दैनिक भास्कर हिंदी: महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में पीने लायक नहीं है पानी, अकोला में 42, नागपुर में 30% नमूने फेल

January 31st, 2019

डिजिटल डेस्क, मुंबई। प्रदेश के 34 जिलों के ग्रामीण अंचल में पानी के 17 प्रतिशत नमूने दूषित पाए गए हैं। राज्य भर में सबसे अधिक नांदेड़ में 46 प्रतिशत, अकोला में 42 प्रतिशत, बुलढ़ाणा में 35, भंडारा में 34, जालना में 31 और नागपुर में 30 प्रतिशत पानी के नमूने अयोग्य मिले हैं। यानी पानी के ये नमूने मानक पर खरे नहीं उतरने के कारण पीने के योग्य नहीं है। प्रदेश सरकार के जलापूर्ति व स्वच्छता विभाग की पानी गुणवत्ता से जुड़ी साल 2018-19 की जिलावार रासायनिक व जैविक पृथक्करण रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। राज्य भर से रासायनिक व जैविक पृथक्करण के लिए पानी के 5 लाख 62 हजार 60 नमूने लिए गए थे। जिसमें से 17 प्रतिशत नमूने अयोग्य पाए गए हैं। जलापूर्ति व स्वच्छता विभाग के एक अधिकारी ने ‘दैनिक भास्कर’ से बातचीत में कहा कि पीने के लिए इस्तेमाल में लाया जाने वाले पानी की गणुवत्ता की जांच के लिए ये नमूने लिए जाते हैं। एक ही जगह के पानी के नमूने तीन बार से अधिक बार दूषित पाए जाने पर जिला परिषद के अधिकारी वहां की जलापूर्ति बंद कर कर जलापूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है।   

अधिकारी ने कहा कि अकोला, बुलढ़ाणा और जलगांव का कुछ इलाका खारे पानी वाला पट्टा होने के कारण वहां पर दूषित जल का प्रतिशत अधिक नजर आ रहा है। इसके अलावा पाइप लाइन फुटने और नालों के आसपास के नूमने लेने पर भी जांच में पानी दूषित पाया जाता है। जलापूर्ति व स्वच्छता विभाग के अनुसार वर्धा में 13 हजार 91 नमूने में से 25 प्रतिशत, वाशिम में 3 हजार 477 नमूने में से 24 प्रतिशत, यवतमाल में 22 हजार 803 नमूने में से 26 प्रतिशत, अमरावती में 19 हजार 124 नमूने में से 21 प्रतिशत, औरंगाबाद में 9 हजार 601 नमूने में से 24 प्रतिशत, बीड़ में 11 हजार 282 नमूने में से 20 प्रतिशत, नाशिक में 24 हजार 443 नमूने में से 15 प्रतिशत, गोंदिया में 34 हजार 463 नमूने में से 12 प्रतिशत और गडचिरोली में 22 हजार 900 नमूने में से 10 प्रतिशत नमूने और लातूर में 9 हजार 653 में से 23 प्रतिशत नमूने अयोग्य मिले हैं। 

धुलिया, अहमदनगर और नंदूरबार का पानी कम दूषित

राज्य भर में धुलिया के ग्रामीण इलाकों में सबसे कम 4 प्रतिशत पानी के नमूने खराब पाए गए हैं। धुलिया में 10 हजार 546 नमूनों की जांच की गई थी। अहमदनगर में 18 हजार 163 नमूने में से 6 प्रतिशत और नंदूरबार 15 हजार 468 नमूने में से 6 प्रतिशत नमूने अयोग्य पाए गए हैं।