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ऋतुजा, दिशांत 1500 मीटर दौड़ में अव्वल ,साक्षी, आदर्श सबसे तेज एथलीट 

ऋतुजा, दिशांत 1500 मीटर दौड़ में अव्वल ,साक्षी, आदर्श सबसे तेज एथलीट 

डिजिटल डेस्क, नागपुर। उपराजधानी की स्टार एथलीट ऋतुजा शेंडे और दिशांत वर्मा ने नागपुर यूनिवर्सिटी के शारीरिक शिक्षण विभाग द्वारा आयोजित अंतर कॉलेज एथलेटिक्स स्पर्धा की 1500 मीटर दौड़ में श्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया। महिला वर्ग में ऋतुजा ने जहां (4:57:16 मिनट) प्रतिद्वंद्वी एथलीट गीता चाचेरकर को 11 सेकंड से अधिक समय के अंतर से परास्त कर दिया, वहीं पुरुषों में दिशांत ने (4:13:76 मिनट) प्रथम स्थान हासिल किया। 

अमरावती रोड स्थित नागपुर  यूनिवर्सिटी  के सिंडर ट्रैक पर आयोजित स्पर्धा की महिलाओं की 1500 मीटर दौड़ में गीता ने 5:08:52 मिनट का समय निकाला जबकि रिया दोहेत्रे ने 5:34:84 मिनट में दौड़ पूरी की। पुरुषों में सीपी एंड बेरार कॉलेज के आकाश मेश्राम (4:17:27 मिनट) ने रजत और साकेत शारीरिक शिक्षण महाविद्यालय के मनोज पांडे (4:17:86 मिनट) ने कांस्य पदक जीता। दूसरे दिन हुई पुरुषों की ऊंची कूद में हिस्लॉप कॉलेज के जी राजेश (1.75 मीटर) ने स्वर्ण, एसएन मोर तुमसर के धनंजय (1.70 मीटर) ने रजत, सिटी प्रीमियर कॉलेज के प्रज्ज्वल लटाले (1.65 मीटर) ने कांस्य पदक जीता।

महिलाओं के गोलाफेंक में आईडीसीपीई की शिवानी नेगी (9.30 मीटर) ने स्वर्ण, एस जाजू जीएस कॉलेज पिपरी की भावना बावने (7.60 मीटर) ने रजत और वैशाली लुटे (7.21 मीटर) ने कांस्य पदक जीता। महिलाओं की 100 मीटर बाधा दौड़ में एसबी सिटी कॉलेज की श्वेता वासुले (20:79 सेकंड) ने प्रथम, सिटी प्रीमियर की निधि तिवारी (22:02 सेकंड) ने द्वितीय और बालपांडे कॉलेज की सबिता खंदादे (24:26 सेकंड) ने तृतीय स्थान हासिल किया। महिलाओं की ऊंची कूद में जेसीपीई की अर्चना (1.30 मीटर) ने स्वर्ण, आरएमपीसी भंडारा की निकिता बावने (1.25 मीटर) ने रजत, पिपरी की सोनु लासुंते (1.17 मीटर) ने कांस्य पदक जीता।

साक्षी, आदर्श सबसे तेज एथलीट 

स्पर्धा की फर्राटा दौड़ में श्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए एसबी सिटी कॉलेज की साक्षी अांबेकर और विद्याभारती कॉलेज सेलु के आदर्श भुरे ने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया। साक्षा ने जहां 13:06 सेकंड का समय निकाला वहीं आदर्श ने 10:80 सेकंड में दौड़ पूरी कर प्रथम स्थान हासिल किया। महिलाओं में एसबी सिटी की उत्कर्षा लेंडे (13:12 सेकंड) ने रजत और रेणुका कॉलेज की आदिति फाले (13:94 सेकंड) ने कांस्य पदक जीत लिया। पुरुषों में हिस्लॉप कॉलेज के गोपाल पलांदुरकर (11:10 सेकंड) दूसरे और जी राजेश (11:30 सेकंड) तीसरे स्थान पर रहे। महिलाओं की 400 मीटर दौड़ पर अपने दबदबे को कायम रखते हुए सायली वाघमारे (1:00:41 मिनट) ने स्वर्ण पदक जीत लिया। जया रानी (1:01:70 मिनट) ने रजत और मीना कलंबे (1:04:34 मिनट) ने कांस्य पदक जीत लिया।

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।