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डीआरटी के अधिकारी को पद छोड़ने के कोर्ट ने दिए आदेश

डीआरटी के अधिकारी को पद छोड़ने के कोर्ट ने दिए आदेश

 डिजिटल डेस्क, नागपुर।  कर्ज वसूली प्राधिकरण (डीआरटी) नागपुर के पीठासीन अधिकारी विजय मोहन चिक्कम को अपना पद छोड़ने के आदेश जारी किए गए है। सर्वोच्च न्यायालय की हरी झंडी के बाद  केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी सुभाषचंद्र अमीन ने यह आदेश जारी किया है। उल्लेखनीय है कि मंत्रालय ने 12 जुलाई 2017 को चिक्कम को नागपुर डीआरटी का पद छोड़ कर उनकी मूल नियुक्ति के स्थान (खम्मम जिला न्यायालय) पर लौटने के आदेश दिए थे। चिक्कम द्वारा सर्वोच्च न्यायालय की शरण लेने पर न्यायालय ने 28 जुलाई 2017 को मंत्रालय के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई थी। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्थगन हटा लिया। 

यह है मामला 
विजय मोहन चिक्कम को 20 अक्टूबर 2016 को नागपुर डीआरटी का पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया था। इसके पूर्व वे आंध्र प्रदेश के खम्मम जिले में बतौर जिला न्यायाधीश कार्यरत थे। उस वक्त खम्मम न्यायालय मंे नियुक्ति के नाम पर बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया। जिसमें चिक्कम पर भी गंभीर आरोप लगे। तब तेलंगाना हाईकोर्ट ने मामले में विभागीय जांच बिठाई। इस दरमियान  उनका नागपुर डीआरटी में स्थानांतरण हुआ। इधर जांच समिति ने चिक्कम के खिलाफ सबुतों को देखते हुए उन्हें नागपुर डीआरटी से वापस उनकी मूल नियुक्ति खम्मम बुला कर जांच आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। समिति की सिफारिश पर वित्त मंत्रालय  ने 12 जुलाई 2017 को उन्हें पद से मुक्त कर अपनी मूल नियुक्ति की जगह लौटने के आदेश जारी किए। 

भ्रष्टाचार मामले में जांच चलेगी
इस आदेश को उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। तब से सर्वोच्च न्यायालय ने उनके हैदराबाद स्थानांतरण पर अंतरिम स्थगन लगाया था। अब हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने स्थानांतरण पर से स्थगन हटा दिया। लेकिन अब 60 वर्ष की उम्र पार कर जाने के कारण वे खम्मम की अपनी मूल नियुक्ति से सेवानिवृत्त हो गए हैं। ऐसे में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि उन्हें सेवा मंे वापस नहीं लिया जा सकता। सर्वोच्च न्यायालय ने तेलंगाना हाईकोर्ट प्रशासन को चिक्कम के खिलाफ जांच जारी रखने के आदेश दिए है। 

नागपुर में वकीलों से नहीं बनती थी
उल्लेखनीय है कि नागपुर में चिक्कम का कार्यकाल खासा विवादित रहा और वकीलों का एक बड़ा वर्ग उनकी कार्यप्रणाली से सहमत नहीं था। डीआरटी वकील संघ अध्यक्ष एड.अतुल पांडे के नेतृत्व में वकीलों ने मुख्य पीठासीन अधिकारी से शिकायत की थी। संघ ने चिक्कम के खिलाफ प्रस्ताव भी पारित किया था। वहीं अधिवक्ता प्रवीण दहाट और श्वेता बुुरबुरे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चिक्कम के बुरे बर्ताव का भी मुद्दा उठाया था। उन पर पक्षपात के भी आरोप लगाए थे। हाईकोर्ट में इस मामले में एड.एम.अनिल कुमार कामकाज देख रहे हैं।   

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।