दैनिक भास्कर हिंदी: पेट्रोल पर साथ आए, राफेल पर खींच लिया हाथ,कांग्रेस में गुटबाजी का झटका

September 12th, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर। शहर कांग्रेस में नेताओं की टशन कम नहीं हो रही है। पेट्रोलियम पदार्थों को लेकर सरकार के विरोध में प्रमुख गुट साथ आए थे। लेकिन एक दिन बाद ही वह साथ छूट गया। राफेल के मामले पर बुधवार को सरकार के विरोध में प्रदर्शन हुआ तो असंतुष्ट गुट शामिल नहीं हो पाया। दावा तो यह तक किया जा रहा है कि अब गुटबाजी का प्रदर्शन नए सिरे से सामने नजर आने लगेगा। गौरतलब है कि शहर कांग्रेस के नेताओं को गुटबाजी से दूर रहकर सरकार विरोधी कार्यक्रमों में पूरी ताकत के साथ सहयोग करने को कहा गया था। 10 सितंबर को भारत बंद प्रदर्शन के तहत नागपुर बंद के लिए कांग्रेस के अखिल भारतीय सचिव आशीष दुआ को पार्टी की ओर से नागपुर में नेताओं में समन्वय के लिए भेजा गया था। शहर की राजनीति से दूर रहने वाले रामटेक के पूर्व सांसद व कांग्रेस के महासचिव मुकुल वासनिक को भी बंद प्रदर्शन की विशेष जिम्मेदारी दी गई थी। लिहाजा बंद प्रदर्शन के दौरान एकजुटता दिखाने का प्रयास किया गया। 

हर कांग्रेस में एक असंतुष्ट गुट के नेता व अखिल भारतीय कांग्रेस में एससी सेल के अध्यक्ष डा.नितीन राऊत अपने समर्थकों के साथ बंद प्रदर्शन में शामिल हुए थे। जिले में कांग्रेस के एकमात्र विधायक सुनील केदार,पूर्व सांसद गेव आवारी, पूर्व विधायक अशोक धवड़ जैसे अन्य नेता भी शामिल हुए थे। असंतुष्ट गुट के एक अन्य नेता पूर्व मंत्री डॉ.अनीस अहमद भले ही प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए, लेकिन उनके समर्थक अतुल कोटेचा के साथ अन्य कार्यकर्ता शामिल थे। शहर कांग्रेस की कमान संभाल रहे शहर अध्यक्ष विकास ठाकरे व पूर्व केंद्रीय मंत्री विलास मुत्तेमवार के नेतृत्व में शहर के विविध क्षेत्रों में बंद प्रदर्शन का आव्हान करने सभी प्रमुख नेता पहुंचे थे। लेकिन बुधवार को संविधान चौक पर केंद्र सरकार के विरोध में राफेल विमान सौदा मामले को लेकर किए गए प्रदर्शन में असंतुष्ट गुट के नेता नजर नहीं आए।

नितीन राऊत, अनीस अहमद, सुनील केदार विरोध प्रदर्शन से दूर रहे। दावा किया जा रहा है कि असंतुष्ट गुट के नेताओं का सरकार के विरोध में अलग से प्रदर्शन होते रहेगा। पार्टी आलाकमान के निर्देशों का भी पालन नहीं होने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में फिर से निराशा बनने लगी है।

क्यों बिगड़ी बात
कांग्रेस में गुटबाजी दूर करने का प्रयास एक दिन में ही क्यों विफल हो गया,आखिर एकजुटता की बात क्यों बिगड़ गई,इन प्रश्नों का उत्तर जानने की सबमें उत्सुकता है। बताया जा रहा है कि असंतुष्ट गुट का गुस्सा शहर अध्यक्ष ठाकरे को लेकर है। भारत बंद प्रदर्शन के दौरान मनपा में नेता प्रतिपक्ष तानाजी वनवे ने शहर अध्यक्ष पर धक्कामुक्की करने के आरोप लगाए थे। बकायदा पुलिस थाने में शिकायत दी थी। कांग्रेस के अखिल भारतीय स्तर के पदाधिकारियों को भी शिकायत पत्र भेजा गया।

वनवे का कहना है कि बंद प्रदर्शन के तहत पैदल रैली के दौरान उन्हें शहर अध्यक्ष ने धमकाया। अपमानजनक लहजे में कहा कि तेरे को यहां किसने बुलाया है। वनवे ने इस मामले की शिकायत कांग्रेस महासचिव वासनिक से भी की है। हालांकि श्री ठाकरे साफ कह चुके हैं कि वनवे के आरोप निराधार है। उधर असंतुष्ट गुट के नेता यह कहने लगे हैं कि पार्टी कार्यक्रम में मनपा के नेता प्रतिपक्ष के साथ ही अपमानजनक व्यवहार होने लगे तो कार्यक्रम में जाने का क्या औचित्य रह जाता है। अन्य कार्यकर्ताओं व नेताओं के साथ भी वैसा ही व्यवहार हो सकता है। वनवे के आरोपों के मामले को सामने रखकर ही असंतुष्ट गुट फिर से दूरी बनाए हुए है।

 

 

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