दैनिक भास्कर हिंदी: कांग्रेस नेता खड़गे ने कहा - पेट्रोल-डीजल के टैक्स से मोदी सरकार ने कमाए 25 लाख करोड़

July 12th, 2021

डिजिटल डेस्क, मुंबई। पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर कांग्रेस देश के प्रमुख विपक्षी दलों को गोलबंद करके 19 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून अधिवेशन में केंद्र सरकार को घेरेगी। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने यह जानकारी दी। सोमवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय गांधी भवन में पत्रकारों से बातचीत खड़गे ने कहा कि मोदी सरकार ने पेट्रोल और डीजल के टैक्स से सात सालों में 25 लाख करोड़ रुपए कमाया है। लेकिन केंद्र सरकार राज्यों को जीएसटी मुआवजे का भुगतान भी नहीं कर रही है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर इतना पैसा गया कहां?   

सात वर्षों में 326 बार बढ़ी कीमतें

साल 2014 से लेकर अब तक 326 बार पेट्रोल और डीजल की दरों में बढ़ोतरी हुई है। पिछले दो महीने में 38 बार पेट्रोलियम उत्पाद की कीमतों में इजाफा हुआ है। इसलिए पेट्रोल और डीजल मूल्य वृद्धि के खिलाफ संसद के मानसून सत्र में आवाज उठाने के लिए विपक्षी दलों को एकजुट किया जाएगा। खड़गे ने कहा कि केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी को लगातार बढ़ा रही है। इसके अतिरिक्त उस पर सेस (चुंगी) लगाया है। सेस से मिलने वाला राजस्व राज्यों को नहीं मिल पाता है। 16 सितंबर 2013 को पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय कर 9.48 प्रतिशत था। फिलहाल केंद्रीय कर 32.90 प्रतिशत है। खडगे ने कहा कि विश्व बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम होने के बावजूद पेट्रोल और डीजल के दाम कम नहीं हो रहे हैं। गडचिरोली में पेट्रोल लगभग 107 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। डीजल की कीमतें प्रति लीटर 100 रुपए तक पहुंच गई हैं। जबकि घरेलू गैस की कीमत 834 रुपए हो गई है। इसके बावजूद केंद्र सरकार यह स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है कि देश में मंहगाई बढ़ रही है। 

कीमतों में बढोतरी को लेकर मानसून सत्र में सरकार को घेरेगा विपक्ष 

पेट्रोल और डीजल पर कांग्रेस शासित राज्यों को टैक्स कम करने के सवाल पर खडगे ने कहा कि यदि कोई राज्य टैक्स कम करता है तो पड़ोसी राज्य के लोग कम टैक्स वाले राज्य में वाहनों में पेट्रोल भराने चले जाते हैं। इससे टैक्स कम न करने वाले राज्य को राजस्व नुकसान होता है। इसलिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों को कम करने का फैसला केंद्र सरकार को लेना चाहिए। खडगे ने कहा कि यूपीए सरकार के शासन में बीपीएल के 27 करोड़ लोग गरीबी रेखा के ऊपर लाए गए। जबकि मोदी सरकार के कार्यकाल में 23 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे आ गए हैं। पिछले एक साल में 98 लाख नौकरीपेशा लोगों का रोजगार छीना गया है। इसके बावजूद मुझे समझ में नहीं आता है कि लोग कैसे मोदी की तारीफ करते हैं। क्या यह तारीफ पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए करते हैं या फिर दाल और खाद्य तेल महंगा होने के लिए की जाती है। खड़गे ने कहा कि संसद सत्र में महंगाई के अलावा कोरोना, जनसंख्या नियंत्रण समेत लगभग 18 मुद्दों को उठाया जाएगा। 

 

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