याचिका में कहा गया है कि किसी आरोपी से आरोपी के तौर पर पूछताछ नहीं कि गई है। इस मामले में राजनीतिक प्रभाव साफ नजर आता है। क्योंकि जांच के लिए किसी भी चीनी कारखाने का दौरा नहीं किया गया है। सभी को एक योजना के तहत क्लीन चिट दी गई है। 

याचिका में आग्रह किया गया है कि ईओडब्ल्यू की क्लोजर रिपोर्ट को अस्वीकार किया जाए और इस प्रकरण की स्वतंत्र व निष्पक्ष तरीक़े से आगे की जांच का निर्देश दिया जाए। शिकायतकर्ता को सीबीआई जांच की मांग के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में जाने के लिए 12 सप्ताह का समय दिया जाए। शिकायतकर्ता को 63 हजार पन्नों की क्लोजर रिपोर्ट की हार्ड कॉपी दी जाए। क्योंकि सॉफ्ट कॉपी कम्प्यूटर खुल नहीं रही है। इस याचिका पर 28 अक्टूबर 2020 को सुनवाई हो सकती है। 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।